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इन तरीकों से पहचानें, कहीं आप अहंकारी तो नहीं बन रहे...

आत्म सम्मान तो अच्छी बात है लेकिन अहंकारी होना बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है। वह जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाता है और अपने संबंधों का निर्वाह भी नहीं कर पाता है। लेकिन कई बार अहंकारी इंसान को इस बात का आभास नहीं हो पाता है। जानिए, कौन से व्यवहार हैं जिससे पता चलता है कि आपके व्यक्तित्व में अहंकार शामिल हो चुका है।

इन तरीकों से पहचानें, कहीं आप अहंकारी तो नहीं बन रहे...
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How to Identify Are You Becoming Arrogant

अहंकार यानी ईगो, कब आपके व्यवहार का हिस्सा बन जाता है, कई बार इस बात का पता ही नहीं चलता है। लेकिन जब तक इस बात का अहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। आपकी छवि सबके बीच खराब हो चुकी होती है। आपके रिश्तों में दरार आ चुकी होती है, दोस्त दूरी बना चुके होते हैं।

ऐसे में जरूरी है कि आप यह जानें कि अहंकार किस तरह से हमारे व्यवहार का हिस्सा बन जाता है। इसके लिए आपको अपनी कुछ बातों और व्यवहार पर गौर करना होगा। इन्हें जानकर खुद को संभालना होगा और अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा, तभी आप अहंकार से दूर रह पाएंगी और एक बेहतर जीवन गुजार पाएंगी।




हमेशा क्रिटिसाइज करना

दूसरों की आलोचना यानी क्रिटिसाइज करना बुरी बात नहीं है। आलोचना से कई बातें साफ हो जाती हैं, सामने वाले व्यक्ति को इससे अपनी कमियां पता चलती हैं। लेकिन हर वक्त आलोचनात्मक रवैया अपनाना कतई सही नहीं है। इससे यह पता चलता है कि आपको दूसरों की बुराई करने में ही आनंद आता है। आप उन लोगों में शामिल होते हैं, जो अपनी जीत से नहीं दूसरों की हार से खुश होते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। यह आदत आपकी इमेज नेगेटिव बना सकती है। आपका अति आलोचनात्मक रवैया आपके अहंकार की निशानी है।

दूसरों की परवाह न करना

अहंकारी लोग दूसरों की परवाह नहीं करते हैं। ऐसे लोग अकसर अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए दूसरों का किसी भी हद तक इस्तेमाल करते हैं। लेकिन काम निकल जाने पर उनकी परवाह नहीं करते। अगर आपमें ऐसे गुण मौजूद हैं तो समझ जाइए कि आप अहंकार की गिरफ्त में हैं।




गुस्से में बात करना

किसी के प्रति अपनी नाराजगी या उसकी कमी को अगर धीमे स्वर में कहा जाए तो सभी उसे सुनते हैं। दरअसल, शांत और स्थिर व्यक्तित्व की यही पहचान है। ठीक इसके विपरीत बात-बात पर चिल्लाना या गुस्से में अपनी बात मनवाना अहंकारी लोगों की निशानी है।

खुद को सबसे इंपॉर्टेंट मानना

खुद की तारीफ करना अच्छी बात है। लेकिन दूसरों को नीचा दिखाना या कम समझना गलत है। अहंकारी इंसान खुद को ही सबसे बेहतर-समझदार समझते हैं, जबकि दूसरों को कुछ नहीं समझते। यह एक नकारात्मक सोच है। आपको यह मालूम होना चाहिए कि बहुत से लोग हमसे भी बेहतर हो सकते हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक जो लोग दूसरों को हमेशा खुद से कमतर आंकते हैं, वे असल में अंदर से डरे होते हैं। उन्हें हारने का डर होता है। उन्हें प्रतिस्पर्धा से डर लगता है। अगर आपमें ऐसे लक्षण मौजूद हैं तो समझ जाइए कि अहंकार आपको पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले चुका है।

इन सभी गुणों के आधार पर आप जान सकती हैं कि अहंकार आपके व्यवहार में किस हद तक शामिल है? इसके बाद उन्हें सही ढंग से हैंडल करें तभी आप अहंकार से दूर रह पाएंगी।

लेखिका - मीरा अमल टैगोर

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