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International Yoga Day 2019: गर्भवती महिलाओं के लिए योग

International yoga Day 2019: 21 June (21 June) को इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day)है। योग और प्राणायाम भारत की साढ़े चार हजार साल पुरानी धरोहर और विरासत है। योग (Yoga) और प्राणायाम (Pranayam) को स्वस्थ रहने का सबसे आसान तरीका माना जाता है। क्योंकि इसके नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक (Physically) बल्कि मानसिक (Mentally) रूप से भी व्यक्ति को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसलिए आज देश के साथ विदेशों में भी योग के महत्व को समझा और अपनाया है। इसलिए हर साल की ही तरह इस बार भी 21 June 2019 (21 June) को पूरा विश्व (World) फिट और हेल्दी रहने के लिए योगा डे 2019 (Yoga Day 2019) मनाया जाएगा।

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International yoga Day 2019: 21 June (21 June) को इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day)है। योग और प्राणायाम भारत की साढ़े चार हजार साल पुरानी धरोहर और विरासत है। योग (Yoga) और प्राणायाम (Pranayam) को स्वस्थ रहने का सबसे आसान तरीका माना जाता है। क्योंकि इसके नियमित अभ्यास से न सिर्फ शारीरिक (Physically) बल्कि मानसिक (Mentally) रूप से भी व्यक्ति को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसलिए आज देश के साथ विदेशों में भी योग के महत्व को समझा और अपनाया है। इसलिए हर साल की ही तरह इस बार भी 21 June 2019 (21 June) को पूरा विश्व (World) फिट और हेल्दी रहने के लिए योगा डे 2019 (Yoga Day 2019) मनाया जाएगा।

गर्भावास्था, महिलाओं के जीवन का सबसे खूबसूरत समय होता है। लेकिन इस समय महिलाओं को बहुत सारे शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। जिसकी वजह से उनमें चिड़चिड़ाहट, थकान और बार-बार घबराहट जैसे महसूस होता है। इसलिए आज हम आपको अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 (International Yoga Day 2019) से पहले गर्भवती महिलाओं को लिए योग (Yoga for Pregnant Women) बता रहे हैं। जिससे वो गर्भावास्था, प्रसव और उसके बाद होने वाली परेशानियों से निजात पा सकती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए योग




1.गर्भावास्था के दौरान अनुलोम-विलोम करना बेहद फायदेमंद रहता है। क्योंकि इसका नियमित अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य बना रहता है। जिससे बार-बार होने वाली घबराहट से निजात मिलती है।




2.गर्भावास्था में सुखासन करना बहुत उपयोगी होता है। क्योंकि इससे पैरों और घुटनों में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। इसके साथ ही आसन के दौरान कमर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने से होने वाले दर्द से राहत मिलती है।




3. गर्भावास्था में पर्वतासन का रोजाना अभ्यास करने से घुटनों और पैरों को मजबूती मिलती है। कंधों और हाथों में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। इसके अलावा रीढ़ कीहड्डी के दर्द में भी आराम मिलता है।




4.गर्भावास्था के दौरान शवासान करने से मानसिक तनाव दूर होता है। इसके साथ ही शरीर की थकाव दूर होती है।




5.त्रिकोणासन गर्भवती महिलाओं को गर्भावास्था में जरूर करना चाहिए। इसका नियमित अभ्यास करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कब्ज से छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

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