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अब शिशु की गंभीर बीमारियों को ठीक करना हुआ आसान, देश में खुला पहला जीन बैंक

हमारा शरीर कई सारे रहस्यों से मिलकर बना है, ऐसा ही एक रहस्य है जीन या आनुवांशिक गुण। जो हमें हमारे माता पिता से जन्म से पूर्व ही मिल जाते हैं। देश में लगभग 7 करोड़ लोग गंभीर जेनेटिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में ये जीन बैंक कई बीमारियों को ठीक करने में कारगर साबित होगा। इस बैंक में शिशु के जन्म से पहले ही जीन टेस्ट के जरिए भविष्य में होने वाली बीमारियों के बारे में भी पता लगाना आसान होगा।

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बच्चा (प्रतीकात्मक फोटो)

जीन हमारे शरीर की पहचान करने वाला एक बॉयलोजिकल आइडेंटिटी प्रूफ होता है। जो शरीर में मौजूद डीएनए से प्राप्त होता है। इसका आमतौर पर उपयोग डॉक्टर्स गंभीर बीमारियोंकी पहचान करने और उन्हें ठीक करने के लिए करते हैं, तो पुलिस कई गंभीर अपराधियों को पकड़ने और सजा दिलाने सफल होती है। ऐसे में देश में पहला जीन बैंक खुलना एकबेहद अच्छी खबर है।


क्या होता है जीनोम या जीन

जिनोम हर व्यक्ति के शरीर में मौजूद कई सारे जींस (आनुवांशिक गुणों) के सेट को कहते हैं, जो डीएनए में मौजूद होता है। जीनोम में लगभग 300 करोड़ डीएनए शामिल होते हैं।शोधकर्ता इनकी मदद से कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के कारणों की पहचान कर पाते हैं। इस डेटा को रिसर्च सेंटर सुपर कंप्यूटर में बेहद संभाल कर रखता है। जिससे किसी व्यक्ति विशेष की जेनेटिक इंफॉर्मेशन लीक न हो। एक जीनोम डेटा में करीब 120 जीबी का डेटा होता है। जिसका विश्लेषण करना बेहद मुश्किल काम होता है।

क्या है इंडिया का जीन प्रोजेक्ट

काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के डायरेक्टर जनरल शेखर के मुताबिक, देश में लगभग 7 करोड़ लोग जेनेटिक बीमारियों से पीड़ित है, जिनमें से अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता तक नहीं है। ऐसा भारत में जेनेटिक डेटा की कमी होने की वजह से होता है, लेकिन सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं के सहयोग से भविष्य में जीन संबंधी रोगों को दूर करने में मदद मिलेगी।


हाल ही में भारत ने अपने जीन मैपिंग के प्रोजेक्ट IndiGen को खत्म किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 1,008 लोगों के जिनोम की मैपिंग की गई है। इससे मेडिकल साइंस के विशेषज्ञों को कैंसर के अन्य दूसरी जेनेटिक बीमारियों को पहचानने में मदद मिल सकेगी। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख श्रीधर शिवासुब्बु के मुताबिक, जीन बैंक खुलने से पेरेंट्स अपने बच्चे में होने वाली जेनेटिक बीमारियों के बारे में पहले से जान पायेगें और उसका उपयुक्त इलाज करवा पायेगें।

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