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Happy Life Tips: लोगोंं की बातों से हैं परेशान तो एक बार इस लेख को जरूर पढ़ें

अगर हम चाहते हैं कि जिंदगी निश्चिंतता के साथ जिएं और खुशहाल रहें तो अपने आपको कभी फिजूल की बातों में न उलझाएं। सहज-सरल होकर जीवन जिएं। जो करना है, एक उद्देश्य के साथ करें, उसका लक्ष्य निर्धारित कर लें। साथ ही अपने प्रियजनों की भी खुशियों का पूरा ध्यान रखें।

Happy Life Tips: लोगोंं की बातों से हैं परेशान तो एक बार इस लेख को जरूर पढ़ें
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जिंदगी को ऐसे बनाएं खुशहाल (फाइल फोटो)

कई बार हमें ऐसा लगता है कि हमारी जिंदगी बहुत जटिल, बोझिल, उलझन भरी और अस्त-व्यस्त हो गई है। हमें पल भर की फुर्सत नहीं मिलती कि जरा सुकून की सांस ले लें, खुले दिल से हंस सकें या फिर अपने बच्चों के साथ खेल सकें, जीवन साथी के साथ ठहाके मार सकें और अपने माता-पिता से दो पल कुछ मन की बातें कर लें।

इन बातों के संदर्भ में पहले एक छोटी-सी कहानी

एक लकड़हारा किसी बियाबान जंगल में रोज जाता था। वह खूब सारी लकड़ियां काट कर लाता था। जंगल में एक विशाल बरगद का पेड़ भी था, जिस पर सैंकड़ों पंछी बसेरा करते, उसकी छाया में कई पशु आराम करते थे। उस लकड़हारे की नजर बहुत दिनों से बरगद पर ही टिकी हुई थी। लेकिन वह बहुत कोशिश करके भी उसकी लकड़ी को काट नहीं पाता था। एक तो उसका तना इतना मजबूत था कि कुल्हाड़ी के वार का असर ही नहीं होता था, दूसरा कभी लकड़हारा देर तक कोशिश करके काटने की सोचता तो कोई बिगड़ैल जंगली सांड़ या मोटा अजगर या कभी कोई विशाल चील आकर उसे भगा देते। इससे चिढ़कर लकड़हारा हर रोज बरगद को जली-कटी सुनाता और कहता, 'तुम्हारी लकड़ी बेहद घटिया है, मेरे किसी काम की नहीं।' रोज-रोज लकड़हारे की खरी-खोटी सुनते-सुनते बरगद परेशान हो गया। आखिर एक दिन बरगद ने शांत स्वर में उसे खरी-खरी सुना दी, 'दोस्त! मुझे न तो तुम्हारे मूल्यांकन की जरूरत है, न तुम्हारे काम का होने की। मैं अपने कुदरती जीवन में सुखी हूं। तुम्हारे लिए मेरे काम का होने से मतलब है, तुम्हारे हाथों कट जाना फिर किसी निर्जीव भौतिक वस्तु में तब्दील हो जाना। इसके दोहरे नुकसान हैं, एक तो तुम्हारी खुशी के लिए मैं नष्ट हो जाऊं और दूसरा यह कि जिन्हें मेरी वास्तविक जरूरत है, जो मेरे चाहने वाले हैं, उन्हें भी कष्ट उठाना पड़े। इसलिए मुझे तुम्हारे लिए नहीं बल्कि अपने लिए और अपने प्रियजनों के लिए ही अच्छा और उनके काम का रहना है।'

कभी न भूलें वास्तविक मकसद : बरगद की बातों में अपनी जिंदगी की सार्थकता, खुशहाली और सुकून का सार छिपा हुआ है। आप कभी गौर करेंगी तो पाएंगी कि हमारी ज्यादातर उलझनें, बोझ, तनाव और उदासी सिर्फ और सिर्फ इसलिए हैं कि हम दूसरों को खुश करने, अपनी झूठी बड़ाई पाने और उनका अप्रूवल हासिल करने के लिए खुद पर अनावश्यक कामों और गतिविधियों का बोझ लाद लेते हैं। इस प्रक्रिया में हम यह भूल ही जाते हैं कि हमारी अपनी निजी जरूरतें क्या हैं, हमारे वास्तविक उद्देश्य और लक्ष्य क्या हैं, हमारे स्नेही स्वजनों की हमसे क्या अपेक्षाएं हैं?

फिजूल की बातों से रहें दूर : आजकल सोशल मीडिया पर खुद को अत्यधिक टैलेंटेड, समृद्ध और दूसरों से चतुर दिखाने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते? कुछ महिलाएं खुद को अल्ट्रा मॉडर्न और प्रोग्रेसिव दिखाने के लिए कई बार ऐसी-ऐसी बातें फेसबुक, टि्वटर या इंस्टाग्राम जैसे सोशल प्लेटफॉर्म पर लिख देती हैं, ऐसी तस्वीरें पोस्ट कर देती हैं कि बाद में उन्हें अपने परिजनों, रिश्तेदारों, निकटवर्ती मित्रों या ऑफिस कुलीग्स के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है। इसी प्रकार कुछ लोग दूसरों से बेहतर दिखने और उनसे अच्छे कमेंट लेने की कोशिश में अपनी काफी ऊर्जा, समय और संसाधनों का खर्च कर डालते हैं। इन प्रतिक्रियाओं का न तो कोई दूरगामी प्रभाव होता है, न ही तात्कालिक सुख से इतर कोई महत्व।

लक्ष्य पर रखें नजर: अगर आपको वाकई एक सुकूनपरक, सफल, खुशहाल और सहज जिंदगी चाहिए तो हमेशा दूरदर्शिता के साथ काम करें। अपने लक्ष्य निर्धारित करें और अपनी कार्य योजना और सक्रियता का प्रयोग उनके अचीवमेंट के लिए करें। सबसे पहले अपने ऊपर निर्भर लोगों की, साथ ही जिन पर आप निर्भर हैं, उन लोगों की खुशी का ध्यान रखें, ज्यादा से ज्यादा काम उनके हित के लिए करें। इसके अलावा कुछ करना हो तो वंचित और उपेक्षित वर्ग या अपने आस-पास मौजूद असहाय बुजुर्गों के लिए करें। इससे आपको न सिर्फ आत्म-सुख मिलेगा बल्कि उनकी दुआएं भी मिलेंगी, जो हमेशा आपको सुखी रखेंगी।

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अनावश्यक कार्यों को बंद करें : जब आप अपनी दिनचर्या से अनावश्यक कार्यों को छांट कर निकाल देंगी तो यकीन मानिए कि आपको अपनी तरक्की और सुख के लिए काम करने के लिए बहुत सारा समय मिलने लगेगा। आपका मस्तिष्क भी संतुलित और सकारात्मक तरीके से काम करने के लिए सक्रिय हो उठेगा। हां, आपको अपनी दिनचर्या में कम से कम 45 मिनट से एक घंटे का समय फिजिकल और मेंटल फिटनेस के लिए भी रिजर्व रखना चाहिए, जिसके लिए वर्कआउट, मेडिटेशन और योगाभ्यास आदि बहुत जरूरी है।

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