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अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस का करते हैं इस्तेमाल तो इस लेख को जरूर पढ़े, इन बातों पर करें अमल

कई लोग अपनी कमजोर नजर के लिए चश्मे के बजाय कॉन्टेक्ट लेंस पहनना पसंद करते हैं। इससे आपको अलग मनचाहा लुक भी मिल सकता है लेकिन इसके लिए आपको कुछ सावधानियां भी बरतनी जरूरी हैं।

अगर आप कॉन्टेक्ट लेंस का करते हैं इस्तेमाल तो इस लेख को जरूर पढ़े, इन बातों पर करें अमल
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कॉन्टेक्ट लेंस (फाइल फोटो)

अमित रस्तोगी 10 साल की उम्र से चश्मा पहनता है। अब वह 22 साल का नौजवान है। लेकिन अब वह चश्मा नहीं पहनता। दरअसल, स्कूल के दिनों में उसके दोस्त उसे चश्मुद्दीन के नाम से चिढ़ाया करते थे। उसे चार आंखों वाला भी कहा करते थे। कुछ ऐसा ही हाल उसके कॉलेज जाने पर भी देखने को मिला। उसे चश्मा पहनना बहुत ज्यादा खलने लगा। लेकिन एक दिन उसने टीवी पर कॉन्टेक्ट लेंस का एड देखा। बस फिर क्या था, लगभग 10 साल से पहन रहे चश्मे से अमित को निजात पाने का हल मिल गया। अगर आप भी चश्मा छोड़कर कॉन्टेक्ट लेंस पहनना चाहते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

लेंस के प्रकार

Dijसिर्फ हमारे लिए दिखावे का जरिया नहीं है, यह हमारी आंखों का रंग बदल देता है साथ ही साफ दिखने में भी सहायक है। यहां तक कि लेंस की मदद से कॉर्निया की सुरक्षा की जा सकती है। लेकिन कॉन्टेक्ट लेंस इस्तेमाल करने से पूर्व कुछ सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। विशेष तौर पर कलर्ड कॉन्टेक्ट लेंस के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। जो लोग कलर्ड कॉन्टेक्ट लेंस लगाना पसंद करते हैं उन्हें यह जानना जरूरी है किर कलर्ड कॉन्टेक्ट लेंस दो किस्म के होते हैं। एक, जो महज आपके आंखों का रंग बदलते हैं। फिर चाहे वह ब्राउन से ब्लू हो या ब्लू से ब्राउन। दूसरा, वह जो ट्रांसपैरेंट लेंस होता है। ट्रांसपैरेंट कॉन्टेक्ट लेंस से आंखों का रंग नहीं बदलता, लेकिन इसकी मदद से आंखों में प्राकृतिक चमक नजर आने लगती है। साथ ही चेहरे को आकर्षक बनाती है। आमतौर पर कॉन्टेक्ट लेंस दो प्रकार के होते हैं। पहला, सॉफ्ट कॉन्टेक्ट लेंस। यह लेंस हाइड्रोजेल से बनाया जाते हैं और काफी फ्लेक्सिबल होते हैं। दरअसल यह 40 से 70 प्रतिशत तक अपना वजन सोख लेते हैं। दूसरा, रिजिड, हार्ड कॉन्टेक्ट लेंस, जिससे आंखों को ऑक्सीजन लेने में काफी दिक्कत होती है।

इन पर करें अमल

-लेंस लगातार 24 घंटे नहीं लगाया जा सकता। आंखों के विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर 8-10 घंटे तक ही लेंस को लगाकर रख सकते हैं। उसके बाद आंखों को राहत देने के लिए लेंस निकालना जरूरी है। हर रोज सोने से पहले, नहाने से पहले, आंखें धोने से पहले यहां तक कि पानी में जाने से पहले लेंस को सावधानी पूर्वक निकाल देना चाहिए।

-बेहतर है कुछ ही घंटों के बाद लेंस को निकाल कर रख दें। क्योंकि लगातार लेंस लगाए रखने से आंखों को काफी तकलीफ हो सकती है। जब आंखें खुली होती हैं, तब आंसू ऑक्सीजन कॉर्निया तक पहुंचाते हैं ताकि आंखें स्वस्थ रहें। कॉन्टेक्ट लेंस लगाने से कॉर्निया तक पर्याप्त मात्र में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। सोने के दौरान हमारी आंखों से पानी गिरता है। जिससे आंखें हल्की सूज जाती हैं। लेकिन यदि रात को रिजिड कॉन्टेक्ट लेंस लगाकर सो जाएं तो कॉर्निया तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाएगी और संक्रमण फैलने का खतरा बन जाता है।

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-लेंस का इस्तेमाल करने से पहले उसे साफ करना न भूलें। लेंस की नियमित सफाई और रीफिलिंग करना अति आवश्यक है। यदि हर रोज संभव न हो तो कम से हफ्ते में एक बार जरूर करें और हर 6 महीने में इसे बदलें।

- गंदे नाखून की वजह से भी लेंस खराब हो सकते हैं। अतः नाखूनों को साफ रखें।

कुल मिलाकर बात यह है कि लेंस लगाने से पहले सजग रहने की आवश्यकता है। जरा सी सजगता आपको स्मार्ट, हैंडसम बना सकती है।

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