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कोलेस्ट्रॉल क्या होता है? जाने इसके लक्षण, कारण और उपचार समेत पूरी डिटेल्स

डॉ. असीम ढल, कार्डियोलॉजिस्ट, नई दिल्ली | UPDATED Nov 29 2018 11:05PM IST
कोलेस्ट्रॉल क्या होता है? जाने इसके लक्षण, कारण और उपचार समेत पूरी डिटेल्स

नॉर्मली कोलेस्ट्रॉल लेवल का जिक्र आते ही लोग चिंतित हो जाते हैं। यह सही है कि कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई होने से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यह भी सच है कि कई बॉडी फंक्शंस के लिए इसका ब्लड में एक बैलेंस्ड लेवल पर बने रहना जरूरी है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि कोलेस्ट्रॉल होता क्या है? हमारे शरीर में इसकी भूमिका क्या है? और इसके लेवल को मेंटेन कैसे किया जा सकता है?

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?

यह लिपिड का ही पार्ट है, जो शरीर के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए जरूरी है। हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका की बाहरी परत में कोलेस्ट्रॉल होता है। यह एक चिकना स्टेरॉयड होता है, जो पूरे शरीर में ब्लड प्लाजमा के माध्यम से ट्रांसपोर्ट होता है। इसका निर्माण पशुओं के द्वारा होता है। कम मात्रा में इसका निर्माण पौधों और फंगस के द्वारा भी किया जाता है। कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार के होते हैं-एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) और एचडीएल (हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन)।  

कोलेस्ट्रॉल के कार्य 

कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं की बाहरी परत का निर्माण करता है और उनका रख-रखाव करता है। यह इस बात की भी निगरानी करता है कि कौन से अणु कोशिकाओं में प्रवेश करें और कौन से नहीं। कोलेस्ट्रॉल सेक्स हॉर्मोन एंड्रोजन और एस्ट्रोजन के निर्माण में भी भाग लेता है। यह एड्रिनल ग्रंथि से हॉर्मोन कार्टिसोल, एल्डोस्टेरॉन और दूसरे हार्मोन के स्रावण के लिए जरूरी है। यह सूरज की किरणों को विटामिन डी में बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वसा में घुलनशील विटामिनों जिनमें विटामिन ए, डी, ई और के शामिल हैं के मेटाबॉलिज्म के लिए कोलेस्ट्रॉल जरूरी है।

सामान्य स्तर   

मानव रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 3.6 मिलिमोल/ लीटर से 7.8 मिलिमोल/लीटर के बीच होता है। 6 मिलिमोल/लीटर को उच्चतम माना जाता है, जिससे आर्टियल डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। 7.8 मिलिमोल/लीटर से ऊपर को अत्यधिक उच्च स्तर माना जाता है। इसका उच्च स्तर हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका कई गुना बढ़ा देता है।

हाई लेवल के खतरे 

धमनियों का संकरा और असामान्य  हो जाना।

हृदय की कोशिकाओं का मृत हो जाना।

दिल की बीमारियां।

मस्तिष्क की कोशिकाओं के मृत होने से स्ट्रोक की आशंका। 

बचाव 

एक्सरसाइज और योग करें।

फल, सब्जियां, साबुत अनाज अधिक मात्रा में खाएं।

सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करें।

भरपूर सोएं।

अपना भार अधिक नहीं होने दें, सामान्य वजन रखें।

धूम्रपान और शराब के सेवन से बचें।

ज्यादा से ज्यादा फाइबर युक्त भोजन का सेवन करें।

सूखे मेवे जैसे अखरोट और बदाम भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करते हैं। अखरोट रक्त कोशिकाओं को स्वस्थभी रखता है।

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट 

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टेस्ट में रक्त में एचडीएल और एलडीएल दोनों के स्तर की जांच होती है। 20 साल की उम्र से टेस्ट कराना शुरू कर देना चाहिए। आमतौर पर टेस्ट का अंतराल पांच वर्ष में एक बार होना चाहिए लेकिन अगर जांच में यह बात सामने आती है कि आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक है या आपके परिवार में दिल की बीमारी का पारिवारिक इतिहास रहा है तो डॉक्टर आपको हर 6-12 महीने में यह जांच कराने की सलाह देते हैं।

हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण 

हृदय की कोशिकाओं का संकुचित हो जाना।

रक्त  का थक्का बन जाना और रक्त कोशिकाओं का फट जाना

त्वचा पर बड़े-बड़े पीले चकते आ जाना, विशेषकर आंखों के आस-पास। यह वास्तव में कोलेस्ट्रॉल का डिपॉजिट है। यह मुख्य रूप से उन लोगों में होता है, जिनमें अनुवांशिक रूप से कोलेस्ट्रॉल का स्तर उच्च  होता है। 

हाई लेवल के कारण 

भोजन: अंडा, सीफूड में डाएट्री कोलेस्ट्रॉल होता है, जिसका मानव के कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है। हालांकि सैचुरेटेड फैट युक्त खाद्य पदार्थ रेड मीट, पेस्ट्री, केक, अधिकतर बिस्किट और क्रीम शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा देते हैं। 

सक्रियता की कमी: जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते, अपना अधिकतर समय बैठे हुए या लेटे हुए बिताते हैं उनमें एलडीएल (बैड कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा अधिक और एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल)की मात्रा कम होती है। 

शारीरिक भार: जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक होता है या जो मोटे होते हैं, उनमें सामान्य भार वालों के मुकाबले एलडीएल का स्तर अधिक और एचडीएल का स्तर कम होता है। 

धूम्रपान और शराब: जो लोग नियमित रूप से धूम्रपान या शराब का सेवन करते हैं, उनमें एलडीएल का स्तर अधिक और एचडीएल का स्तर कम होता है। 

मेडिकल कंडीशंस: कुछ मेडिकल कंडीशन जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी डिजीज, लीवर डिजीज और हाइपर थाइरॉयडिज्म से पीड़ित लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया जाता है।

एस्ट्रोजन हार्मोन: एस्ट्रोजन हार्मोन रक्त में एलडीएल का स्तर बढ़ा देता है, यही कारण है कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले एलडीएल की मात्रा अधिक होती है।

ऐसे करें कंट्रोल

तला हुआ, रिफाइंड और प्रोसेस्ड भोजन पाचन तंत्र पर दबाव डालता है, इससे शरीर में अम्लता बढ़ती है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ता है। अच्छा खान-पान अम्लता को रोकता है और कोलेस्ट्रॉल के स्वस्थ  स्तर को बनाए रखता है। धमनियों को संकरा और दिल को बीमार करने वाला कोलेस्ट्रॉल भोजन से ही आता है। मुख्य रूप से दुग्ध उत्पादों और मांस से। ओट में कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले फाइबर काफी मात्रा में होते हैं। साबुत अनाज जैसे राजमा, काबुली चना, काला और हरा चना डाएट्री कोलेस्ट्रॉल के दूसरे महत्वपूर्ण स्रोत हैं। 

प्रस्तुति- शमीम खान

रिस्क फैक्टर्स 

आपके परिवार में या निकट संबंधियों में किसी को कोरोनरी हार्ट डिजीज हुआ हो तो आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर का खतरा बढ़ जाएगा।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है। 

जो महिलाएं मेनोपॉज की कंडीशन में जल्दीपहुंच जाती हैं, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की आशंका दूसरी महिलाओं के मुकाबले अधिक होती है।

भारतीय उप महाद्वीप (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका) के लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने की आशंका अधिक है।


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-Tags:#परेशानी##गंभीर#बीमारी

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