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मेनोपॉज के बाद महिलाएं कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल...

मेनोपॉज के बाद महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल चेंज होते हैं, साथ ही कई प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में लापरवाही बरतने पर उनके लिए ये प्रॉब्लम्स बड़ी बीमारियों का कारण बन सकती हैं। मेनोपॉज के बाद कैसे रखें अपनी हेल्थ का ख्याल, इस बारे में उपयोगी सलाह।

मेनोपॉज के बाद महिलाएं कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल...
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How to take care Women Health After Menopause In Hindi

आमतौर पर मेनोपॉज को हड्डियों की कमजोरी और ब्रेस्ट कैंसर होने की बड़ी वजह से जोड़ा जाता रहा है। लेकिन महिलाएं खुद का ख्याल न रखें तो मेनोपॉज के कारण उन्हें कई तरह की अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इस स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर इलाज करवाया जाए।

मेनोपॉज से जुड़ी बीमारियां (Menopause Related Diseases)




गम्स प्रॉब्लम (Gum Problems)

नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज सोसायटी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जोएन वी. पिंकर्टन कहती हैं, 'मेनोपॉज की स्थिति में जब महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम हो जाता है तो उनमें दांत ढीले होने और गम्स यानी मसूढ़ों की समस्याएं होने लगती हैं। कुछ महिलाएं ड्राय माउथ, मसूढ़ों में जलन और दर्द भी महसूस करती हैं। ऐसे में उन्हें ओरल हाइजीन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

स्लीप एप्निया (Sleep Apnea)

विस्कोंसिन स्लीप कोहर्ट स्टडी के आधार पर पिंकर्टन बताती हैं, कि मेनोपॉज के बाद महिलाओं में प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन का लेवल भी गिर जाता है, जिससे ब्रीदिंग डिस्टर्ब होती है और स्लीप एप्निया की समस्या हो जाती है। कई महिलाओं में सामान्य स्लीप डिसऑर्डर के बजाय दिन में नींद ज्यादा आने, सुबह सिरदर्द होने और एंग्जायटी की समस्या हो जाती है।




डायबिटीज (Diabetes)

अमेरिका की नेशनल हेल्थ स्टडी में वूमेंस हेल्थ इनीशिएटिव के मुताबिक जिन महिलाओं में 46 साल की उम्र से पहले या 55 के बाद मेनोपॉज होता है, उनमें टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. किरण कोएलो कहती हैं, 'एस्ट्रोजन ग्लूकोज लेवल को स्थिर रखता है। इस हार्मोन का लेवल कम होने पर यह संतुलन गड़बड़ा जाता है। साथ ही शरीर में फैट भी ज्यादा जमा होने लगती है। इसके अलावा इससे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, हाई बीपी और जेस्टेशनल डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में हर तीन साल में बॉडी चेकअप कराना जरूरी है, साथ ही ओवरवेट होने से भी बचना चाहिए।

हार्ट डिजीज (Heart Disease)

मेनोपॉज से पहले ओवरी जो एस्ट्रोजन हार्मोन बनाता है, उससे शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है, खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है और हाई बीपी कंट्रोल होता है। लेकिन जब मेनोपॉज के कारण एस्ट्रोजन का लेवल कम होने लगता है तो हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेग्युलर 30 मिनट की एक्सरसाइज, प्लांट बेस्ड डाइट (वेजीटेरियन) और स्मोकिंग से तौबा करना जरूरी है।




यूरीनरी प्रॉब्लम्स (Urinary Problem)

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता गुटगुटिया बताती हैं, 'मेनोपॉज के बाद मूत्र पर नियंत्रण कम हो जाने की समस्या कॉमन है। ऐसा एस्ट्रोजन का लेवल कम होने से यूरेथ्रा के पतले होने से होता है। साथ ही एजिंग, नॉर्मल डिलीवरी के कारण पेल्विस फ्लोर मसल्स कमजोर होने से भी ऐसा होता है। साथ ही इस उम्र में बार-बार यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी होता है। एस्ट्रोजन में नुकसानदायक बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता होती है, जो इस वक्त कम हो जाता है। ऐसे में कीगल एक्सरसाइज करनी चाहिए। साथ ही खूब पानी पिएं। स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह से सावधानियां भी बरतनी जरूरी हैं।'

ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder)

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ईटिंग डिसऑर्डर्स में पब्लिश स्टडी के मुताबिक मेनोपॉज के बाद महिलाओं में जो शारीरिक परिवर्तन होते हैं, उनसे ईटिंग डिसऑर्डर नेगेटिव बॉडी इमेज की समस्या होती है। दरअसल यह स्थिति सिर्फ शारीरिक न होकर मानसिक और सामाजिक भी हो जाती है। महिलाओं के दिमाग में बेचैनी और उथल-पुथल होने लगती है। कई बार वे आत्महीनता और हताशा की शिकार भी हो जाती हैं। खुद को फिट और खूबसूरत दिखाने के चक्कर में हेल्दी ईटिंग नहीं करतीं और डाइटिंग करने लगती हैं।

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