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Doctor Advice: बारिश में इन 5 बीमारियों से बचने के अचूक उपाय

बारिश के मौसम में तमाम तरह के बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से ग्रो करते हैं। इसी वजह से ये खाद्य पदार्थों को आसानी से संक्रमित कर देते हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही बरतने से आप भी कई तरह की डाइजेशन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं। मानसून में कौन सी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में डिटेल में जानिए...

Doctor Advice: बारिश में इन 5 बीमारियों से बचने के अचूक उपाय

बरसात के मौसम में शरीर में कई तरह के संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है। मौसम में बदलाव के साथ इम्यून तंत्र और पाचन तंत्र में बदलाव होने लगता है।

बरसात में पाचन तंत्र से संबंधित कईं समस्याएं हो सकती हैं, इस दौरान लोगों को अपच से लेकर फूड प्वॉयजनिंग, डायरिया जैसी कईं स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बरसात में सेहतमंद रहने के लिए आपको विशेष सावधानियां रखनी चाहिए, इसके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इस मौसम में पाचन तंत्र से संबंधित कौन-कौन सी समस्याएं अधिक होती हैं और इनसे कैसे निपटा जाए।

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गैस्ट्रोएंट्राइटिस

गैस्ट्रोएंट्राइटिस या आंत्रशोथ आमतौर पर बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण से होता है। इसके कारण पेट की अंदरूनी परत में जलन होती है और वो सूज जाती है। संक्रमित व्यक्ति को दस्त और उल्टी होने लगती है। यह संक्रमण ऐसे भोजन या पानी के सेवन से होता है, जो ई. कोलाई, सालमोनेला, एच. पाइलोरी, नोरो वायरस, रोटा वायरस आदि से संक्रमित होता है। इसे स्टमक फ्लू भी कहा जाता है। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति बिना किसी स्वास्थ्य जटिलता के कुछ ही दिनों में इससे ठीक हो जाता है। लेकिन बच्चे, बुजुर्ग और ऐसे वयस्क, जिनका इम्यून तंत्र कमजोर होता है, गैस्ट्रोएंट्राइटिस उनके लिए घातक हो सकता है।

पाचन तंत्र कमजोर

मानसून में जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। बरसात के पानी और कीचड़ से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहते हैं, जिससे शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। यह भी पाचन तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इससे बचने के लिए हल्के, संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें। शारीरिक रूप से सक्रिय रहें, बारिश के कारण अगर आप टहलने नहीं जा पा रहे हैं या जिम जाने में परेशानी हो रही है तो घर पर ही वर्कआउट करें।

अपच

बरसात में पाचक एंजाइमों की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है, इससे भी खाना ठीक प्रकार से नहीं पचता। बरसात में तैलीय, मसालेदार भोजन और कैफीन का सेवन भी बढ़ जाता है, इससे भी अपच की समस्या हो जाती है। नम मौसम में सूक्ष्माजीव अधिक मात्रा में पनपते हैं, इनसे होने वाले संक्रमण से भी अपच की समस्या अधिक होती है।

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डायरिया

डायरिया एक खाद्य और जलजनित रोग है। ये दूषित खाद्य पदार्थों और जल के सेवन से होता है। वैसे तो ये किसी को कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात में इनके मामले काफी बढ़ जाते हैं।

दस्त लगना इसका सबसे प्रमुख लक्षण है। पेट में दर्द और मरोड़, बुखार, मल में रक्त आना, पेट फूलना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। फूड प्वॉयजनिंग के कारण भी डायरिया हो जाता है।

फूड प्वॉयजनिंग

फूड प्वॉयजनिंग तब होती है, जब हम ऐसे भोजन का सेवन करते हैं, जो बैक्टीरिया, वायरस, दूसरे रोगाणुओं या विषैले तत्वों से संक्रमित होता है। बरसात के मौसम में आद्रता और कम तापमान के कारण रोगाणुओं को पनपने के लिए एक उपयुक्त वातावरण मिल जाता है।

इसके अलावा बरसात में कीचड़ और कचरे के कारण जगह-जगह गंदगी फैल जाती है, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि बरसात में फूड प्वॉयजनिंग के मामले भी बढ़ जाते हैं। इस मौसम में बाहर का बना हुआ खाना खाने या फिर अधिक ठंडे पदार्थों के सेवन से भी फूड प्वॉंयजनिंग की आशंका बढ़ जाती है।

रखें ध्यान

बरसात में पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और बीमारियों से बचने के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें:

  • संतुलित, पोषक और सुपाच्य भोजन का सेवन करें।
  • कच्चे खाद्य पदार्थ नमी को बहुत शीघ्रता से अवशोषित कर लेते हैं इसलिए ये बैक्टीरिया के पनपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं। इसलिए यही बेहतर रहेगा कि कच्ची सब्जियां इस मौसम में न खाएं; सलाद के रूप में भी नहीं।
  • इस मौसम में फफूंद जल्दी पनपती हैं इसलिए ब्रेड-पाव आदि खाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें कहीं फफूंद वगैरह तो नहीं लगी है।
  • सड़क किनारे लगी रेहड़ियों और ढाबों पर न खाएं क्योंकि इस तरह के भोजन से संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
  • ऐसा खाना खाएं, जिससे एसिडिटी कम से कम हो।
  • बारिश के मौसम में मांस, मछली और मीट खाने से फूड प्वॉयजनिंग की आशंका बढ़ जाती है। इस मौसम में कच्चा अंडा और मशरूम खाने से भी बचें।
  • बरसात में तले हुए भोजन को खाने का मन तो बहुत करता है लेकिन उनसे दूर रहना ही बेहतर है क्योंकि इससे पाचन क्षमता कम होती है।
  • कम मसाले और कम तेल वाला भोजन पाचन समस्याओं से बचाता है।
  • अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ जैसे अचार, सॉस आदि न खाएं या कम खाएं क्योंकि यह शरीर में पानी को रोकते हैं और इससे पेट फूलता है।
  • फलों और सब्जियों के जूस का भी कम मात्रा में सेवन करें।
  • ओवर ईटिंग से बचें और तभी खाएं जब आप भूखा महसूस करें।
  • ठंडे और कच्चे भोजन की बजाय गर्म भोजन और पका हुआ खाना खाएं।
  • फिल्टर किए हुए या उबले पानी का सेवन करें।
  • एक्सपाइरी डेट के बाद किसी प्रोडक्ट को न खाएं।

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