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फ्रेंडशिप डे: जानिए क्या सोचते हैं लोग दोस्ती को लेकर

हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्यारा रिश्ता है दोस्ती

फ्रेंडशिप डे: जानिए क्या सोचते हैं लोग दोस्ती को लेकर
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नई दिल्ली. घर-परिवार के साथ ही दोस्त भी हमारे व्यक्तित्व के निर्माण और जीवन को संवारने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। हमारी हर खुशी में तो शामिल होते ही हैं, गम के क्षणों में आगे बढ़कर हमें सहारा भी देते हैं। हर सही कदम पर साथ और गलत कदम पर आगाह करने वाले दोस्त, हमारे जीवन को खुशहाल बनाते के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
हमारे जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्यारा रिश्ता होता है-दोस्ती का। इस रिश्ते को हर इंसान स्वयं बनाता है। यह रिश्ता हमारे जीवन को कई मायनों में प्रभावित करता है। सर गंगाराम हॉस्पिटल की सीनियर साइकोलॉजिस्ट डॉ. आरती आनंद बताती है दोस्ती के बारे में.... जानिए
व्यक्तित्व का निर्माण
निश्चित ही दोस्ती हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करने में बहुत बड़ा रोल निभाती है। बचपन से लेकर टीन एज और यंग एज तक जो दौर हमारी पर्सनालिटी को बनाने में एक शेप देने में इंपॉर्टेंट होता है, उसमें दोस्ती का बहुत प्रभाव पड़ता है। इससे हम अपने परिवार के सदस्यों से इतर समाज में लोगों से जुड़ना सीखते हैं। हममें एक कॉन्फिडेंस आता है। इससे हमें हमारी आइडेंटिटी का पता चलता है। खुद को और बेहतर बनाने के लिए हम प्रेरित होते हैं।
अगर हमारा कोई दोस्त पढ़ाई में तेज है या उसका सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा है या उसका डेÑसिंग सेंस अच्छा है या फिर वह अपने काम को स्मार्टली कर लेता है तो हम भी उससे प्रेरित होकर खुद को संवारने का प्रयास करते हैं। इस काम में हमारा दोस्त भी हमारी मदद करता है। दोस्ती हमें एक-दूसरे से सीखने को प्रेरित करती है। इस तरह दोस्त हमें अपनी पर्सनालिटी सुधारने में डायरेक्टली और इनडायरेक्टली दोनों तरह से मदद करते हैं। दोस्त की निगाह से हम खुद को बेहतर तरीके से पहचान पाते हैं।
कहने का मतलब है कि हम सब बचपन से लेकर जीवन के विभिन्न पड़ावों में जो कुछ भी सीखते हैं, जो हमारी पर्सनालिटी या नेचर बनता है, उसमें पैरेंटिंग और खुद के एक्सपीरियंसेस के साथ ही हमारी फ्रेंडशिप की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। कहा भी गया है कि हम जिन लोगों के बीच रहते हैं, जिनसे हमारी दोस्ती होती है, वही हमारी सोच को प्रभावित करते हैं और हम वैसे ही बनते जाते हैं।
गम के दौर में देते हैं संबल
दोस्त हमारी खुशियों में तो साथ रहते ही हैं, लेकिन जीवन के दुख भरे पलों में, किसी मुसीबत के क्षणों में, डिप्रेशन के दौर में उनकी भूमिका बहुत बड़ी हो जाती है। ऐसे समय में एक दोस्त ही होता है, जो हमें भरपूर मनोबल देता है। वह हमें उस दौर से बाहर निकलने, उसे सहने और फिर से सामान्य जीवन जीने के लिए प्रेरित कर हमें मानसिक संबल देता है। ऐसे दोस्तों की वजह से हमें भीतर से बल मिलता है। ऐसे गहरे दोस्त के प्रति हम आश्वस्त रहते हैं कि कैसा भी समय हो, मेरा दोस्त मेरे साथ जरूर रहेगा। एक बार बुलाने पर वह मेरे पास आ जाएगा और हर संभव मदद करेगा। ऐसा भरोसा और दोस्त को लेकर ऐसी सोच हमें संकट का सामना करने की ताकत देती है। कई बार तो जब हम अपनी फैमिली, रिलेटिव्स से दूर अंजान देश या स्थान पर रहते हैं तो वहां सबसे पहले फिजिकल, इमोशनल और इकोनॉमिकल सपोर्ट भी दोस्तों से ही मिलता है।
गहरी दोस्ती होती है लाजवाब
वैसे तो हमारे कई दोस्त हो सकते हैं। उनके साथ हंसी-खुशी और मस्ती भरे पल हम अकसर गुजारते हैं। लेकिन उनमें से एक-दो ऐसे होते हैं, जिन्हें हम अपना क्लोज, बेस्ट या गहरा दोस्त मानते हैं। गहरी दोस्ती हमारी इमोशनल बॉन्डिंग से बनती है। जब हमें बिल्कुल हमारे जैसी सोच का, हमें चाहने वाला कोई मिलता है तो उससे गहरी दोस्ती अपने आप हो जाती है। गहरी दोरती हमारी लाइफ को पॉजिटिवली मोटिवेट करने में बहुत इंपॉर्टेंट रोल निभाती है। ऐसे दोस्त बहुत कुछ कहे बगैर ही हमारी फीलिंग को समझ लेते हंै। ऐसे दोस्त की स्माइल, उसकी चुप्पी या उसके आंखों की भाषा भी हम समझ लेते हैं। वास्तव में गहरी दोस्ती एक-दूसरे के पूरक (सोल मेट) जैसे होते हैं। ऐसे गहरे दोस्त हमें हर कदम पर हर तरह से सपोर्ट और एनकरेज करते हैं। सच, गहरी दोस्ती लाजवाब होती है।
जो होते है गहरे दोस्त
गहरे दोस्त बनाने से नहीं बनते, वो अपने आप बन जाते हैं। उसका कोई ऐसा क्राइटेरिया नहीं होता है कि जिसके आधार पर हम तय कर लें कि कोई हमारा गहरा दोस्त बन सकता है या नहीं। गहरी दोस्ती का भाव पूरी तरह एक-दूसरे के बीच समझ और भरोसे पर टिका होता है। जब अपने किसी दोस्त के बारे में यह भरोसा हमें हो जाए कि चाहे कुछ भी हो वह मेरा अहित नहीं करेगा। हमेशा वह मेरा साथ देगा। वह अगर मुझसे नाराज भी होगा तो उसमें मेरा ही हित होगा।
मेरी किसी बात का बुरा नहीं मानेगा, तो वह गहरा दोस्त बन जाता है। यह अपने आप हो जाता है। तभी तो कभी भी लालची-दानी, मूर्ख-विद्वान या दो अहंकारी लोगों में गहरी दोस्ती नहीं हो पाती है। सच्चा गहरा दोस्त हमें कभी भी गलत रास्ते पर जाने नहीं देगा।हर सही काम का समर्थन करेगा तो गलत कामों का विरोध करेगा, क्योंकि हर हाल में वह हमारा हित चाहता है। कहने का सार यही है कि लाइफ में अच्छे, सच्चे और गहरे दोस्त बहुत कम मिलते हैं। इसलिए इन्हें संजो कर रखना चाहिए। क्योंकि दोस्ती हमारे जीवन को खुशनुमा बनाती है।
प्रस्तुति- विज्ञान भूषण
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