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TIPS: बाल बहुत झड़ते हैं तो जरूर करे ये आसान उपाय

प्रणायाम की शुरूआत नाड़ी शोधन से करना ज्‍यादा लाभकारी माना गया है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं।

TIPS: बाल बहुत झड़ते हैं तो जरूर करे ये आसान उपाय

नाड़ियां मानव शरीर में सूक्ष्म ऊर्जा चैनल है, जो विभिन्न कारणों से बंद हो सकती है। नाड़ी शोधन प्राणायाम सांस लेने की एक ऐसी प्रक्रिया है, जो इन ऊर्जा चैनलों को साफ करने में मदद करती है और इस प्रकार मन शांत होता है।

आप जब भी कोई प्राणायम की शुरूआत करें, तो सबसे पहले नाड़ी शोधन प्राणायाम करें। प्रणायाम की शुरूआत नाड़ी शोधन से करना ज्‍यादा लाभकारी माना गया है। इस प्राणायाम को हर उम्र के लोग कर सकते हैं।

इसे करना बहुत आसान है। इसका अभ्यास सुबह जल्‍दी उठकर करने से लाभ मिलता है। शाम के समय भी इसे कर सकते हैं। इस बात का ध्‍यान रखें कि प्राणायाम हमेशा शुद्ध वातावरण में भी करें।

नाड़ी शोधन प्राणायाम के लाभ

1. बालों को गिरने से रोकने के लिए फायदेमंद प्राणायाम है नाड़ीशोधन, उज्जाई या सरल नाड़ीशोधन प्राणायाम, जिसका अभ्यास कोई भी कर सकता हैं।

2. मन को शांत और केंद्रित करने के लिए यह एक बहुत अच्छी क्रिया है।

3. भूतकाल के लिए पछतावा करना और भविष्य के बारे में चिंतित होना यह हमारे मन की एक प्रवृत्ति है। नाड़ी शोधन प्राणायाम मन को वर्तमान क्षण में वापस लाने में मदद करता है।

4. श्वसन प्रणाली व रक्त-प्रवाह तंत्र से सम्बंधित समस्याओं से मुक्ति देता है।

5. मन और शरीर में संचित तनाव को प्रभावी ढंग से दूर करके आराम देने में मदद करता है।

6. नाड़ियों की शुद्धि करता है और उनको स्थिर करता है, जिससे हमारे शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह हो।

कैसे करें नाड़ी शोधन प्राणायाम

1. सबसे पहले किसी भी सुखासन में बैठकर कमर को सीधा करें और आंखें बंद कर लें।

2. दाएं हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद कर पूरी श्वास बाहर निकालें।

3. अब बाईं नासिका से श्वास को भरें, तीसरी अंगुली से बाईं नासिका को भी बंद कर आंतरिक कुंभक करें।

4. जितनी देर स्वाभाविक स्थिति में रोक सकते हैं, रोकें।

5. फिर दायां अंगूठा हटाकर श्वास को धीरे-धीरे बाहर छोड़ें (रेचक करें)। 1-2 क्षण बाह्य कुंभक करें।

6. फिर दायीं नासिका से गर्दन उठाकर श्वास को रोकें, फिर बाईं से धीरे से निकाल दें।

इसे 5 से 7 बार करें। शुरू में 1:1:1 और 1:2:2 का अनुपात रखें। धीरे-धीरे आंतरिक कुंभक के अभ्यास को बढ़ाएं। फिर 1:4:2 के अनुपात में करें।

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