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Coronavirus: एक बार फिर से लौट सकता है कोरोना का प्रकोप, साइंटिस्ट का दावा

Coronavirus: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीस के निदेशक डॉक्टर एंथोनी फॉसी ने खुलासा किया है कि इस खतरनाक वायरस ने दक्षिणी गोलार्ध (Southern hemisphere) में जहां सर्दियां लगभग शुरु हो चुकी है। वहां भी अपनी जड़े फैलाना शुरू कर दी है। ऐसे में इससे निपटने के लिए दवाईयों को जल्दी जल्दी बनाना बहुत जरूरी हो गया है।

भारत में पांच मिनट के भीतर होगी कोरोना की जांच, 100 रुपये आएगा खर्चकोरोना वायरस (फाइल फोटो)

Corona virus: जहां एक तरफ पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को कोहराम देखने को मिल रहा है। यह वायरस थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीस के निदेशक डॉक्टर एंथोनी फॉसी ने खुलासा किया है कि इस खतरनाक वायरस ने दक्षिणी गोलार्ध (Southern hemisphere) में जहां सर्दियां लगभग शुरु हो चुकी है। वहां भी अपनी जड़े फैलाना शुरू कर दी है। ऐसे में इससे निपटने के लिए दवाईयों को जल्दी जल्दी बनाना बहुत जरूरी हो गया है।

सीजनल साइकल में फिर से लौट सकता है

इसके साथ ही अमेरिका के साइंटिस्ट का कहना है कि इसके काफी चांसेस है कि यह वायरस सीजनल साइकल में एक बार फिर से वापस लौट आए। इसके लिए इसकी वेक्सिन की खोज बहुत ही जल्दी करनी होगी। वहीं उन्होंने बताया कि जैसे जैसे दक्षिण अफ्रीका (South Africa) और दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) के देशों में ठंड करीब आ रही है। वैसे ही कोरोना वायरस के मामले और तेजी से सामने आ रहे हैं। वहीं अगर यह ऐसा ही बना रहा तो इसका प्रकोप झेलने के लिए हमें दोबारा से तैयार रहना पड़ेगा।

सभी मुमकिन कोशिश करनी चाहिए

फॉसी का कहना है कि कोरोना वायरस के आतंक को रोकने के लिए वैक्सीन की खोज के लिए जो भी करना पड़े। वो सभी मुमकिन कोशिश करनी चाहिए ताकि हम इसकी आने वाली अगली साइकिल से लड़ने के लिए पहले ही तैयार रहें।

दो वैक्सिन का टेस्ट चल रहा है

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि कोरोना वायरस के इलाज के दो वैक्सिन पर Human Test चल रहा है। जिसमें से एक वैक्सिन को अमेरिका ने तैयार किया है और दूसरे वैक्सीन को चीन ने तैयार किया है। वहीं इन वैक्सिन को लोगों तक पहुंचने में 1 से डेढ़ साल का समय लगेगा।

वैक्सिन के अलावा भी इसके इलाज के लिए काफी अलग अलग तरीके अजमाए जा रहे हैं। जिसके लिए कुछ नई दवाइयां खोजी गई हैं। वहीं कुछ दूसरी बीमारियों में इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयों को कोरोना वायरस के इलाज में यूज किया गया है। जिसमें मलेरिया, स्वाइन फ्लू और HIV की दवाइयां शामिल हैं।

कोरोना के कहर को करेंगे खत्म

हिम्मत न हारते हुए फॉसी ने आशंका जताई है कि हम इस कोरोना के कहर को खत्म करने में सफल रहेंगे। इसके साथ ही हमें इसके दोबार अटैक के लिए पहल से ही तैयार रहना पड़ेगा।

फॉसी की मानें तो यह वायरस उमस और गर्मी के मुकाबले में सर्दियों में ज्यादा खतरनाक होता है। इस बात का दावा चीन के रिर्सच पेपर में भी किया गया है। वहीं अभी इन पेपर का टेस्ट होना बाकि है। जिसके आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

ठंड में रहते हैं अधिक समय

वहीं आपको बताते चलें कि इस थ्योरी के पीछ लोजिक यह है कि सांस के ड्रॉपलेट्स एयरबोर्न की वजह से ठंडे Atmosphere में लंबे समय तक रहते हैं। इसके साथ ही एक वजह यह भी है कि यह वायरस गर्म वाली सतह पर जल्दी खत्म हो जाती है। वहीं देखा गया है कि यह वायरस जहां भी बुरी तरीके से फैला है उस समय वहां का Temperature 20 डिग्री से नीचे देखा गया था।

Shagufta Khanam

Shagufta Khanam

Jr. Sub Editor


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