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Coronavirus: इस महिला ने की थी कोरोना की सबसे पहले खोज, वायरस का पता लगाने के लिए छोड़ा था स्कूल

Coronavirus: ऐसा पहली बार नहीं हुआ है,जब कोरोना को देखा गया हो। इससे पहले भी यह वायरस अपने दूसरे रुप में आ चुका है। साल 1964 में इसकी खोज एक महिला डॉक्टर ने की थी।

Coronavirus: इस महिला ने की थी कोरोना की सबसे पहले खोज
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डॉक्टर जून ने की थी कोरोना की पहचान (फाइल फोटो)

Coronavirus: कोरोना ने दुनिया के ज्यादातर देशों में आतंक मचाया हुआ है। वहीं इसकी चपेट में आने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। कोरोना वायरस के इलाज के लिए कई देश वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं। इसके साथ ही कई देशों के साइंटिस्ट तरह तरह की स्टडी कर रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है,जब कोरोना को देखा गया हो। इससे पहले भी यह वायरस अपने दूसरे रुप में आ चुका है। साल 1964 में इसकी खोज एक महिला डॉक्टर ने की थी।

कोरोना फैमिली में कई तरह के वायरस हैं

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना फैमिली में कई तरह के वायरस हैं। जिनमें से 04-05 काफी खतरनाक रहे हैं। इनमें से ही एक वायरस COVID-19 है, जो सबसे ज्यादा खतरनाक है। साल 1964 में कोरोना की फैमिली का पहला वायरस खोजा था। इसे एक महिला डॉक्टर ने खोजा था।

16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा

इस वायरस की सबसे पहले खोज करने वाली महिला डॉक्टर का नाम जून अलमेडा है। उनके पिता एक बस ड्राइवर थे। जून का जन्म साल 1939 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में हुआ था। इमेजिंग क्षेत्र के चर्चित लोगों में अपना नाम दर्ज करवाने के कारण जून ने 16 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था। जिसके बाद से वो वायरस की रिसर्च करने लग गई थी।

टोरंटो जाकर अपनी छोड़ी हुई पढ़ाई पूरी की

स्कूल छोड़ने के बाद वे एक लैब में तकनीशियन के तौर पर काम करने लगी थी। कुछ समय तक काम करने के बाद वे लंदन चली गई थी। साल 1954 में वो शादी के बंधन में बंध गई और कुछ समय के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने टोरंटो जाकर अपनी छोड़ी हुई पढ़ाई पूरी की और फिर ओंटारियो केंसर इंस्टीट्यूट में काम करना शुरू किया।

रिसर्च के दौरान एक अलग किस्म का वायरस मिला

साल 1964 में उन्होंने लंदन के सेंट थॉमस मेडिकल स्कूल में जॉब मिल गई और वहीं उन्होंने कोरोना वायरस की खोज की। उस समय वे सर्दी-जुकाम के वायरस पर रिसर्च कर रही थी। उस दौरान ही उन्हें एक अलग किस्म का वायरस मिला। जिसके बाद उन्होंने उस पर अपनी रिसर्च की।

रिसर्च पूरी होने के बाद जून ने बताया कि यह कोरोना वायरस है

इलैक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप जांच की मदद से इस बात का पता लगा कि यह वायरस इनफ्लूएंजा की तरह दिखता है। रिसर्च पूरी होने के बाद जून ने बताया कि यह कोरोना वायरस है। जून ने अपने करियर में कई नए वायरस की खोज की थी। रिटायर होने के बाद जून योगा टीचर बन गई थी। जून कि निधन साल 2017 में हुआ था।



Shagufta Khanam

Shagufta Khanam

Jr. Sub Editor


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