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वैवाहिक जीवन के लम्हों को यादगार बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

हर शादी में विवाद और शांति, बीमारी और हेल्थ व आंसू और खिलखिलाहट के मौके आते हैं।

वैवाहिक जीवन के लम्हों को यादगार बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
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नई दिल्ली. हर शादी में विवाद और शांति, बीमारी और हेल्थ व आंसू और खिलखिलाहट के मौके आते हैं। और इस तरह शादियां चलती रहती हैं। मैरिड लाइफ के रिश्ते में उतार- चढ़ाव, मोड़-घुमाव हो सकते हैं, पर यह ‘टू-वे रोड’ नहीं है। वरना एक राह पर रहकर भी पति-पत्नी अलग-अलग दिशाओं में चलते रहेंगे। मैरिड लाइफ यानी साथ-साथ चलना।
साथ-साथ चलने और अपनी गृहस्थी को सुखी बनाने के सूत्र क्या हैं? यह तो वही बता सकता है, जो लम्बे समय तक ऐसा कर पाया है। ब्रिटेन के जोसफ़ लिटिलवुड और उनकी पत्नी सैली ने 75 वर्ष से अधिक का वैवाहिक जीवन जिया और इसी वर्ष शतायु सैली की मृत्यु से यह जोड़ी टूटी। अटूट गृहस्थी के लिए उनका मंत्र था- बहस। बक़ौल सैली, ‘ख़ूब बहस कीजिए, परंतु हमेशा याद रखिए कि इससे उबरना भी है। यानी आगे बढ़ जाना, न कि मुद्दे को धीरे-धीरे पकाते रहना।’

झगड़ने का तरीक़ा जानना ज़रूरी
लिटिलवुड कपल का 75 सालों का एक्सपीरिएंस इसे ‘बहस’ कहता है और दूसरी तरफ़, 40 हज़ार सालों का एक्सपीरिएंस इसे ‘संवाद’ का नाम देता है। जी हां, लम्बे रिश्ते में बंधे 700 से अधिक जोड़ों के बीच हुए सर्वे में सुखद और पक्की गृहस्थी के लिए जो प्रमुख सूत्र निकलकर आए, उनमें सबसे ऊपर था- संवाद। इन तमाम जोड़ों का कुल मिलाकर वैवाहिक अनुभव 40 हज़ार सालों का था। यह सर्वे करने वाले प्रोफेसर कार्ल पिलेमर के अनुसार, ‘बूढ़े दम्पतियों ने लगभग छूटते ही जो बात कही, वह थी- बातचीत, बातचीत और बातचीत। उनका पक्का विश्वास था कि मैरिड लाइफ से जुड़ी ज़्यादातर समस्याएं खुली बातचीत से सुलझाई जा सकती हैं।’
ध्यान रहे कि इस बातचीत में सुनना भी शामिल है। कपल्स के बीच बहुत सारी समस्याएं न सुनने के कारण ही गहराती हैं और सिर्फ़ सुन लिए जाने पर ही ख़त्म हो जाती हैं। 87 वर्ष का कपल जीवन बिताने वाले ज़ेल्माइरा और हर्बर्ट फिशर इसे ‘झगड़ा’ कहते थे। झगड़ा- मतभिन्नता की मौखिक अभिव्यक्ति। इस दम्पती के अनुसार, ‘हम इस बात पर हमेशा से सहमत हैं कि असहमत हुआ जा सकता है और जो चीज़ हमारे लिए मायने रखती है, उसके लिए लड़ा जा सकता है। लेकिन इसके साथ ही झुकना सीखना भी ज़रूरी है, न कि टूटना।’ आप इसे संवाद कहें या बहस और झगड़ा कह लें, मूल विचार है अपनी बात रखना और दूसरे की बात सुनना। इस सुनने-सुनाने से ही दिल का गुबार निकलता है, ग़लतफ़हमियां दूर होती हैं और कोई राह निकलती है।
जो चीज़ें पक्का जोड़ती हैं
फिशर दम्पती ने एक और मार्के की बात कही। जब यह पूछा गया कि रिश्ते के लिहाज़ से एक ख़राब दिन के बाद दिमाग़ में रखी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात क्या होनी चाहिए, तो उनका जवाब था- ‘याद रहे कि शादी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है, इसलिए स्कोर न रखें। ईश्वर ने आप दोनों को होड़ करने नहीं, एक टीम के रूप में जीतने के लिए भेजा है।’ प्रोफ़ेसर पिलेमर का सर्वे इसे और स्पष्ट करता है- टीम का अर्थ है, समस्याओं को साझा रूप में देखना। किसी एक साथी की बीमारी, निराशा, हार या असफलता दूसरे साथी की भी उतनी ही चिंता और ज़िम्मेदारी का विषय होनी चाहिए।

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