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कहीं आप भी तो नहीं हैं दूसरों के हाथों की कठपुतली

जीवन में सफल और खुश वही रह सकता है, जो अपनी क्षमताएं पहचानता है, अपने तरीके से मनचाहा काम करता है। लेकिन कई बार हम अंजाने में ही अपने करीबियों को खुश करने के लिए उनके हाथों की कठपुतली बन जाते हैं या आस-पास के हालात से प्रभावित होकर काम करने लगते हैं। इसका हमारे जीवन पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता है और इससे कैसे उबर सकते हैं, जानिए।

कहीं आप भी तो नहीं हैं दूसरों के हाथों की कठपुतली
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कहीं आप भी तो नहीं हैं दूसरों के हाथों की कठपुतली ( फाइल फोटो)


हर व्यक्ति जीवन में आगे बढऩे की योजना बना रहा है, पर कुछ ही ऐसे इंसान होते हैं जो सफल हो पाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वे अपनी क्षमताओं का सही तरह से मूल्यांकन कर लेते हैं। उनमें जो कमी होती है, उसे पहचानकर दूर करने की कोशिश करते हैं। अगर अपनी क्षमताओं को पहचाने बिना लक्ष्य प्राप्त करना चाहते हैं तो आप विफल हो सकते हैं। आपको क्षमताओं के अनुरूप ही अपना लक्ष्य तैयार करना चाहिए, हालांकि लगातार क्षमता बढ़ाने की कोशिश भी करनी चाहिए।

अनुभवों से सीखने की कोशिश

आप अपने जीवन से लगातार सीखते हैं। अगर आप ने अपनी गलतियों से ही सीखना बंद कर दिया तो आप बार-बार गलत निर्णय लेंगे। ऐसा कहा भी जाता है कि हम अपनी गलतियों को ही अनुभवों का नाम देते हैं। एक बार आप अपनी क्षमताओं को ठीक तरह से पहचान गए तो आप उनका प्रभावी इस्तेमाल कर सकेंगें। हार से उबरने और नई शुरुआत करने के तरीके का अनुभव आपके हमेशा काम आएगा। एक कहावत है कि मूर्ख आदमी गलतियों से कोई सबक नहीं लेता, समझदार अपनी गलतियों से सबक लेता है और बुद्धिमान दूसरों की गलतियों से भी सबक लेता है।

वैज्ञानिक सोच को दें महत्व

आपको स्थितियों को भांपते हुए वैज्ञानिक सोच के साथ फैसला करना चाहिए कि आपके लिए पुराने लक्ष्य पर टिके रहना कितना फायदेमंद है। किसी पुराने लक्ष्य पर टिके रहने और नई शुरुआत के साथ जुड़े रिस्क फैक्टर के बीच संतुलन बनाने का काम आपको ही करना पड़ता है। इसके लिए आपको अपनी स्थितियों के अनुसार फैसले लेने होते हैं। याद रखिए कि अगर आप पुराने लक्ष्यों पर अड़े रहेंगें तो आप भविष्य में आने वाले किसी सुनहरे मौके को हाथों-हाथ नहीं ले पाएंगे।

अपनी क्षमताओं पर गौर करें

अपनी क्षमताओं का मूल्यांकन करना जरूरी है। आप हर फील्ड में एक्सपर्ट नहीं हो सकते। हर इंसान की अपनी कमजोरियां और खूबियां होती हैं, जिनका ठीक-ठीक पता उस व्यक्ति को ही होता है। अगर यह सोचते हैं कि आप दुनिया के हर काम को पूरे परफेक्शन के साथ कर लेंगे तो ऐसा सोचना गलत है। प्रसिद्ध गणितज्ञ रामानुजन बचपन से ही मेधावी छात्र थे। गणित में उनकी प्रतिभा का लोहा सभी मानते थे, लेकिन गणित में रुचि होने के बावजूद वह मद्रास में लिपिक के पद पर काम कर रहे थे क्योंकि उन्हें लगता था कि गणित में शोध कार्य करने के बजाय वह बतौर लिपिक अच्छा काम कर पाएंगे। जल्द ही उन्हें यह अहसास हुआ कि उनका भविष्य गणित में ही है और उसके बाद उन्होंने अपने लिपिक के पद से त्यागपत्र दे दिया। रामानुजन ने अपनी प्रतिभा को पहचाना और उसके अनुसार फैसला किया।

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खुद को पहचानने से फायदा

आपने यह तो सोच लिया कि आपको डॉक्टर बनना है या पुलिस ऑफिसर, लेकिन क्या आपने अपनी कमजोरियों का सही तरीके से आकलन कर लिया? जी हां, हम लक्ष्य तय करने में कई बार बहुत जल्दी कर देते हैं या यूं कहें कि उससे जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हम गौर ही नहीं कर पाते। उदाहरण बतौर एक आदमी जो दिल का इतना कमजोर है कि गोली चलाना तो दूर उसकी आवाज से घबरा जाता है, वह पुलिस ऑफिसर कैसे बन सकता है! इसी तरह जो इंजेक्शन लगते नहीं देख सकता वह डॉक्टर कैसे बन सकता है! इसलिए पहले खुद को पहचानें और फिर कॅरियर चुनें। खुद को पहचानने के बाद आप अपनी क्षमताओं का सही दिशा में विकास कर सकते हैं।

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