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पिता बनने के बाद पुरुषों में आते हैं ये 5 बदलाव,जानें वजह...

आमतौर पर माना जाता है कि जब एक लड़की या महिला मां बनती है तो उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है, इसका मतलब वो हर काम बस अपने बच्चे से जोड़कर या ध्यान में रख करने लगती है। उसकी सुबह अपने बच्चे से होती है और उसी पर ही रात खत्म हो जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चे के जन्म के बाद एक पुरूष में भी बदलाव आते हैं। उसकी जिंदगी भी पहले जैसी नहीं रह जाती, पर हमारे समाज में कभी इस और ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया गया।

पिता बनने के बाद पुरुषों में आते हैं ये  5 बदलाव,जानें वजह...
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आमतौर पर माना जाता है कि जब एक लड़की या महिला मां बनती है तो उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल जाती है, इसका मतलब वो हर काम बस अपने बच्चे से जोड़कर या ध्यान में रख करने लगती है। उसकी सुबह अपने बच्चे से होती है और उसी पर ही रात खत्म हो जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चे के जन्म के बाद एक पुरूष में भी बदलाव आते हैं। उसकी जिंदगी भी पहले जैसी नहीं रह जाती, पर हमारे समाज में कभी इस और ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया गया।

अक्सर देखा गया है कि पिता बनने के बाद पुरूषों में कुछ मानसिक और व्यवहारिक बदलाव आ जाते हैं। उनमें ये बदलाव खुद को हमेशा एक सबसे अच्छे पिता साबित करने के लिए आते है। इसलिए आज हम आपको पिता बनने के बाद पुरूषों में आने वाले कुछ खास बदलावों के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बाद आप भी उनके इन बदलावों को समझ सकें और उनकी प्रशंसा कर सकें।

पिता बनने के बाद पुरुषों में आते हैं ये 5 बदलाव

1.बुरी आदतें छोड़ने की करते हैं कोशिश

जब भी कोई पुरूष पिता बनता है, तो वो अपने बच्चे के भविष्य के बारे में सोचते हुए अपनी बुरी आदतों को छोड़ने की कोशश शुरू कर देते हैं। एक शोध के मुताबिक पिता बनने के बाद अक्सर पुरूष धूम्रपान, शराब और अन्य बुरी आदतों को छोड़ने की कोशिशों को पहले के मुकाबले बढ़ा देते हैं।

दरअसल बुरी आदतों का अपराधबोध होने लगता है, साथ ही व्यक्ति को शिशु या बच्चे की जिम्मेदारी का एहसास होने लगता है। यही नहीं, कई लोग तो शिशु के जन्म को बाद अपनी गलत आदतें छोड़ने में कामयाब हो जाते हैं।

2. जिम्मेदारियों को करते हैं बैलेंस

आज के दौर में पुरूष ऑफिस के साथ साथ घर के कामों में भी महिलाओं का हाथ बंटाने की पूरी कोशिश करते हैं। वो पिता बनने के बाद अपने बच्चे और परिवार के साथ समय बिताने के लिए हर छोटे -बड़े काम को करने के लिए खुद को पहले से ही मेंटली तैयार करने लगते हैं। यही नहीं, कई बार बच्चे के साथ रहने के लिए ऑफिस के कामों को भी घर से करने लगते हैं।

3.शिशु का ख्याल रखने की चिंता

जब भी कोई पुरूष पहली बार पिता बनता है तो वो काफी वक्त पहले से ही खुद को बदलने की ट्रेनिमग शुरू कर देते हैं। वो शिशु से जुड़ी हर बात को जानने में दिलचस्पी लेने लगते हैं। वो अक्सर शिशु का ख्याल रखने में आने वाली परेशानी के बारे में सोचते रहते हैं, कि वो बच्चे को सही ढंग से पकड़ सकेगा या नहीं, उसके डाइपर कैसे बदल पायेगा, उसे कैसे स्कूल में पढ़ाएगा, वो कितना बुद्धिमान होगा और उसे क्या-क्या सिखाएगा आदि। हालांकि यही चिंता पिता को जिम्मेदार और समझदार बनाती है।

4.आर्थिक समस्याओं का डर

भारत में आज भी परिवारों की आर्थिक जिम्मेदारी पुरूष ही उठाते हैं। ऐसे में जब भी कोई पुरूष पिता बनता है तो वो सबसे पहले परिवार की आर्थिक जरूरतों के बारे में सोचने लगता है कि क्या वो उस जिम्मेदारी को आसानी से उठा पायेगा। इसके साथ ही शिशु के भविष्य को लेकर भी परेशान रहने लगते हैं।

5.शारीरिक संबंध में कम रूचि

कुछ शोधों के मुताबिक पिता बनने के बाद अक्सर पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन (कामभावना को बढ़ने वाला हार्मोन) के स्तर में कमी आ जाती है। जिसकी वजह से पुरुषों में शारीरिक संबंधों को लेकर रुचि कम होने लगती है। यही नहीं, शिशु के जन्म के बाद माता-पिता दोनों की ही प्राथमिकता बदल जाती है और वो शिशु का ख्याल रखने में ही व्यस्त रहने लगते हैं। ऐसे में शारीरिक संबंध के बारे में रूचि कम होना कई बार स्वाभाविक और परिस्थिति पर निर्भर होने लगता है।

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