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International Yoga Day 2021: ये योगा आसन पीरियड्स के दर्द में हैं असरदार, जानें सही तरीका

कई योगासन ऐसे हैं, जो तकलीफों से तुरंत आराम दिलाने में मददगार होते हैं। कुछ योगासन ऐसे भी है, जो महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत दिलाने में मददगार होते हैं।

International Yoga Day 2021: ये योगा आसन पीरियड्स के दर्द में हैं असरदार, जानें सही तरीका
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21 जून को विश्व योगा दिवस

हेल्थ। योग (Yoga) करने को खूब फायदे हैं। हर किसी को दिन भर में कम से कम 20 मिनट योग करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International yoga day) भी मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य ये है कि लोगों को योग के प्रति जागरूक किया जाए। इस दिन दुनियाभर में योग से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कई योगासन ऐसे हैं, जो तकलीफों से तुरंत आराम दिलाने में मददगार होते हैं। कुछ योगासन ऐसे भी है, जो महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द से राहत दिलाने में मददगार होते हैं।

मार्जरी आसन

इस आसन में रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव मिलता है, क्योंकि इसे करते समय आगे की तरफ झुकना और पीछे की तरफ मुड़ना पड़ता है। इसे करने से पीठ दर्द, कमर दर्द और गर्दन के दर्द से राहत मिलती है इसलिए इस आसन को पीरियड्स के दौरान करना सही माना जाता है।

उष्ट्रासन

इस आसन को करने के लिए आपको घुटने के सहारे बैठना होता है। फिर कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें। सांस लेते हुए मेरुतदंड को खींचे और गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें। इसी स्थिति में थोड़ा सांस लेते रहें। फिर सांस छोड़ते हुए अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं और हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं। ध्यान रहे कि घुटने कंधों के समानांतर हों और पैरों के तलवे आसमान की तरफ हों।

बटरफ्लाई आसन

इसको करने से मासिक धर्म की पीड़ा कम हो जाती है और प्रजनन अंग मजबूत होते हैं। इसको करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। अब घुटनों को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं, दोनों हाथों से अपने पांव को कस कर पकड़ लें। एड़ी को जननांगों के करीब रखने की कोशिश करें और तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें। इसे करते समय सांस लें और छोड़ें।

वज्रासन

पैरों को जमीन पर फैलाएं और बैठ जाएं, साथ ही हाथों को शरीर के बगल में रखें। फिर दाहिने पैर को घुटने से मोड़ते हुए दाहिने कूल्हे के नीचे रखें। ठीक ऐसा ही बाएं पैर को बाएं कूल्हें के नीचे लाएं। दोनों हाथों को घुटनों पर रखें और इस दौरान रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीध रखें और फिर आंखें बंद कर 10- 15 मिनट ध्यान लगाएं।


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