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2020 तक मीजल्स से देश को मिल जाएगी मुक्ति:स्वास्थ्य मंत्रालय

मीजल्स और रूबेला टीकाकरण अभियान दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान होगा।

2020 तक मीजल्स से देश को मिल जाएगी मुक्ति:स्वास्थ्य मंत्रालय
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मीजल्स और रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान की शुरूआत कर दी है जिसके तहत इस साल 3.4 करोड़ बच्चों को इसमें शामिल करने की उम्मीद है ताकि देश में इन बीमारियों के मामलों को कम किया जा सके।

मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि आठ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नागर हेवली, दमन और दीव, हिमाचल प्रदेश, केरल, तेलंगाना और उत्तराखंड -इस चरण के हिस्सा होंगे।

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अभियान का पहला चरण फरवरी 2017 में पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से शुरू हुआ था तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, लक्षद्वीप और पुड्डुचेरी और इसमें 3.3 करोड़ से ज्यादा बच्चों में टीकाकरण किया गया था जो लक्षित आयु वर्ग का 97 प्रतिशत था। यह अभियान स्कूल, सामुदायिक केंद्रों व स्वास्थ्य केंद्रों पर चलाया गया था।

किस आयु वर्ग को लगेगा टीका

नौ महीने से लेकर पंद्रह साल से कम उम्र के सभी बच्चों को इस अभियान के दौरान मीजल्स-रूबेला का एक टीका लगाया जाएगा। अभियान के बाद, एमआर टीका नियमित टीकाकरण का हिस्सा बन जाएगा और वर्तमान में 9-12 महीने और 16-24 महीने के बच्चों को दिए जा रहे मीजल्स टीके की जगह लेगा।

बयान के मुताबिक अभियान का लक्ष्य समुदायों में मीजल्स और रूबेला के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ाना है ताकि बीमारी को खत्म किया जा सके इसलिए सभी बच्चों को अभियान के दौरन एमआर टीका लगना चाहिए।

जिन बच्चों को यह टीका लग गया है। अभियान से मिले खुराक से उनकी प्रतिरोधक क्षमता को अतिरिक्त बढ़ावा मिलेगा।

दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान

अभियान के दौरान अधिकतम कवरेज प्राप्त करने के लिए कई हितधारकों को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अन्य मंत्रालयों और विकास भागीदारों, लायंस क्लब, पेशेवर निकाय,भारतीय बाल चिकित्सा संस्थान, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, सिविल सोसायटी संगठनों आदि को शमिल किया गया है ताकि टीकाकरण अभियान सफल हो सके।

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मीजल्स और रूबेला अभियान देश में मीजल्स और रूबेला सीआरएस के कारण बीमारी और मृत्यु को कम करने के वैश्विक प्रयासों का एक हिस्सा है। रूबेला टीकाकरण सीधे बच्चों की मृत्यु दर में कमी के लिए योगदान देता है और रूबेला वैक्सीन के साथ संयोजन में, यह रूबेला को नियंत्रित करेगा और सीआरएस को रोक देगा।

भारत दस अन्य डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों के साथ मिल कर मीजल्स को खत्म करने और 2020 तक रूबेला और जन्मजात रूबेला सिंड्रोम को नियंत्रित करने के लिए तैयारी में है।

इस दिशा में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मीजल्स और रूबेला टीकाकरण शुरू किया है अभियान का उद्देश्य लगभग 41 करोड़ बच्चों को विश्व के अंदर कवर करना है और यह दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान होगा।

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