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Yoga Day 2019 : इंटरनेशनल योगा डे पर जानें डायबिटीज को दूर करने के लिए बेस्ट योग पोज

Yoga Day 2019 : अनुचित खान-पान और अस्त-व्यस्त जीवनशैली की वजह से मधुमेह यानी डायबिटीज लोगों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। यह रोग अभी लाइलाज है लेकिन सही जीवनशैली और योगाभ्यास के जरिए इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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Yoga Day 2019 :लोगों की खराब जीवनशैली के कारण दुनिया में कई तरह के रोग तेजी से फैल रहे हैं, इनमें से डायबिटीज भी एक है। डायबिटीज बहुत तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है। स्थिति यह है कि न सिर्फ अधिक उम्र के लोगों को बल्कि आज के समय में युवा और बच्चे भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के हर 11 में से एक व्यक्ति डायबिटीज का रोगी है। इनमें से 46 प्रतिशत लोगों को यह तक नहीं मालूम है कि वे डायबिटीज के शिकार हैं क्योंकि डायबिटीज के प्रारंभिक लक्षण काफी सामान्य होते हैं।

कारण-लक्षण-प्रभाव

शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी या उसके निर्माण में अनियमितता के कारण डायबिटीज होती है। वजन में कमी आना, अधिक भूख प्यास लगना, थकान, बार-बार संक्रमण होना, देरी से घाव भरना, हाथ-पैरों में झुनझुनाहट ये सभी डायबिटीज के लक्षण हैं। यह एक ऐसा खतरनाक रोग है, जो शरीर को धीरे-धीरे खोखला कर देता है। एक बार यह बीमारी होने पर जीवनभर इसका साथ रहता है। इसमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर इसको नजरअंदाज किया जाए तो शरीर के दूसरे अंग निष्क्रिय हो सकते हैं।

योग है कारगर

डायबिटीज को नियंत्रित करने का कारगर हथियार नियमित व्यायाम और योगाभ्यास है। डायबिटीज की समस्या होने पर ब्लड सेल्स शरीर में उत्पन्न इंसुलिन पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है। लेकिन नियमित रूप से योग करने से शरीर इंसुलिन के कि लिए प्रतिक्रिया देना शुरू कर देता है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है। आप भी इन योगासनों को योग्य योगाचार्य की देख-रेख में करके डायब्टिीज को नियंत्रित कर सकते हैं।




प्राणायाम

प्राणायाम में गहरी सांस लेना और छोड़ना रक्त संचार को दुरुस्त करता है। प्राणायाम 8 प्रकार का होता है जिसमें से भ्रामरी और भस्त्रिका प्राणायाम डायबिटीज के लिए ज्यादा लाभकारी होते हैं। भ्रामरी प्राणायाम करने से मन, मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को फायदा होता है। भस्त्रिका प्राणायाम खून में ऑक्सीजन स्तर को बढ़ाता है और कार्बन-डाइऑक्साइड के स्तर को कम करता है।

इस आसन को करने के लिए फर्श पर चटाई बिछाकर या पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। फिर गहरी सांस लें और पांच की गिनती तक सांस रोककर रखें। अब धीरे धीरे सांस छोड़ें। इस पूरी प्रक्रिया को कम से कम दस बार दोहराएं। कुर्मासन

इस आसन से अग्न्याशय (पेन्क्रियाज) को सक्रिय करने में मदद मिलती है, जिससे इंसुलिन अधिक मात्रा में बनने के कारण डायबिटीज से दूर रहा जा सकता है। इसके अलावा यह उदर और हृदय रोग में भी लाभदायक होता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में अच्छे से बैठकर कोहनियों को नाभि के दोनों ओर लगाइए।

फिर धीरे से हथेलियों को ऊपर की ओर रखते हुए दोनों हाथों को मिलाकर सीधा रखें। इसके बाद श्वांस बाहर निकालते हुए सामने झुकिए। फिर ठोड़ी को हथेलियों से स्पर्श कीजिए। इस दौरान अपनी नजरों को सामने रखें। श्वांस लेते हुए वापस आएं या श्वांस-प्रश्वांस की गति सामान्य रखते हुए लगभग एक मिनट तक यथास्थिति में बने रहें।

हलासन

इस आसन में शरीर का आकार हल जैसा बनता है। इससे इसे हलासन कहते हैं। हलासन हमारे शरीर को लचीला बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। यह आसन थाइरॉयड ग्रंथि, पैराथाइरॉयड ग्रंथि, फेफड़ों और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है, जिससे रक्त का प्रवाह सिर और चेहरों की और तेज हो जाता है। इससे पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है और हार्मोंन का स्तर नियंत्रण में रहता है। इस आसन को करने के लिए पीठ के बल भूमि पर लेट जाए।

आपके एड़ी-पंजे मिले होने चाहिए। अब हाथों की हथेलियों को भूमि पर रखकर कोहनियों को कमर से सटाए रखें। अब श्वांस को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। फिर दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए पहले 60 फिर 90 डिग्री के कोण तक एक साथ धीरे-धीरे भूमि से ऊपर उठाते जाएं। लेटने वाली मुद्रा में वापस लौटने के लिए पैरों को वापस लाते हुए सांस लें। एकदम से नीचे न आएं।




मंडूकासन

मंडूकासन करते समय शरीर की आकृति मंडूक अर्थात मेंढक के सामान लगती हैं, इसलिए इसे मंडूकासन नाम दिया गया है। पेट के लिए अत्यंत लाभदायक इस आसन से अग्नयाशय सक्रिय होता है, जिसके कारण डायबिटीज के रोगियों को इससे लाभ मिलता है।

इस आसन को करने के लिए सर्वप्रथम दंडासन में बैठते हुए वज्रासन में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की मुठ्ठी बंद कर लें। मुठ्ठी बंद करते समय अंगूठे को अंगुलियों से अंदर दबाइए। फिर दोनों मुठ्ठियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर श्वांस बाहर निकालते हुए सामने झुकते हुए ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के बाद वापस वज्रासन में आ जाए।




सेतुबंधासन

रक्तचाप नियंत्रित करने, मानसिक शांति देने और पाचनतंत्र को ठीक रखने में मदद करता है। गर्दन और रीढ़ की स्ट्रेचिंग के साथ-साथ यह आसन मासिक धर्म में आने वाली समस्याओं से भी निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए चटाई के बल सीधे लेट जाएं। अब सांस छोड़ते हुए पैरों के बल ऊपर की ओर उठें। अपने शरीर को इस तरह उठाएं कि आपकी गर्दन और सर फर्श पर ही रहे और शरीर का बाकी हिस्सा हवा में।

ज्यादा सहारा पाने के लिए आप अपने हाथों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अगर आपमें लचीलापन है तो अतिरिक्त स्ट्रेचिंग के लिए आप अपनी अंगुलियों को ऊपर उठी पीठ के पीछे भी ले जा सकते हैं। लेकिन अगर आपकी गर्दन या पीठ में चोट लगी हो तो इस आसन को न करें।




सर्वांगासन

यह योग करने से गले के भीतर मौजूद थाइरॉयड और पैरा थाइरॉयड ग्रंथियों (मोटापा,प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म के लिए उत्तरदायी ग्रंथियां) को मजबूती मिलती है। साथ ही इस आसन को करने से ग्रंथियों में रक्त संचार सुचारु हो जाता है।

इस योग को करने के लिए आराम से किसी चटाई पर लेटकर दोनों हाथ फैला लीजिए, फिर धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर कीजिए, फिर हाथों से कमर को पकड़कर पूरे शरीर को उठा लें और शरीर का पूरा भाग गर्दन पर हो जाने दीजिए। अपने पैरों को सीधा रखिए। लेकिन ध्यान रहे उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति को यह आसन किसी प्रशिक्षक के निरीक्षण में ही करना चाहिए।




वज्रासन

वज्रासन बेहद सामान्य आसन है, जो मानसिक शांति देने के साथ पाचन तंत्र को ठीक रखता है। यही एक आसन है, जिसे भोजन के बाद भी कर सकते हैं। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को आपस में मिलाकर सीधा फैलाकर बैठ जाएं। बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पंजे को बाएं नितंब के नीचे इस प्रकार लगाएं कि पैर का तलवा ऊपर की ओर ही रहे। इसी प्रकार, दाएं पैर को घुटने से मोड़कर पंजे को दाएं नितंब के नीचे इस प्रकार लगाएं कि पैर का तलवा ऊपर की ओर रहे।

इस स्थिति में दोनों पैरों के अंगूठे पास-पास रहेंगे तथा एड़ियां बाहर की ओर रहेंगी, जिससे दोनों एड़ियों के बीच में आराम से बैठ सकें। दोनों पैरों के घुटने मिलाकर, हाथों को घुटनों के ऊपर रख दें। इस स्थिति में सिर और रीढ़ स्तंभ सीधा रहना चाहिए। अपनी आंखें बंद करें और एक गति में गहरी सांस लें।

अर्धमत्स्येंद्रासन

यह आसन विशेष रूप से आपके फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सीजन को अधिक समय तक रोकने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह रीढ़ को आराम देता है और पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है। इस आसन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं।

अब बाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसकी एड़ी को दाये नितंब के नीचे रखिए। तत्पश्चात दाएं पैर को घुटने से मोड़कर इसके पंजे को बाएं घुटने के पार रखिए तथा दाएं घुटने को सीने की तरफ रखिए। अब बाएं हाथ को दाएं पैर के घुटने के पास रखते हुए दाएं पंजे के पास ले जाएं।

दाएं हाथ को पीठ के पीछे रखकर धड़ तथा सिर को भी दाईं तरफ यथासंभव मोड़ें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरी तरफ भी कीजिए।




अनुलोम-विलोम

अनुलोम-विलोम के नियमित रूप से अभ्यास करना चाहिए। इससे हार्मोनल असंतुलन पूरी तरह से समाप्त होता है। जिससे मधुमेह, यौन संबंधी, मूड स्विंग्स, मेनोपॉज और बांझपन, थाइरॉयड जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

इस प्राणायाम को करने के लिए अपनी सुविधानुसार पद्मासन या सुखासन में बैठ फिर दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नाक के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरें और फिर बाईं नाक को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें।

इसके बाद दाईं तरफ की नाक से अंगूठे को हटा दें और दाईं नाक से सांस को बाहर निकालें। अब दाईं नाक से ही सांस को 4 की गिनती तक भरें और दाईं नाक को बंद करके बाईं नाक खोलकर सांस को 8 की गिनती में बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक करें।




सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार हर उम्र के लोगों के लिए काफी लाभकारी होता है। चाहे आपको वजन कम करना हो या पाचन तंत्र बेहतर बनाना हो या तनाव दूर करना हो। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य समस्या को दूर करने में भी सूर्य नमस्कार सहायक है।

अगर आपके पास इतना समय नहीं है कि आप कई तरह के योगासन कर सकें तो सूर्य नमस्कार का अच्छा विकल्प है। आप इसके सभी आसन दस से पंद्रह मिनट में कर सकती हैं। इसमें 12 अवस्थाएं यानि कुल 12 आसन होते हैं, इन्हें क्रमानुसार ही करने से पूरा लाभ लिया जा सकता है।

लेखक -अजेश कुमार

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