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अनचाहे गर्भ से बचने के लिए बेहतर उपाय है कॉपर-टी, जानें इसके बारे में सब कुछ

आमतौर पर महिलाएं नियमित गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, जिससे गर्भ न ठहरे। लेकिन इन गोलियों के नियमित सेवन के साइडइफेक्ट्स भी होते हैं। ऐसे में अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए कॉपर-टी लगवाना एक बेहतरीन विकल्प है।

अनचाहे गर्भ से बचने के लिए बेहतर उपाय है कॉपर-टी, जानें इसके बारे में सब कुछ

आमतौर पर महिलाएं नियमित गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती हैं, जिससे गर्भ न ठहरे। लेकिन इन गोलियों के नियमित सेवन के साइडइफेक्ट्स भी होते हैं। ऐसे में अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए कॉपर-टी लगवाना एक बेहतरीन विकल्प है। गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. याचना ग्रोवर कॉपर-टी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां दे रही हैं।

अनचाहा गर्भ किसी भी महिला के लिए मानसिक तनाव पैदा करता है। इससे बचाव के लिए महिलाएं अलग-अलग तरह के निरोध उपाय अपनाती हैं।

लेकिन ज्यादातर निरोध उपाय लंबे समय तक उपयोग में लाना आसन नहीं होता है। ऐसे में कॉपर टी, गर्भनिरोध के लिए लंबे समय तक इस्तेमाल में आने वाला कारगर उपाय है। लेकिन इसे लगवाने से पहले स्त्री रोग विषेशज्ञ से संपर्क करना जरूरी है।

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क्या है कॉपर-टी

कॉपर-टी गर्भाशय के भीतर स्थापित किया जाने वाला एक छोटा सा उपकरण है, जिसे अंतरागर्भाशयी गर्भनिरोधक या आईयूडी कहा जाता है। इसे बहुत सुरक्षित, सस्ता और प्रभावी माना गया है।

यह पांच वर्षों के लिए गर्भनिरोध संबंधी सुरक्षा प्रदान करती है। ये उपकरण आकार में बहुत छोटे होते हैं और प्लास्टिक के बने, कॉपर (तांबा) में लिपटे अंग्रेजी के टी अक्षर के आकार में आते हैं। भारत में आईयूडी, कॉपर-टी के नाम से बाजार में बिकती है।

कॉपर-टी के प्रकार

बाजार में कई प्रकार के कॉपर-टी उपलब्ध हैं। उनमें दो मुख्य प्रकार के आईयूडी हैं-गैर हार्मोनल कॉपर-टी आईयूडी और हार्मोनल इंट्रॉब्ररिन डिवाइस आईयूडी।

गैर-हार्मोनिक कॉपर-टी शरीर में कोई हार्मोन नहीं छोड़ती और इसे तांबे और प्लास्टिक के साथ बनाया जाता है। कॉपर से निकलने वाले आयन, शुक्राणु को मारते हैं, उसे अंडाणु तक पहुंचने और निषेचन से रोकने का काम करते हैं।

जैसे ही शरीर में इसे लगाया जाता है, तब से यह गर्भावस्था को रोकना शुरू कर देती है। एक बार लगने पर, यह 5 या 10 साल तक के लिए प्रभावी होती है।

हार्मोनल इंट्रॉब्ररिन डिवाइस आईयूडी में प्रोजेस्टिन लेवोनोर्जेस्ट्रेल होता है। हार्मोनल आईयूडी को काम शुरू करने के लिए एक सप्ताह का समय लग सकता है।

इसलिए आपको अपने डॉक्टर से पूछना चाहिए कि अगर आपको यौन संबंध रखने के लिए इंतजार करना चाहिए या इस बीच में बैकअप गर्भनिरोधक पद्धति का उपयोग करना चाहिए। हार्मोनल आईयूडी 3 से 5 वर्षों के लिए प्रभावी है।

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क्या होते हैं प्रभाव

एक बार कॉपर-टी गर्भाशय में स्थापित हो जाने पर यह पांच से दस साल तक सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि यह कॉपर-टी के निर्माण की प्रक्रिया पर निर्भर करता है क्योंकि कुछ उपकरण केवल पांच वर्षों के लिए सुरक्षा प्रदान करते हैं।

मासिक धर्म के बाद 5 से 7 दिन के बीच कॉपर-टी लगाई जाती है। कॉपर-टी की सफलता दर 98 प्रतिशत है। यह डिवाइस इंटरनल पार्ट के काफी अंदर लगाई जाती है, जिससे शारीरिक संबंध स्थापित करते हुए यह हस्तक्षेप नहीं करती।

इसके उपयोग से उम्र से जुड़ा कोई जोखिम भी नहीं है। इसके अलावा जब भी महिला को यह लगे कि उसे गर्भाधारण की आवश्यकता है तो किसी विशेषज्ञ के द्वारा इस उपकरण को साधारण प्रक्रिया द्वारा निकलवाया जा सकता है। डिवाइस निकाले जाने के बाद महिला की फर्टिलिटी तुरंत वापस आ जाती है।

साइड इफेक्ट्स

कॉपर-टी लगवाने के बाद कुछ महिलाएं असमय रक्तस्राव की शिकायत करती हैं। यह अकसर शुरुआत के महीनों में होता है। कुछ महिलाओं में पीरियड्स के समय होने वाले दर्द के समान ही दर्द होता है।

हालांकि यह दर्द पीरियड्स के दर्द से अलग होता है। असमय रक्तस्राव कुछ दिनों में रुक जाता है और दर्द के लिए दर्दनाशक दवाएं ली जा सकती हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं को कॉपर के प्रति एलर्जी होती है, उनके इंटरनल पार्ट्स में दाने पड़ सकते हैं और खुजली हो सकती है।

इस स्थिति में उपकरण को हटाना ही बेहतर होता है। ऐसी स्थिति में महिला को विभिन्न प्रकार के दूसरे उपलब्ध गर्भनिरोधकों के बारे में सलाह लेनी चाहिए।

कभी-कभी महिलाओं में उपकरण को लगाते समय या बाद में यह स्वतः निकल जाता है। ऐसा उपकरण के लगाने के शुरुआती महीनों में, शिशु जन्म के तुरंत बाद लगाने पर या फिर बिना गर्भधारण के लगाए जाने पर होता है।

उपकरण लगाते समय गर्भाशय में कटाव या छेद होने के मामले भी देखे गए हैं। यह भी देखा गया है कि उपकरण गर्भाशय की दीवार में छेद कर देता है, जिससे आंतरिक घाव या रक्तस्राव होने लगता है। अगर उपकरण को तुरंत न निकाला जाए तो इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

तब रहें कॉपर-टी से दूर

यह विकल्प उन महिलाओं के लिए है, जिन्होंने हाल ही में नवजात शिशु को जन्म दिया हो। लेकिन उन महिलाओं को कॉपर-टी नहीं लगवाना चाहिए जो गर्भवती हैं, जिन्हें गर्भाशय में कोई रोग हो, योनि से असामान्य खून जाता हो, यौन संचारित रोग (एसटीडी) हो, पेल्विस में सूजन हो, पीरियड्स के समय बहुत दर्द होता हो, ब्लड की कमी हो और एक्टोपिक प्रेगनेंसी हुई हो।

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कैसे लगती है कॉपर-टी

कॉपर-टी के सिरों को मोड़कर महिला के गर्भाशय में प्रवेश कराया जाता है जिसमें एक पतली नली बाहर की ओर होती है। एक बार स्थापित हो जाने पर कॉपर-टी शुक्राणुनाशक के रूप में प्रभावी रूप से कार्य करने लगती है।

कॉपर और प्लास्टिक से बना यह छोटा सा यंत्र गर्भनिरोधक उपकरण के रूप में कार्य करने लगता है। इसका आकार ऐसा इसलिए चुना गया है क्योंकि यह गर्भाशय के आस-पास के क्षेत्र में लग जाता है और वर्षों तक अपनी जगह पर टिका रहता है।

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