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आप भी करें अंधेरी दुनिया रोशन, जरुरतमंद को दान करें अपनी आंखे

नेत्रदान का तात्पर्य अधिकांश लोग आंख से लगाते हैं, लेकिन नेत्रदान में मात्र कॉर्निया ही दान किया जाता है।

आप भी करें अंधेरी दुनिया रोशन, जरुरतमंद को दान करें अपनी आंखे
नई दिल्ली. कल्पना कीजिए, जो लोग संसार की खूबसूरती को देखने में असमर्थ हैं, उन पर क्या बीतती होगी? भारत में ऐसे नेत्रहीनों की संख्या 50 लाख के पार है, जो सिर्फ कॉर्निया की खराबी की वजह से नहीं देख पाते। सालाना देखें तो कॉर्निया का प्रत्यारोपण के लिए केवल 20 हजार आॅपरेशन ही किए जाते हैं लेकिन इसकी तुलना में दृष्टिहीनों की संख्या में तीस हजार नए दृष्टिहीन जुड़ जाते हैं।
जरूरत और मांग के बीच आंकड़े नियमित रूप से बढ़ रहे हैं। लेकिन कुछ भ्रांतियों की वजह से लोग नेत्रदान यानी, आई डोनेशन से कतराते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि नेत्रदान से न तो अंग भंग होता है और न ही बॉडी में कोई कमी आती है। लोगों में नेत्रदान के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए प्रत्येक वर्ष आई डोनेशन फोर्टनाइट (नेत्रदान पक्ष) मनाया जाता है। तो क्यों ना अपनी आंखें दान कर, इस दुनिया से जाने के बाद भी हम किसी दृष्टिहीन की दुनिया को रोशन करें!
जानें सच्चाई
नेत्रदान का तात्पर्य अधिकांश लोग आंख से लगाते हैं, लेकिन नेत्रदान में मात्र कॉर्निया ही दान किया जाता है। मृत्यु के बाद यह कॉर्निया चिकित्सकों के द्वारा निकाल लिया जाता है, जो किसी जरूरतमंद को दे दिया जाता है। इसें ही नेत्रदान कहते हैं। कॉर्निया आंख की पुतली के ऊपर लगने वाली एक पारदर्शी फिल्म होती है। कॉर्निया की खराबी से जो लोग दृष्टिहीन हो जाते हैं, उनके लिए डोनर के द्वारा दी गई कॉर्निया से इलाज संभव हो जाता है। कॉर्निया में खराबी जन्मजात या किसी गंभीर बीमारी या पोषक तत्वों की कमी की वजह से भी हो सकती है।
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