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फिट और एनर्जेटिक रहने के लिए पीएम मोदी करते हैं ये 5 काम

हमारे देश के पीएम और सबसे चर्चित नेताओं मे से एक नरेंद्र मोदी इस साल 68 साल के होने वाले हैं। इस उम्र में भी वो काम करने के मामले में आज के युवाओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उनकी खास फिटनेस और ऊर्जा से भरपूर व्यक्तित्व की चर्चा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि रूस जैसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भी करते हैं।

फिट और एनर्जेटिक रहने के लिए पीएम मोदी करते हैं ये 5 काम

हमारे देश के पीएम और सबसे चर्चित नेताओं मे से एक नरेंद्र मोदी इस साल 68 साल के होने वाले हैं। इस उम्र में भी वो काम करने के मामले में आज के युवाओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उनकी खास फिटनेस और ऊर्जा से भरपूर व्यक्तित्व की चर्चा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि रूस जैसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन भी करते हैं।

इसलिए आज हम पीएम नरेंद्र मोदी के 18 घंटे बिना थके काम करने की पॉजिटिव एनर्जी देने वाले स्रोत के बारे में बता रहे हैं। जिसे अपनाकर आप अपनी जिंदगी में हमेशा पॉजिटिव एनर्जी से चार्ज रह सकें।

पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स :

1.पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स (योगा) - पीएम मोदी की पॉजिटिव एनर्जी और फिटनेस का सबसे जरूरी सोर्स है,योगा। जी हां, वो रोज सुबह एक घंटा योग जरूर करते हैं। जिससे उन्हें पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

2.पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स (पंच तत्व साधना या प्राणायाम) - योगा की ही तरह नरेंद्र मोदी रोज सुबह प्रकृति के पांचों तत्वों वाले पंचतत्व प्राणायाम का अभ्यास करते हैं। जिसमें वो सूर्य नमस्कार,पृथ्वी पर नंगे पैर चलना इसी प्रकार वो अन्य तीन तत्व जल, वायु, आकाश की साधना करते हैं।

3.पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स(शाकाहारी भोजन) - पीएम नरेंद्र मोदी सदा शाकाहारी भोजन ही करना पसंद करते हैं। वो भी खासकर गुजराती भोजन।

4.पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स(उपवास) - पीएम मोदी को पॉजिटिव एनर्जी समय-समय पर किए जाने वाले उपवास के जरिए भी मिलती है। क्योंकि ये साइंस ने भी माना है कि अगर हम हफ्ते में या महीने में एक या 2 बार उपवास रखें तो इससे हमारे शरीर के अंग सुचारू रूप से काम करते हैं, जिससे हमें लगातार बिना थके लंबे वक्त तक काम कर सकते हैं।

5.पीएम मोदी के एनर्जी सोर्स(सकारात्मक सोच) - मोदी की एनर्जी का जरूरी सोर्स उनकी हमेशा रहने वाली सकारात्मक सोच। इस बात की पुष्टि शास्त्रों के साथ-साथ विज्ञान भी करता है कि जैसा हम सोचते हैं, उसी प्रकार हम ढल जाते हैं।

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