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Health Tips: इन आदतों का लिवर पर पड़ता है सीधा असर, आज ही अपनी दिनचर्या से करें दूर

Health Tips: अपने लीवर को हल्के में लेने से आपको कई बीमारियों का खतरा हो सकता है। कैलोरी और शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करने से हमारा लिवर डैमेज हो सकता है। यहां हम आपको उन आदतों के बारे में बताएंगे जो आपके लिवर को खराब कर सकती हैं।

Health Tips: इन आदतों का लिवर पर पड़ता है सीधा असर, आज ही अपनी दिनचर्या से करें दूर
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Health Tips: अपने लीवर (Liver) को हल्के में लेने से आपको कई बीमारियों का खतरा हो सकता है। लिवर मेटाबॉलिज्म, पाचन, विषाक्त पदार्थों को हटाने, पोषक तत्वों के स्टोरेज और कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में मदद करता है। हालांकि, कैलोरी से भरपूर या शुगर युक्त आहार खाने, पेन किलर्स को नियमित रूप से लेने, एक गतिहीन और उच्च तनाव वाले लाइफस्टाइल (High Stress Lifestyle) को फॉलो करने से आपके लीवर को नुकसान हो सकता है और लीवर कैंसर, सिरोसिस से लेकर नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (Non-Alcoholic Fatty Liver Disease) जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं। यहां हम आपको उन हानिकारक आदतों के बारे में बताएंगे, जो आपके लिवर को बीमार (Habits That can Affect Liver) कर सकते हैं...

जंक फूड खाना

फास्ट फूड, प्रोसेस्ड और पहले से तैयार खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले ट्रांस फैट हमारे लीवर के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं और इससे लीवर के आसपास ब्लड शुगर और फैट जमा हो सकता है जो अंततः सिरोसिस या लीवर सेल डेथ की ओर ले जाता है।

बहुत अधिक चीनी का सेवन

शराब की तुलना में चीनी लीवर के लिए कम हानिकारक नहीं है। ज्यादा देर तक चीनी वाला खाना खाने से लीवर की बीमारी हो सकती है। लिवर संबंधी बीमारियों से बचने के लिए सब्जियों और फलों जैसे प्राकृतिक स्रोतों से चीनी का सेवन करना सबसे अच्छा है।

पेन किलर्स और अन्य दवाएं

पेन किलर्स, नींद की गोलियां, उत्तेजक, कोकीन और मारिजुआना का सेवन लिवर को डैमेज कर सकता है।

ठहरा हुआ लाइफस्टाइल

नॉन- अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग (NAFLD), शारीरिक निष्क्रियता और व्यायाम की कमी के कारण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, लाइफस्टाइल में ठहराव से फैटी लीवर होने का जोखिम भी बढ़ जाता है जिससे स्टीटोसिस नामक बीमारी हो सकती है, या लिवर में लिपिड और कार्बोहाइड्रेट भंडार का निर्माण हो सकता है।

स्ट्रेस

स्ट्रेस हाई कोर्टिसोल के लेवल से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो बहुत अधिक लिवर डैमेज का कारण बन सकता है और एनएएफएलडी या नॉन-अल्कोहल्क फैटी लीवर रोग को प्रेरित कर सकता है। इसके अलावा, तनाव से अस्वास्थ्यकर मुकाबला करने की व्यवस्था हो सकती है जिसमें शराब का सेवन, तंबाकू का उपयोग और खराब आहार शामिल हैं, जिससे लीवर के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

पर्याप्त पानी न पीना

पानी मानव शरीर से किसी भी वेस्ट को बाहर निकालने में मदद कर सकता है। यह शरीर में विषाक्त पदार्थों को बनने से रोकता है और लीवर को नुकसान पहुंचने से बचाता है। पानी के नियमित सेवन से ब्लड पतला हो जाता है, जिससे लीवर के लिए फिल्टर करना और किसी भी विषाक्त पदार्थ को निकालना आसान हो जाता है।

नोट: यहां दी गई जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है, इसे विशेषज्ञ की सलाह के तौर पर न लें।

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