Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

International Yoga Day 2019 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जानें पीरियड्स के दर्द को दूर करने के लिए योग

International Yoga Day 2019 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 (International Yoga Day 2019), आज यानि 21 जून को भारत (India) समेत पूरी दुनिया (World) में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार विश्व योगा डे की थीम (World Yoga Day Theme) क्लाइमेट एक्शन (climate Action)रखी गई है। इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) को मनाने के लिए बच्चों और बड़ों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। लोग अपने-अपने स्तर पर लोगों के साथ मिलकर योगाभ्यास (Yogaabhayas) कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको इंटरनेशनल योगा डे 2019 (International Yoga Day 2019) पर महिलाओं की मासिक समस्या (Women Monthly Problem) यानि पीरियड्स में होने वाले दर्द के लिए योग (Yoga for Period Pain) बता रहे हैं।

International Yoga Day 2019 Yoga to Remove of Period PainInternational Yoga Day 2019 Yoga to Remove of Period Pain

International Yoga Day 2019 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 (International Yoga Day 2019), आज यानि 21 जून को भारत (India) समेत पूरी दुनिया (World) में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार विश्व योगा डे की थीम (World Yoga Day Theme) क्लाइमेट एक्शन (climate Action)रखी गई है। इंटरनेशनल योगा डे (International Yoga Day) को मनाने के लिए बच्चों और बड़ों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। लोग अपने-अपने स्तर पर लोगों के साथ मिलकर योगाभ्यास (Yogaabhayas) कर रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको इंटरनेशनल योगा डे 2019 (International Yoga Day 2019) पर महिलाओं की मासिक समस्या (Women Monthly Problem) यानि पीरियड्स में होने वाले दर्द के लिए योग (Yoga for Period Pain) बता रहे हैं।

पीरियड्स के दर्द को दूर करने के लिए योग : / Yoga For Period




1.सेतु बंध सर्वांगासन - सेतु बंध सर्वांगासन करने के लिए सबसे पहले एक दरी या योगा मैट पर सीधे लेट जाएं। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए एड़ियों को सीधा रखें। अब दोनों हाथों से एड़ियों को कसकर पकड़ें और धीरे-धीरे कमर के साथ आगे के हिस्से को ऊपर की ओर उठाकर एक सेतु यानि ब्रिज बनाएं। अपनी ठोढ़ी को सीने से छुएं और फिर इस स्थिति में कुछ देर रुकें। अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए शरीर को पहले वाली सामान्य अवस्था में लाएं।

सेतु बंध सर्वांगासन की सावधानी - अगर आपको गर्दन या पीठ दर्द की समस्या है तो इस आसन को करने से बचें।




2.बालासन - बालासन करने के लिए सबसे पहले एक खुले स्थान पर दरी या योगा मैट पर वज्रासन यानि दोनों पैरों को मोड़कर कूल्हों के नीचें एड़ियां रखकर बैठ जाएं। इसके बाद गहरी सांस लेते हुए अपने माथे को जमीन की तरफ झुकाएं। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के पास हथेली ऊपर की तरफ करके रखें। इसके बादअपने दोनों हाथों को जांघों को स्पर्श करते हुए पीछे की ओर फैला लें। अब अपने माथे को जमीन से छुएं और कुछ देर उस स्थिति में रुकें। इसके बाद धीरे-धीरेसांस छोड़ते हुए वापस पहली वाली अवस्था में आएं।

बालासन सावधानी : बालासन को हाई बी.पी,गर्भवती महिलाएं, पेट संबंधी रोगों और घुटनों में दर्द वाले लोग करने से बचें।




3. धनुरासन - धनुरासन करने के लिए सबसे पहले एक दरी या योगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद हाथों को नीचे की ओर फैलाते हुए शरीर को ढीला छोड़ें। अब सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़े और एड़ियो को कूल्हे के ऊपर के हिस्से की ओर रखें। इसके बाद हाथों से पैरों को कसकर पकड़ें। अब गहरी सांस लेते हुए सिर और आगे के हिस्से को ऊपर को धीरे-धीरे उठाएं। इस स्थिति में कुछ देर रुकें और फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को पहले वाली अवस्था में लाएं।

धनुरासन की सावधानी : अगर आप कमर में ज्यादा दर्द,हर्निया,पेट में अल्सर और बी.पी की समस्या से पीड़ित हैं, तो आसन करने से बचें।


4.शलभासन - शलभासन करने के लिए सबसे पहले एक दरी या योगा मैट या दरी पर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद अपने दोनों पैरों को सीधा फैला लें और अपने पैर के पंजों को सीधा रखते हुए ऊपर (आकाश या छत) की तरफ रखें। अब अपने दोनों हाथों को एक-एक कर जांघों के नीचे रखें। इसके बाद अपने सिर को सीधा रखें और सामान्य रुप से गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों पैरों को जोड़ लें। अब धीरे-धीरे अपने पैरों जितना संभव हो सके ऊपर उठाएं और उस स्थिति में कुछ देर रुकें। इसके बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे पैरों को नीचें लाएं और सामान्य रुप से लेट जाएं।

शलभासन की सावधानी - उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अस्थमा, रीढ़ की हड्डी और ज़्यादा कमर दर्द में इस आसन को करने से बचना चाहिए।




5.सुप्त बद्ध कोणासन - सुप्त बद्ध कोणासन करने के लिए सबसे पहले दरी पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं। इसके बाद दोनों हाथों को शरीर के बराबर में हथेलियां ऊपर रखते हुए सीधा रखें। अब अपने घुटनों को धीरे-धीरे मोड़े और पैरों के तलवों को नमस्कार की मुद्रा में मिलाएं। याद रखें कि आपके पैर जमीन से स्पर्श कर रहे हों। धीरे-धीरे जुड़ी हुई एड़ियों को जांघों के पास लेकर आएं, फिर हाथों की मदद से जांघों को दबाएं और कुछ देर इस स्थिति में रूकने के बाद पहले की सामान्य स्थिति में वापस लाएं।

सुप्त बद्ध कोणासन की सावधानी - अगर आपके घुटनों, कूल्हों या कमर में दर्द और रीढ़ की हड्डी की समस्या है तो इस आसन को न करें।

Share it
Top