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Health Tips: गर्मी में रखें खान-पान का खास ख्याल, उम्र के अनुसार फॉलो करें समर डाइट

मौसम बदलने पर जिस तरह लाइफस्टाइल बदल जाती है, उसी तरह डाइट में भी चेंज करना जरूरी है। गर्मी के मौसम के अनुसार इन दिनों आपकी डाइट लिक्विड और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होनी चाहिए। लेकिन इनकी मात्रा और प्रकार आपकी उम्र के अनुसार होनी चाहिए। इस बारे में डिटेल में जानिए।

Health Tips: गर्मी में रखें खान-पान का खास ख्याल, उम्र के अनुसार फॉलो करें समर डाइट
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Health Tips: गर्मी के मौसम (Summer Season) में बढ़ता तापमान (Rising Temperature) हमारे शरीर को भी गर्म कर देता है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, लू से बचने और खुद को कूल रखने के लिए अपनी डाइट में कुछ बदलाव (Change in Diet) करना जरूरी है। इस दौरान ऐसे फूड आइटम्स (Food Items) को खाना चाहिए, जो शरीर को ठंडा रखे और आसानी से डाइजेस्ट (Digest) भी हो जाए। दिल्ली की सीनियर डाइटीशियन (Senior Dietitian) डॉ. शालिनी सिंघल (Dr. Shalini Singhal) से जानिए एज ग्रुप के हिसाब से, कैसी हो आपकी डाइट।

टीनएज गर्ल्स

स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को सुबह के समय पोषण से भरपूर नाश्ता जरूर करना चाहिए। अगर स्कूल-कॉलेज जा रही हैं तो लंच बॉक्स के साथ पानी की बोतल जरूर ले जाएं। चाहें तो नमक-चीनी मिलाकर नीबू पानी भी साथ रख सकती हैं। लंच में ताजा और मौसमी फल खाना चाहिए। कम घी में बना परांठा या रोटी रोल, जिसमें मौसमी सब्जियों-दालों, पनीर की स्टफिंग हो, खा सकती हैं। हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए नारियल पानी, छाछ, लस्सी, बेल शर्बत, तरबूज का जूस पी सकती हैं। ऐसा करने से आप दिन भर एनर्जेटिक रह सकती हैं। गर्मियों में शरीर में हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस (सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड) मेंटेन करने के लिए रोजाना कम से कम 2-3 लीटर पानी, 1-2 बार कम चीनी वाले शेक, कोल्ड कॉफी, छाछ, लस्सी पी सकती हैं। हरी सब्जियों के साथ कलरफुल सलाद को भी डाइट का हिस्सा बनाएं। दिन में 1-2 सर्विंग मौसमी फलों की ले सकती हैं। तरबूज, खरबूजा जैसे फलों का सेवन आपको तरोताजा रखेगा।

यंग वूमेन

पचीस से चालीस वर्ष की महिलाओं को गर्मी के मौसम में हल्की डाइट लेनी चाहिए। इस उम्र में घर-परिवार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आप संतुलित और पौष्टिक खाना खाएं। आहार में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा लेने के बजाय गुड क्वालिटी फैट, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट रिच डाइट लेनी चाहिए। इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत अनाज, अंडे जैसे आयरन रिच डाइट लें। आयरन के प्लांट बेस्ड सोर्स को शरीर में अवशोषण करने के लिए नीबू, संतरा, आंवला जैसे विटामिन-सी रिच फूड्स भी जरूर लें।

मिडिल एज वूमेन

इस उम्र में प्री-मेनोपॉज और मेनोपॉज के लक्षण नजर आने लगते हैं, जिससे हार्मोन का प्रोटेक्शन कवर धीरे-धीरे कम होने लगता है और कई तरह की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है। इस उम्र की महिलाओं को अपनी डाइट में एंटी इंफ्लेमेटरी फूड्स शामिल करने चाहिए। गुड क्वालिटी फैटी फूड (रात को भिगोए हुए सीड्स और नट्स) नियमित रूप से लें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। अपनी डाइट में मौसमी और ताजे फल-सब्जियों को शामिल करें। शरीर में विटामिन-डी, कैल्शियम, मैगनीशियम की आपूर्ति के लिए दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ हर मील में शामिल करें। विटामिन-डी के लिए आहार में एनिमल फूड, मशरूम लें। कोशिश करें कि हल्का, सुपाच्य, ताजा घर का बना खाना खाएं। सत्तू, छाछ, नारियल पानी, लस्सी का सेवन करें, ये गर्मी में आपको हाइड्रेट रखेंगे।

ओल्ड एज वूमेन

ओल्ड एज वूमेन में इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन का खतरा बना रहता है। इससे चक्कर आना, चलने में लड़खडाहट या गिरने की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए हर मौसम में उनके लिए समुचित आहार का सेवन जरूरी है। गर्मी के मौसम में उन्हें हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक फूड्स खाना चाहिए। मौसमी फल-सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। घिया, तोरी, टिंडा, खीरा जैसी सब्जियों में पानी की मात्रा काफी होती है और ये सुपाच्य भी होती हैं। दूध अगर नहीं ले पाती हैं, तो छाछ और लस्सी जरूर लें। आप इन्हें ब्रंच टाइम में भी ले सकती हैं। तरबूज, खरबूजा, आम जैसे मौसमी फल नियमित रूप से खाएं।

वर्किंग वूमेन का डाइट रूटीन

वर्किंग वूमेन अकसर अपनी डाइट को लेकर लापरवाह रहती हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। आपको भी नियत समय पर और कम अंतराल पर कुछ ना कुछ पौष्टिक खाते रहना चाहिए। इस सीजन में अपने टिफिन में ऐसे फूड रखें जो भरपूर न्यूट्रिशस और हाइड्रेटेड हों। खाने के साथ साबुत फल भी लेकर जाएं और जब खाएं तभी काटें। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए चाय-कॉफी सीमित मात्रा में लें। ऑफिस से घर लौटने के बाद कोशिश करें कि डिनर जल्द से जल्द कर लें। सोने से कम से कम 3 घंटे पहले डिनर जरूर कर लें ताकि भोजन को डाइजेस्ट होने का मौका मिले।

लेखक- रजनी अरोड़ा (Rajni Arora)

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