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Mothers Day 2019 : मदर्स डे पर मां को भूलने की बीमारी से छुटकारा दिलाने के टिप्स

Mothers Day 2019 : इस बार 12 मई 2019 (12 May 2019) को पूरी दुनिया में मदर्स डे यानि मातृ दिवस 2019 (Mothers Day 2019) बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। वैसे तो मां अपने बच्चे और परिवार की हर छोटी-बड़ी भूमिका को बखूबी निभाती हैं। अक्सर महिलाएं घर-बाहर की जिम्मेदारियों को संभालने और बच्चों की परवरिश में सामंजस्य बैठाने में तनाव का शिकार होने लगती हैं। इस वजह से उन्हें डिप्रेशन, एंग्जाइटी, स्लीप डिस्टरबेंस, चिड़चिड़ाहट, गुस्सा, तनाव, हाइपरटेंशन जैसी परेशानियां हो जाती हैं। ऐसे में परिवार के सदस्य कुछ बातों का ध्यान रखें तो मां को इन समस्याओं से बचाया जा सकता है। लेकिन उम्र और बढ़ते तनाव की वजह से कुछ शारीरिक और मानसिक बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे में आज हम आपको मदर्स डे पर मां की मेंटल हेल्थ को स्ट्रांग बनाने के तरीके बता रहे हैं। मदर्स डे 2019 (Mother's Day 2019) के दिन पर लोग मां के साथ अन्य लोगों को मदर्स डे की शुभकामनाएं देने के लिए गूगल (Google) के सर्च इंजन पर मदर्स डे फोटो (Mothers Day Photo), मदर्स डे वीडियो (Mother's Day video)और मदर्स डे स्टेट्स (Mother's Day Status) ढ़ूंढ़ते हैं और व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हैं।

Mothers Day 2019 : मदर्स डे पर मां को भूलने की बीमारी से छुटकारा दिलाने के टिप्स

Mothers Day 2019 : इस बार 12 मई 2019 (12 May 2019) को पूरी दुनिया में मदर्स डे यानि मातृ दिवस 2019 (Mothers Day 2019) बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाएगा। वैसे तो मां अपने बच्चे और परिवार की हर छोटी-बड़ी भूमिका को बखूबी निभाती हैं। अकसर महिलाएं घर-बाहर की जिम्मेदारियों को संभालने और बच्चों की परवरिश में सामंजस्य बैठाने में तनाव का शिकार होने लगती हैं। इस वजह से उन्हें डिप्रेशन, एंग्जाइटी, स्लीप डिस्टरबेंस, चिड़चिड़ाहट, गुस्सा, तनाव, हाइपरटेंशन जैसी परेशानियां हो जाती हैं।

ऐसे में परिवार के सदस्य कुछ बातों का ध्यान रखें तो मां को इन समस्याओं से बचाया जा सकता है। लेकिन उम्र और बढ़ते तनाव की वजह से कुछ शारीरिक और मानसिक बीमारियां घेर लेती हैं। ऐसे में आज हम आपको मदर्स डे पर मां की मेंटल हेल्थ को स्ट्रांग बनाने के तरीके बता रहे हैं।

बच्चे को जन्म देने के बाद से उसके अच्छे पालन-पोषण, उसकी अच्छी परवरिश, उसकी पढ़ाई-लिखाई, अच्छे करियर के लिए मां हर संभव प्रयास करती है। इस वजह से वे तनाव और मानसिक दबावों से भी गुजरती हैं, जो आगे जाकर मां के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि वे तो अपना ध्यान रखें ही, आप भी अपनी मां की मेंटल हेल्थ का ध्यान रखें।

मेंटल प्रॉब्लम्स के कारण

उम्र के तीसरे दशक में महिलाओं को फैमिली एडजस्टमेंट और बच्चों की चिंता रहती है, चौथे और पांचवें दशक में मेनोपॉज के बाद शारीरिक कुछ शारीरिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन लेवल गड़बड़ाने से बॉडी में कई बदलाव आते हैं, शरीर में कैल्शियम की कमी से ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका रहती है। वे उतनी एक्टिव नहीं रह पातीं या उतना काम नहीं कर पातीं जितना फैमिली के सदस्य उनसे उम्मीद करते हैं। नतीजतन मानसिक तनाव से घिर जाती हैं।

मिडलाइफ-क्राइसिस सबसे ज्यादा महिलाओं को ही झेलना पड़ता है। 45 साल की उम्र के बाद उनमें अकेलापन आने लगता है। पीरियड्स डिस्टरबेंस, अर्ली मेनोपॉज, स्किन प्रॉब्लम, हेयर लॉस जैसे शारीरिक बदलाव आने लगते हैं। उनका शरीर भी पहले जैसे चुस्त-दुरुस्त नहीं रहता। लेजी लाइफस्टाइल और अनहेल्दी ईटिंग हैबिट्स की वजह से अधिकतर महिलाओं में ओबेसिटी, डायबिटीज, थाइरॉयड, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां शुरू हो जाती हैं।

हार्मोनल बदलावों और छोटी-छोटी तकलीफों को इग्नोर करने के कारण महिलाएं मोटापा, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने, हार्ट संबंधी बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। कई महिलाओं के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन में कैंसर, ट्यूमर भी हो जाता है। इन तमाम शारीरिक बीमारियों का असर उनके मन पर पड़ता है और वे मूड स्विंग, एंग्जाइटी, टेंशन या डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं।

ऐसे करें बचाव

- घर-परिवार के लोगों और बच्चों को चाहिए कि अपनी मां के लिए फैमिली एन्वॉयर्नमेंट हेल्दी बनाने की कोशिश करें। उनको केवल प्रैक्टिकल ही नहीं इमोशनल सपोर्ट भी देना चाहिए।

- घर की सारी जिम्मेदारी केवल मां को ही नहीं, सबको बांटनी चाहिए। उनकी इमोशंस, जरूरतों, इच्छाओं और हेल्थ इश्यूज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

- मां के रूटीन चेकअप के अलावा किसी भी तरह की दिक्कत दिखाई देने पर डॉक्टर को कंसल्ट करने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

खुद भी रखें अपना ध्यान

अच्छे सपोर्ट सिस्टम और पॉजिटिव रिलेशनशिप से आप अपनी तमाम परेशानियों, तनावों को भुलाने, पर्सनल रिलेशनशिप में आई दरारों को भर सकती हैं। अपने आस-पास के लोगों और रिलेटिव्स से सोशल-इंटरैक्शन की वजह से आप स्ट्रेस से होने वाले डिसऑर्डर से बच सकती हैं।

इसलिए जरूरी है कि आप भी बिजी लाइफस्टाइल के बावजूद अपने लिए थोड़ा टाइम जरूर निकालें, सोशल बनें। फ्रेंड्स से इंटरैक्शन करें। फ्रेंड्स, सिस्टर्स, कजिन्स या अच्छे पड़ोसियों से बात करें। उनके साथ सुबह-शाम वॉक पर पर्सनल मैटर शेयर करके मेंटल स्ट्रेस को दूर करें।

लेखिका - रजनी अरोड़ा

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