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इस मौसम में बढ़ती हैं मच्छर जनित बीमारियां

मानसून के दौरान मच्छर तेजी से पनपते हैं। इसीलिए मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां होने की संभावना भी बढ़ जाती है। मच्छरों से होने वाली मुख्य बीमारियां और उनसे बचाव के बारे में जानिए।

इस मौसम में बढ़ती हैं मच्छर जनित बीमारियां
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मानसून में पानी की बौछार बेशक सुकून लेकर आती है, लेकिन यही मौसम मच्छरों और अन्य कीड़े-मकौड़े के भी पनपने का होता है। जिनके काटने से तरह-तरह की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यही वजह है कि इस दौरान डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले देश के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ महानगरों में भी बढ़ते हैं। बारिश की वजह से जगह-जगह जलभराव, मौसम में नमी के कारण मच्छरों को विकसित होने का माहौल देती हैं।

रहना होगा अधिक सजग

इन रोगों से बचने के लिए लोगों को इस वर्ष अधिक गंभीर होकर अपना बचाव करना चाहिए, क्योंकि इस दौर में जब कोविड के संक्रमण की चपेट में पूरी दुनिया है, स्थितियां और भी जटिल होने की संभावना है, क्योंकि मच्छरों से होने वाली बीमारियों के कुछ लक्षण कोविड से मिलते-जुलते हैं, जैसे बुखार आना। ऐसे में बेहद जरूरी है कि आप पहले से भी ज्यादा अपना ख्याल रखें।

डेंगू: मच्छर के काटने से होने वाली यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका सही समय पर इलाज शुरू हो जाना बेहद जरूरी है। इसमें मरीज को मांसपेशियों और हड्डियों में बेहद दर्द महसूस होता है, जिसके कारण उसमें बहुत कमजोरी भी आ जाती है। यह एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है जिसके काटने के 3 से 4 दिन के अंदर बुखार होना शुरू होता है। इसलिए किसी भी तरह के बुखार को नजरअंदाज न करें और तुरत जांच करवाएं। इसके बाद ट्रीटमेंट में देर न करें।

मलेरिया: यह मलेरिया परजीवी कीटाणु प्लाजमोडियम, जिसके संवाहक मच्छर होते हैं, के कारण होने वाला एक प्रकार का बुखार है। मादा एनॉफिलीज मच्छर में यह कीटाणु रहता है। इस रोग में ठंड लगने के साथ-साथ कंपकंपी उठना जैसे लक्षण नजर आते हैं। इसका कुछ समय तक लगातार उपचार करवाना होता है।

चिकुनगुनिया: मच्छरों के काटने के कारण ही होने वाला एक प्रकार का बुखार है चिकुनगुनिया, जिसका असर हड्डियों पर बहुत ज्यादा पड़ता है। इसके कारण चलने फिरने आदि तक में दिक्क्त और दर्द महसूस होता है। इलाज होने पर रोग सही हो जाने के बाद भी कुछ समय तक यह हड्डियों का दर्द रह सकता है। इसका भी इलाज संभव है।

तुरंत कराएं टेस्ट

यहां ध्यान देने वाली बात है कि बुखार के लक्षण होने पर अगर डेंगू या मलेरिया दोनों की पुष्टि करनी हो तो रोगी का ब्लड टेस्ट किया जाएगा लेकिन अगर कोविड-19 का शक हो तो स्वैब टेस्ट किया जाएगा। बेहतर है कि रोग की सही पुष्टि के लिए आप बिना झिझक और देर किए दोनों तरह की जांच करवा लें।

आईबीएच है पेनफुल

आईबीएच या इंसेक्ट बाइट हाइपरसेंसिटिविटी दरअसल मच्छर के काटने से त्वचा में होने वाले वे चकत्ते या लाल दाने हैं, जो मानसून के मौसम में होते हैं। इसके दाने आमतौर पर बाजुओं, हाथों के पिछले हिस्से घुटने, पैरों आदि में दिखाई देते हैं, पेट, पीठ या शरीर के ऐसे अंग जो अधिकतर समय ढंके रहते हैं वहां कम या नहीं नजर आते, मतलब त्वचा का वह हिस्सा जो वातावरण के सीधे संपर्क में होता है, वहां इसके होने की संभावना होती है।

इसलिए त्वचा को पूरी तरह से ढंकने वाले कपड़े पहनने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके। यदि इन दानों पर ध्यान न दिया जाए और खुजला दिया जाए तो मौसम में मौजूद नमी के कारण इनमें सक्रमण भी हो सकता है और स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए मच्छरों के काटने से होने वाले रोगों के साथ-साथ इसके त्वचा पर प्रभाव को भी नजरअंदाज न करें।

बचाव के उपाय

•-अपने घर के आस-पास पानी का भराव न होने दें।

-पूरा तन ढंकने वाले कपड़े पहनें और हल्के रंग के कपड़े पहनें क्योंकि गाढ़े रंगों की ओर आकर्षित होकर मच्छर आते हैं।

-बच्चों का विशेष ध्यान रखें, खुले वातावरण में आने से पहले मॉस्क्वीटो रेपलेंट का इस्तेमाल करें।

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