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अगर रोजाना एसिडिटी, अपच की रहती है दिक्कत, तो जानें इसके कारण और उपचार

Health Tips : अपनी डाइट को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही से आज के समय में बहुत से लोग एसिडिटी और गैस प्रॉब्लम से परेशान रहते हैं। लेकिन अपनी डाइट पर ध्यान देकर इसे ठीक किया जा सकता है।

अगर रोजाना एसिडिटी, अपच की रहती है दिक्कत, तो जानें इसके कारण और उपचार

Health Tips : इन दिनों बहुत से लोग खट्टी डकार, पेट फूलने, अपच, बेचैनी या सीने में जलन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं। दरअसल, खान-पान में लापरवाही और स्ट्रेस जैसे कारणों से एसिडिटी हो सकती है। ऐसे में एसिडिटी के कारणों को जानकर इससे बचा जा सकता है।

एसिडिटी के कारण :

ताजा भोजन ही करें

लंदन की डाइटीशियन लुसी डेनियल कहती हैं कि जो लोग अकसर बाहर भोजन करना पसंद करते हैं, उन्हें यह समस्या अधिक होती है। आमतौर पर रेस्टोरेंट में पास्ता, चावल या आलू इकट्ठा पकाकर या उबालकर रख लिया जाता है और ग्राहकों को बार-बार वही गर्म करके सर्व किया जाता है। स्टार्चयुक्त पदार्थ को यदि बार-बार गर्म किया जाए, तो उसके अणुओं की संरचना बदलने लगती है।

इससे छोटी आंत में भोजन ठीक से पचे बिना ही बड़े आंत में पहुंच जाता है। ऐसे में जो बैक्टीरिया खाद्य पदार्थों की ब्रेक-डाउन प्रक्रिया में मदद करते हैं, वे गैस बनाने लगते हैं। इसलिए एसिडिटी से बचाव के लिए बाहर के खाने से बचें और घर में भी बासी भोजन बार-बार गर्म करके ना खाएं।

दवाओं का सेवन

एलर्जी स्पेशलिस्ट मारिया ने विलियम्स का कहना है कि फूड प्वॉइजनिंग से पीड़ित होने के दौरान ली जाने वाली मेडिसिन या एंटीबॉयोटिक से पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। इस तरह के असंतुलन के कारण ही पेट में खाद्य पदार्थों का फर्मेंटेशन (सड़ने की प्रक्रिया) होने लगती है, जिससे कब्ज की शिकायत बढ़ जाती है।

ये बैक्टीरिया पाचन-प्रक्रिया को दुरुस्त रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही पेट की कोशिकाओं को भी स्वस्थ रखते हैं। इसलिए बगैर डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं लेनी चाहिए।

स्ट्रेस के कारण

सेहत विज्ञानी कहते हैं कि दिमाग और पेट आपस में संबंधित होते हैं। बाउल मूवमेंट अनियमित होने से व्यक्ति का मिजाज पूरे दिन चिड़चिड़ा बना रहता है। वहीं, स्ट्रेस होने के कारण भी खान-पान में अनियमितता, कब्ज की शिकायत और अन्य पाचन-तंत्र संबंधित गड़बड़ियां बढ़ जाती हैं। स्ट्रेस से पीड़ित व्यक्ति या तो भूख से ज्यादा भोजन करता है या कम भोजन करने लगता है। इससे उसकी पाचन प्रणाली बिगड़ जाती है।

हार्मोंस में बदलाव

मेंसटुरल साइकल के समय महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण भी एसिडिटी हो सकती है। इस दौरान कई महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन का स्तर बढ़ जाने के कारण पेट फूलने लगता है। इसी वजह से पेट की मांसपेशियां बाकी दिनों की तुलना में रिलैक्स हो जाती हैं। ऐसे में पेट की आंतरिक प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है।

एसिडिटी के उपचार :

जब एसिडिटी की प्रॉब्लम हो तो कुछ उपायों पर अमल करें।

-बिना चीनी का ठंडा दूध पीएं। इसका अल्कलाइन नेचर पेट में अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज कर देता है।

-रोज शहद का सेवन करें। यह एंटीबैक्टीरियल होता है और स्टमक लाइनिंग को सुरक्षा देता है।

-घी, लस्सी या एक प्याला दही खाने की आदत डालें।

-ठंडा पानी पीएं। इससे जलन में आराम महसूस होगा।

-फल और हरी सब्जियां रोज खाएं।

-उबली हुई सब्जियां और सूप आसानी से पचते हैं और पेट को आराम देते हैं।

-साइट्रस जूस से भरपूर नीबू पेट में गैस्ट्रिक जूस को स्टिमुलेट करती है, जिससे पाचन क्रिया आसान हो जाती है।

-सौंफ में एनाटोल, फ्रेंचोन और इस्ट्रागोल तत्व होते हैं, जो एंटीइंफ्लेमेटरी होते हैं। ये आंतों की मसल्स को स्मूद रखते हैं और डाइजेस्टिव सिस्टम में फंसी

गैस को बाहर निकालते हैं।

-पपीते में पाचक एंजाइम्स भरपूर मात्रा में होते हैं। ये कठोर और अनपचे प्रोटींस को तोड़कर पचा देते हैं, जो गैस की मुख्य वजह होते हैं।

-अदरक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। ये पेट के खराब बैक्टीरिया को निकाल बाहर करते हैं।

-पेट फूलने, एसिडिटी और गैस की समस्या में लहसुन खाना बेहद फायदेमंद होता है। इसकी एक या दो कली चबाकर भी खा सकते हैं या फिर दाल अथवा

सब्जी में डालकर।

-काली मिर्च, इलायची, धनिया और तुलसी के पत्ते भी पाचन क्रिया को आसान बनाते हैं और एसिडिटी-गैस से मुक्ति दिलाते हैं।

-शिखर चंद जैन

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