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सावधान! जान-पहचान के मेडिकल स्टोर से न लें दवाइयां, जा सकती है जान

हममें से अधिकतर लोग मामूली बीमारी होने पर अपने मन से, मेडिकल स्टोर से या नॉनक्वालिफाइड डॉक्टर से दवा ले लेते हैं। इससे कई बार गलत कॉम्बिनेशन वाली या खतरनाक साइडइफेक्ट वाली दवा हम खा लेते हैं। ऐसा करना हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।

सावधान! जान-पहचान के मेडिकल स्टोर से न लें दवाइयां, जा सकती है जान

हममें से अधिकतर लोग मामूली बीमारी होने पर अपने मन से, मेडिकल स्टोर से या नॉनक्वालिफाइड डॉक्टर से दवा ले लेते हैं। इससे कई बार गलत कॉम्बिनेशन वाली या खतरनाक साइडइफेक्ट वाली दवा हम खा लेते हैं।

ऐसा करना हमारे लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि कोई भी दवा लेने से पहले पूरी तरह अलर्ट रहा जाए। इस बारे में स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के यूजफुल सजेशंस दे रहे हैं।

केस-1

भास्कर (35 वर्ष) कमर दर्द से परेशान था। उसने एक परिचित मेडिकल स्टोर वाले को अपनी समस्या बताई। उसने कुछ दवाएं खाने को दीं, जिनमें से एक दवा में नीमसुलाइड था। (उन्नत देशों में लिवर टॉक्सिन के कारण प्रतिबंधित), दूसरी दवा में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाने वाला कंपाउंड था (विदेशों में प्रतिबंधित), तीसरी दवा, जो एक पेनकिलर थी, उसे आमतौर पर उपरोक्त दवाओं के साथ नहीं दिया जाता (रक्तपात और लिवर फैल्योर के डर से), चौथी दवा एक एंटी बैक्टीरियल थी (जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ने के कारण विदेशों में नहीं दी जाती है) और पांचवी दवा विटामिन बी कॉम्प्लेक्स थी। ये दवाएं पूरी तरह पेशेंट और दुकानदार की लापरवाही का नतीजा था।

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केस-2

नन्हा कार्तिक अभी साल भर का पूरा नहीं हुआ है। बुखार और डायरिया से ग्रस्त हुआ तो उसकी मम्मी अपने मुहल्ले के एक नॉन क्वालिफाइड प्रैक्टिसनर डॉक्टर के पास ले गई। उसने नीमसुलाइड और पैरासिटामोल के कॉम्बिनेशन वाली दवा दी (भारत के अलावा यह कॉम्बिनेशन दुनिया में कहीं स्वीकार्य नहीं)।

इतना ही नहीं उस डॉक्टर ने नाइट्राजोक्सानाइड, ओफ्लोक्सासिन और ओंडांसीटेरॉन के कॉम्बीनेशन वाली दवा भी दे दी। ध्यान दें, ओफ्लोक्सासिन 6 साल से कम के मरीजों के लिए नहीं होती, इससे बहुत क्षति हो सकती है। ओंडांसीटेरॉन सिर्फ कैंसर के रोगियों को (रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी के वक्त) जी मिचलाने और वमन से बचाने के लिए दी जाती है।

ये मात्र दो उदाहरण हैं लापरवाही के, आपको ऐसे सैकड़ों उदाहरण मिल जाएंगे, जिनमें गलत कॉम्बिनेशन वाली दो दवाएं मरीज लेते हैं। कई बार इसके साथ कोई आयुर्वेदिक दवा, दो पेनकिलर और नुकसानदायक दवाएं मरीजों को प्रिस्क्राइब कर दी जाती हैं।

जरूरी है सही विश्लेषण

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की कोलकाता शाखा के सचिव डॉ. अमित अग्रवाल कुछ डॉक्टर्स के इस लापरवाही पूर्ण रवैए से बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि पेशेंट को कभी अपने मन से या मेडिकल स्टोर वाले से पूछकर दवा नहीं लेनी चाहिए।

डॉक्टरों को भी सही ढंग से रोग का विश्लेषण करके, जरूरी टेस्ट की रिपोर्ट देखने के बाद ही एंटीबायोटिक लेने की सलाह देनी चाहिए। दर्दनिवारक दवाओं का भी सीमित एवं बेहद जरूरी होने पर ही प्रयोग करवाना चाहिए।

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हिट या मिस का फार्मूला

कोलकाता के रवींद्रनाथ टैगोर मेडिकल इंस्टिट्यूट के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ.अरिंदम विश्वास कहते हैं, ‘आजकल कुछ डॉक्टर हिट या मिस वाला फार्मूला अपना रहे हैं और एक साथ कई दवाओं का प्रयोग यह सोचकर कर रहे हैं कि एक नहीं तो दूसरी दवा तो काम करेगी ही। जबकि उनको अपने मरीज की सेहत और बजट के लिहाज से इस प्रवृत्ति से बचना चाहिए।’

कई लोग हैं जिम्मेदार

डॉ. विश्वास के अनुसार इस प्रवृत्ति के लिए डॉक्टर, सरकार-शासन की लापरवाही और खुद मरीज तीनों दोषी होते हैं। सरकार और शासन को विदेशों में प्रतिबंधित दवाओं को यहां खुले आम बेचने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

वर्तमान में कई ऐसी दवाएं भारत में बेची जा रही हैं, जो दुनिया भर में प्रतिबंधित हैं। सैकड़ों दवाएं ऐसी बिक रही हैं, जो नुकसानदायक कॉम्बिनेशन वाली हैं। दूसरी ओर कुछ डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं और मरीज भी इन चीजों के प्रति जागरूक नहीं रहते हैं।

क्या करें आप

इस बारे में डॉ. अमित कहते हैं, ‘अपने चिकित्सक से प्रिसक्रिप्शन मिलने पर उसे गौर से देखें। उन्होंने जो दवाएं लिखी हैं, उनके बारे में जान लें कि कौन सी दवा किस काम की है। उनसे रोग के बारे में भी पर्चे पर लिखने का अनुरोध करें। डॉक्टर जो जांच करवाने को कहें, उन्हें जरूर करवा लें।

लेकिन आपको लगे कि दवाओं की संख्या ज्यादा है या कॉम्बिनेशन वाली दवाएं लिखी गई हैं तो सेकेंड ओपिनियन लेने में ना हिचकें। प्रतिबंधित दवाओं की जानकारी अपने किसी परिचित डॉक्टर के माध्यम से अवश्य प्राप्त करें। आपको अपनी सेहत के लिए जागरूक होना चाहिए।’

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दवा लेने के सही तरीके

  • आपका नियमित डॉक्टर, आपकी फैमिली हिस्ट्री और मेडिकल कंडीशन से काफी हद तक वाकिफ होता है।
  • इसलिए पहली ओपिनियन उन्हीं से लें, लेकिन अगर किसी नए डॉक्टर के पास जा रहे हैं तो उन्हें आपकी मेडिकल हिस्ट्री और उपयोगी हो रही दवाओं की जानकारी अवश्य दें। बेहतर होगी पिछले प्रिसक्रिप्शन उन्हें दिखा दें।
  • अपने मन से पुराने प्रिसक्रिप्शन के आधार पर दवाएं न लें। कई दवाएं लक्षणों और तात्कालिक इलाज के हिसाब से दी जाती हैं।
  • किसी दवा को लेने पर पेट खराब हो जाए, स्किन पर रैशेज या सूजन आ जाए, तो दवा बंद करके चिकित्सक से मिलें।
  • दवा खाली पेट लेनी है या खाना खाकर, इस बात की जानकारी जरूर लें।
  • दवा खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट जरूर देख लें। एक्सपायर ना हुई हो लेकिन दवाई पिघली हुई, बदशक्ल या बदरंग लग रही है तो भी उस दवा को न लें और तुरंत फेंक दें।
  • कभी भी मेडिकल स्टोर वाले से पूछकर या नॉनक्वालिफाइड डॉक्टर से पूछकर कोई दवा ना खाएं।

इनसे बचें

कई बार देखा जाता है कि कुछ मरीज, विशेष रूप से बच्चे या बुजुर्ग जब टैबलेट या कैपसूल लेने में दिक्कत महसूस करते हैं, तो वे खुद या उनके परिजन टैबलेट को चूरा कर देते हैं या कैपसूल खोलकर उसके दाने या पावडर निकालकर किसी तरल या चीज में मिलाकर खा लेते हैं।

कुछ लोग टैबलेट को चूसने या चबाने लगते हैं औऱ उसके टुकड़े कर के निगलते हैं। लेकिन ऐसा करना कई मामलों में सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कई पिल्स धीरे धीरे घुलकर एक खास समय पर, खास स्पीड से, विशेष लोकेशन पर अपना असर छोड़ती हैं, जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जो दवाएं तुरंत असर के लिए होती हैं, वे पेट में जाकर जल्द घुल जाती हैं औऱ रक्त में मिलकर काम शुरू कर देती हैं।

जबकि एस्प्रिन और ओमेप्राजोल (हार्ट बर्न, गैस की दवा) जैसी दवाओं में विशेष एसिड रेजिस्टेंस कोटिंग होती है, ये पेट से होकर गुजरती जरूर हैं लेकिन घुलती छोटी आंत में जाकर हैं और वहीं इनका विशेष काम होता है। इन दवाओं को तोड़ने पर इनकी कोटिंग नष्ट हो जाती है और ये बेअसर हो जाती हैं।

आपने देखा होगा कि कुछ टैबलेट्स परससटेंड रिलीज, कंट्रोल्ड रिलीज या एक्सटेंडेड रिलीज लिखा होता है। ये दवाएं धीरे धीरे 12 से 24 घंटे तक रिलीज होकर असर छोड़ती रहती हैं। ऐसी टैबलेट्स को तोड़ना, चबाना या चूसना पेट, आंत या मुंह को नुकसान पहुंचा सकता है।

हार्ट की दवा डाइगोक्सिन, एंटी कोगुलेंट दवा डेबीगेट्रान और एंटी हाइपरटेंसिव टैबलेट्स इस श्रेणी में आती हैं। डाइगोक्सीन को क्रश करके खाना बहुत नुकसानदेह हो सकता है। जितना जरूरी सही दवा लेना होता है, उतना ही जरूरी दवा को सही तरीके से लेना भी है।

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