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Doctor Advice : बच्चों में मोटापा न करें नजरअंदाज, इन तरीकों से करें कम

मोटापा किसी भी एज ग्रुप के व्यक्ति के लिए सही नहीं है। बच्चों के लिए तो यह और भी घातक है। बच्चा मोटापे का शिकार न हो इसके लिए उसकी लाइफस्टाइल और डाइट का ख्याल रखना जरूरी है।

Doctor Advice : बच्चों में मोटापा न करें नजरअंदाज, इन तरीकों से करें कम

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा गोल-मटोल और हृष्ट-पुष्ट हो। गोल-मटोल बच्चा भले दिखने में प्यारा लगे, लेकिन उसका मोटापा और उसके शरीर में जमा हो रही चर्बी, कम उम्र में ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग जैसे कई गंभीर रोगों से ग्रस्त होने का कारण बन सकती है। ऐसे में बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर पैरेंट्स को कॉन्शस रहना चाहिए।

मोटापे के कारण

बच्चों मे मोटापा आमतौर पर उनके खान-पान की गलत आदतों के कारण बढ़ता है। छोटे बच्चे स्नैक्स, जंक फूड, फास्ट फूड खाना ज्यादा पसंद करते हैं, जिनमें कैलोरी बहुत ज्यादा होती है। इनके अलावा केक, पेस्ट्री और मिठाइयों जैसे अधिक कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से भी मोटापा बढ़ता है।

बच्चों में मोटापे का एक और कारण है, शारीरिक रूप से सक्रिय न होना। आजकल ज्यादातर बच्चे किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि में शामिल नहीं होते। इसके बजाय वे वीडियो गेम खेलना, टीवी देखना, मोबाइल में गेम खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। इस वजह से उनमें मोटापा बढ़ने लगता है।

हालांकि कुछ बच्चों में मोटापा आनुवांशिक भी होता है। बच्चे के माता-पिता का वजन ज्यादा हो तो बच्चों में भी मोटापा होने की संभावना बढ़ जाती है।

मोटापे का स्वास्थ्य पर असर

मोटे बच्चों को वयस्क होने पर मोटापे के दुष्प्रभावों को झेलना पड़ता है। मोटे बच्चों को कम उम्र में ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, नींद न आने की समस्या, कैंसर, यकृत रोग, लड़कियों में मासिक धर्म का जल्दी शुरू होना, त्वचा में संक्रमण, जोड़ों और हड्डियों की समस्याएं, अस्थमा और श्वसन से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

इसी तरह मोटापा बच्चों के बाल मन पर भी असर डालता है। दरअसल, दूसरे बच्चे, मोटे बच्चों को चिढ़ाते हैं, इससे वे अपने शारीरिक गठन की वजह से लो कॉन्फिडेंट हो जाते हैं। ऐसे बच्चे अकेलेपन की समस्या से घिर जाते हैं। मोटे बच्चे दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने में भी संकोच करते हैं।

बचाव के उपाय

1 .बच्चों की मोटापे की समस्या दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है, उन्हें शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए मोटिवेट करना। बच्चे को ज्यादा से ज्यादा स्पोर्ट्स, फिजिकल एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए कहें। इसके अलावा पैरेंट्स बच्चों की रोजमर्रा की गतिविधियों में कुछ सरल शारीरिक गतिविधियों को भी शामिल कर सकते हैं।

2. अपने बच्चे में आउटडोर गेम का शौक पैदा करें। गेम्स के अलावा उसे डांस में हिस्सा लेने के लिए भी कह सकती हैं। इससे भी मोटापे को बीट किया जा सकता है।

3. टीवी के सामने सारा दिन बैठे रहने वाला बच्चा भी कम सक्रिय हो जाता है। यह मोटापे की एक बड़ी वजह है, इसके लिए जरूरी है कि बच्चे का टीवी देखने का समय निश्चित करें।

4. बच्चे को मोबाइल न दें। अपना मोबाइल भी उससे दूर रखें। इंडोर गैजेट्स से भी बच्चों की दूरी बनाए रखें।

5. बच्चे के मोटापे को कम करने और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भरपूर नींद भी जरूरी है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि बच्चा भरपूर नींद ले। लंबे समय तक या बहुत कम समय तक सोना बच्चे को मोटा बना सकता है।

सही हो खानपान

1. बच्चे को कोल्ड ड्रिंक से बिल्कुल दूर रखें। इसी तरह शुगर ड्रिंक, फ्रूट ड्रिंक पीने से भी बच्चे को दूर करें।

2. बच्चे को जंक फूड, फास्ट फूड से दूर रखें और बच्चे को फाइबर युक्त आहार दें। फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है। इससे अधिक कैलोरी सेवन के बिना लंबे समय तक पेट भरा रखता है। राजमा, ब्रोकली, मटर, नाशपाती, साबुत अनाज का पास्ता, ओटमील फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।

3. सफेद चावल, घी, मैदा और चीनी से परहेज करें, क्योंकि इनमें ज्यादा मात्रा में वसा पाई जाती है।

4. बच्चे को स्कूल के लिए लंच घर से पैक करके दें। इससे वह बाहर का खाना खाने से बचेगा। कोशिश करें कि आप जो बना रही हैं, वह बच्चे को स्वादिष्ट भी लगे, तभी वह बाहर का खाना खाने से बचेगा।

5. बच्चे को नाश्ता जरूर कराएं, क्योंकि नाश्ता दिन का सबसे अहम आहार होता है। नाश्ता करने से उसमें एकाग्रता बढ़ती है और वह स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान लगा पाता है।

बैरिएट्रिक सर्जरी है आखिरी विकल्प

कुछ बच्चे इतने मोटे होते हैं, उन पर सामान्य उपाय कारगर नहीं होते हैं। ऐसे में अंतिम विकल्प के तौर पर मोटे बच्चों की बौरिएट्रिक सर्जरी करवाई जा सकती है। इस सर्जरी के बाद तेजी से वजन कम होता है। यह सर्जरी तीन तरह की होती है-लैप बैंड, स्लीव गैस्ट्रोकटोमी और गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी। ये सर्जरी लेप्रोस्कोपिक तरीके से की जाती है।

लैप बैंड सर्जरी के बाद खाने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। स्लीव गैस्ट्रोक्टोमी के बाद डेढ़ से दो किलो वजन हर हफ्ते कम होना शुरू हो जाता है। वहीं गैस्ट्रिक बाइपास में अमाशय को बांटकर एक शेल्फ, गेंद के आकार का बनाकर छोड़ दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद खाना देर से पचता है। भूख बढ़ाने वाला हार्मोन भी बनना बंद हो जाता है।

इससे शरीर में जमा फैट एनर्जी के रूप में खर्च होने लगता है और तेजी से वजन कम होता है। लेकिन छोटे बच्चों की बैरिएट्रिक सर्जरी करवाना ठीक नहीं है। इसके बाद कई चीजों का खयाल रखना पड़ता है, जिसे बच्चे आसानी से फॉलो नहीं कर पाते। इसमें डाइट सबसे अहम है, इसलिए बच्चों का वजन कम करने के लिए पहले सर्जरी रहित उपायों पर ही जोर देना चाहिए।

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