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इस एक पौधे को लगाने से बदल जाएगी घर की रंगत, जानें इसके फायदे

अपने गार्डन में रंग-बिरंगी छटा चाहती हैं, तो ग्लेडियोलस का पौधा जरूर लगाएं। मौजूदा मौसम इसे लगाने के लिए अनुकूल है। लेकिन इसे लगाने और देख-भाल का सही तरीका जानना जरूरी है।

इस एक पौधे को लगाने से बदल जाएगी घर की रंगत, जानें इसके फायदे

अपने गार्डन में रंग-बिरंगी छटा चाहती हैं, तो ग्लेडियोलस का पौधा जरूर लगाएं। मौजूदा मौसम इसे लगाने के लिए अनुकूल है। लेकिन इसे लगाने और देख-भाल का सही तरीका जानना जरूरी है। जानिए, कैसे उगाएं रंग-बिरंगे फूलों वाले ग्लेडियोलस के पौधे को।

गुलदस्ते में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले फूलों में ग्लेडियोलस नाम का फूल भी शामिल है। यह सफेद, लाल, गुलाबी, पीले, नारंगी, बैंगनी और हरे रंग में भी होता है। इसलिए इसे साज-सजावट के लिए आदर्श फूल माना जाता है।

इस फूल को तलवार लिली के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, इसकी पत्तियां तलवार के आकार की होती हैं, इसलिए इसका यह नाम पड़ा। बहरहाल, ग्लेडियोलस मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका का फूल है।

इसे उगाना बेहद सरल है, इसलिए अब कई अन्य देशों में भी उगाया जाने लगा है। अगर आप अपनी बगिया को ग्लेडियोलस फ्लॉवर से सजाना चाहती हैं, तो इसे उगाए जाने के सही तरीके के बारे में जानना जरूरी है।

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कैसे लगाएं

  • ग्लेडियोलस उगाने के लिए पांच से सात के समूह में एक ही रंग के फूल को उगाना बेहतर होता है। जब यह समूह में खिलते हैं, तो बहुत सुंदर लगते हैं।
  • आमतौर पर इन्हें बगीचे की क्यारियों के किनारे पर उगाया जाता है। वैसे आप इसे दूसरे फूलों के साथ भी लगा सकती हैं। इन्हें थोड़ी सी देख-रेख के साथ गमले में भी उगाया जा सकता है।
  • ग्लेडियोलस में प्याज के आकार के भूमिगत तने होते हैं। इन्हें मिट्टी में सीधे लगाया जाता है। इन्हें मिट्टी में कतारबद्ध तरीके से लगाना चाहिए।
  • कतारों में लगाने के बाद इन्हें सहारा देने के लिए बांस की खपच्ची लगानी चाहिए। इससे फूलों को काटने और जमीन के अंदर से इसके बल्ब निकालने में काफी सहूलियत रहती है।
  • ग्लेडियोलस के लिए बलुई-दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। लेकिन भारी मिट्टी में कंपोस्ट या अच्छी तरह तैयार कार्बनिक खाद मिला देने के बाद भी उसमें इसे उगा सकते हैं।
  • मिट्टी को तैयार करके बल्बों को इनके आकार के अनुसार रोपना चाहिए। एक ही पंक्ति के दो बल्बों के बीच की दूरी कम से कम 6 इंच होनी चाहिए। जब ग्लेडियोलस की पहली पत्ती मिट्टी से बाहर दिखाई दे, तो इसकी निराई करनी चाहिए।
  • ग्लेडियोलस को भी अच्छी तरह उगने के लिए अन्य पौधों की तरह पर्याप्त सूर्य का प्रकाश चाहिए। इसलिए जहां भी इसे लगाएं, वहां पर्याप्त रोशनी की जगह अवश्य हो।
  • ग्लेडियोलस को पानी की जरूरत ज्यादा होती है। लेकिन बल्ब रोपने के बाद पहली बार पानी तभी देना चाहिए, जब मिट्टी सूखने लगे।
  • ग्लेडियोलस के बल्बों को जमीन में रोपने का कोई निर्धारित समय तो नहीं है, लेकिन इन्हें ज्यादा गर्मी या कड़ाके की सर्दी में रोपना नहीं चाहिए।
  • रोपने के 60 से 120 दिनों के भीतर इनमें फूल आने शुरू हो जाते हैं।
  • ग्लेडियोलस के फूलों की कटाई उस समय करें, जब एक डंठल के सभी फूल खिल जाएं। अगर फूलों का रंग पीला होने लगे, तो समझें कि फूल मुरझा रहा है।
  • ऐसी स्थिति में इसकी ट्रिमिंग करना जरूरी है। इसके लिए प्रूनर (पौधों की छटाई करने वाला औजार) का इस्तेमाल कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि ट्रिमिंग यानी छटाई के दौरान इसके पत्ते न कट जाएं।
  • पत्तियों के कटने से ग्लेडियोलस का पूरा पौधा प्रभावित हो सकता है।

रखें ध्यान

  • ज्यादा तेज हवा के कारण या अपने ही भार से ग्लेडियोलस के पौधे तिरछे हो जाते हैं या गिर जाते हैं।
  • इसलिए हर पौधे के पास एक खपच्ची गाड़कर उसे एक धागे से बांध देना चाहिए। जब पौधा बड़ा हो जाए, तो इसकी खपच्चियों को निकाल देना चाहिए।
  • ग्लेडियोलस को कई तरह के कीटों और रोगों का खतरा रहता है। इससे बचने के लिए बड़े और स्वस्थ बल्बों का ही चुनाव करें।
  • इन पर अक्सर छोटे काले और पंखयुक्त थ्रिप्स कीट हमला करते हैं, जिनका आकार 1 मिलीमीटर के आस-पास होता है।
  • इनके पत्तियों पर लगने से उनमें बारीक लकीरें दिखने लगती हैं, जिसके कारण फूल बेरंग हो जाते हैं और उनका आकार बिगड़ जाता है और कलियों में पुष्प नहीं विकसित हो पाते हैं।
  • इनसे बचाव के लिए इनके बल्बों को रोपने से पूर्व इन पर कीटनाशक रसायनों का छिड़काव करना चाहिए।
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