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Diet Tips : डाइट में भूलकर भी इन चीजों को न करें नजरअंदाज, हो सकती है मेमोरी लॉस

Diet Tips : हेल्दी रहने के लिए हमें अपनी डेली डाइट के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में माइक्रोन्यूट्रीएंट्स का सेवन करना जरूरी है। माइक्रोन्यूट्रीएंट्स, वे विटामिंस और मिनरल्स होते हैं, जिनकी हमारे शरीर को भले ही बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है लेकिन ये नियमित हमारे सिस्टम में पहुंचने चाहिए।

Diet Tips : डाइट में भूलकर भी इन चीजों को न करें नजरअंदाज, हो सकती है मेमोरी लॉस
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Diet Tips : हेल्दी रहने के लिए हमें अपनी डेली डाइट के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में माइक्रोन्यूट्रीएंट्स का सेवन करना जरूरी है। माइक्रोन्यूट्रीएंट्स, वे विटामिंस और मिनरल्स होते हैं, जिनकी हमारे शरीर को भले ही बहुत कम मात्रा में जरूरत होती है लेकिन ये नियमित हमारे सिस्टम में पहुंचने चाहिए।

ये माइक्रोन्यूट्रीएंट्स हैं- कॉपर, फॉलिक एसिड, जिंक, आयरन, ओमगा-3 फैटी एसिड, विटामिन-डी, विटामिन बी-12, सेलेनियम और फास्फोरस। अगर आपके दैनिक भोजन में इनमें से कोई भी पोषक तत्व मौजूद ना हो, तो आप थकान और सुस्ती के साथ खुद को बीमार महसूस कर सकते हैं।

यह कमी ज्यादा होजाए तो हाथ पैरों में कंपन, मुंह में छाले, हड्डियों में दर्द, बालों का झड़ना और स्किन का रंग फीका पड़ने जैसे लक्षण भी उभर सकते हैं। अलग-अलग लक्षण किसी खास न्यूट्रीएंट्स की कमी होने का संकेत देते हैं।

फोलिक एसिड

स्वीडन के वैज्ञानिकों द्वारा किए एक रिसर्च में पाया गया कि जो लोग कई मेमोरी टेस्ट में फेल हुए, उनमें फोलिक एसिड का स्तर काफी कम था। शोधकर्ताओं का मानना है कि फोलिक एसिड की कमी से होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड का स्तर कम हो जाता है, जो हार्ट और ब्रेन की ब्लड वेसल्स को डैमेज कर सकता है।

सोर्स: बींस, मूंग, राजमा, हरी पत्तेदार सब्जियां, संतरा, कॉर्न, लिवर

जिंक

जिंक को फिटनेस मिनरल माना जाता है। एक यूएसडीए रिसर्च के मुताबिक जिन लोगों में जिंक की कमी होती है, उनमें रेड ब्लड सेल्स का मूवमेंट 45 फीसदी तक कम हो जाता है। इससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। जरा सी मेहनत करने पर भी व्यक्ति की सांस फूलने लगती है।

सोर्स: रागी, ज्वार, बाजरा, चना, चौलाई, मूंग, राजमा, काजू, बादाम, तिल, रेड मीट

मैग्नीशियम

मैग्नीशियम हेल्थ सिस्टम का सिक्योरिटी गार्ड है। इसकी कमी से शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़कर सेल्स को नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे जरूरी हार्मोंस और न्यूरोट्रांसमीटर्स पर प्रतिकूल असर पड़ता है। नतीजतन ब्लड वेसल्स में सिकुड़न या अवरोध हो सकता है, सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। साथ ही इसकी कमी से ठीक से नींद भी नहीं आती।

सोर्स: आम, खसखस, अंगूर, प्याज, आलू, मछली, केला, व्होल ग्रेन, बाजरा, रागी, ज्वार

कॉपर

शरीर में कॉपर की इंपॉर्टेंस को प्रूफ करने के लिए, हेल्थ साइंटिस्ट्स ने एक तुलनात्मक प्रयोग के तहत दो तरह की मानव कोशिकाओं को बैक्टीरिया से संक्रमित कर दिया।

फिर उनका एनालिसिस करने पर पाया कि जिन सेल्स में कॉपर की मात्रा सही थी उन्होंने कम कॉपर लेवल वाली सेल्स की तुलना में तीन गुना तक ज्यादा बैक्टीरिया का खात्मा किया। कॉपर के समुचित सेवन से 60 फीसदी ज्यादा साइटोकिंस उत्पन्न होते हैं, जो शरीर के इम्यून रेस्पॉन्स को ट्रिगर करता है।

सोर्स: व्होल व्हीट, बाजरा, तिल, लेंटिल्स, नारियल, अखरोट, काजू

फॉस्फोरस

डाइट में कैल्शियम समुचित हो लेकिन फास्फोरस न हो तो हड्डियों की संरचना बिगड़ जाती है। इससे हड्डियां भुरभुरी और कमजोर हो जाती हैं और उनके आसानी से फ्रेक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है।

सोर्स: अनाज, दालें, नट्स, लेंटिल्स, व्होल ग्रेन, फिश, मटन, चीज

ओमेगा-3 फैटी एसिड

जिन लोगों में ओमेगा-3 फैटी एसिड माइक्रोन्यूट्रीएंट का स्तर कम होता है, उनमें प्रोस्टाग्लैंडिन का स्तर कम हो जाता है। इसकी वजह से मसल्स में दर्द की समस्या होती है। ओमेगा-3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में लेने से रिकवरी जल्दी होती है और दर्द में आराम मिलता है।

सोर्स: कॉड, ट्यूना, मकरैल और सारडीन मछलियों में यह प्रचुर होता है। कुछ मात्रा में यह रोस्टेड सोयाबीन, चिया सीड, अखरोट और कनोला ऑयल में भी होता है।

(डाइटीशियन संगीता मिश्र से बातचीत पर आधारित )

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