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जानिए ब्रेस्ट कैंसर में शिशु को स्तनपान करवाना सुरक्षित होता है या नहीं

आज के समय में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में महिलाओं को अपने इलाज के साथ शिशु को स्तनपान करने की चिंता सबसे ज्यादा परेशान करती है कि क्या वो अपने शिशु को स्तनपान करवा सकती हैं या नहीं। हाल ही में कई शोधों में पाया गया कि सही समय पर ब्रेस्ट कैंसर का इलाज होने पर इस समस्या से छुटाकारा पाया जा सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर में शिशु को स्तनपान करवाना सुरक्षित होता है या नहीब्रेस्ट कैंसर में शिशु को स्तनपान करवाना चाहिए या नहीं

भारत की महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा होने वाले गंभीर रोगों में एक बनता जा रहा है। ऐसे में अगर आप भी इस बीमारी से पीड़ित हैं और मां बनने की खुशी को महसूस करना चाहती हैं या मां बनने के बाद अपने शिशु को स्तनपान करने से डर रही हैं, तो आपको बता दें कि हाल ही में हुए शोध के मुताबिक ब्रेस्ट कैंसर के दौरान स्तनपान करवाने से उसका हानिकारक असर दूध के जरिए शिशु तक नहीं पहुंचता है।


ब्रेस्ट कैंसर के दौरान शिशु को स्तनपान करवाना सुरक्षित है या नहीं

मुंबई के एचसीजी कैंसर सेंटर की कंसलटेंट, उपासना सक्सेना के मुताबिक, शोध में इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं और उनके शिशु पर इलाज का दुष्प्रभाव होता है। ऐसे में महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के समय भी गर्भावास्था को इंज्वॉय कर सकती हैं और इसके साथ ही शिशु को ब्रेस्टफीडिंग भी करवा सकती हैं।

जबकि पिछले कुछ समय से ये धारणा बनी हुई थी कि कैंसर की दवाओं और कीमोथेरेपी के हानिकारक प्रभाव ब्रेस्ट फीडिंग के जरिए शिशु तक पहुंच सकता है। जिसकी वजह से अधिकांश स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाएं गर्भावास्था से न चाहते हुए भी दूरी बना लेती थी।


लेकिन हाल ही में हुए कुछ अध्ययन इस धारणा को तोड़ने में मददगार साबित हुए कि गर्भ धारण करने वाली महिलाओं में प्रेग्नेंसी की कोशिश न करने वाली महिलाओं की तुलना में शिशु और मां दोनों की हेल्थ के खतरे को कम करने में मदद मिलती है।

अगर आप स्तन कैंसर की लास्ट स्टेज पर हैं, तो आप शिशु को दूध पिलाने से परहेज कर सकती हैं, क्योंकि इस समय दवाओं को डोज बेहद हैवी होता है और कीमोथेरेपी का रेडिएशन की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जिससे आपके दूध में मिलकर आपके शिशु तक पहुंच सकती है।

इसके साथ ही कैंसर के ठीक होने के बाद भी शिशु को दूध पिलाने की स्थिति में आने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है या इस इमोशन से हमेशा के लिए दूर होना पड़ सकता है। इसका ब्रेस्ट की सर्जरी होना और ब्रेस्ट में दूध बनने की स्थिति न होना प्रमुख कारण है।

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