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अगर आप भी बनाते हैं रंगोली,तो जानें इसके पीछे छुपी ये खास कथा

रंगोली बनाने की परंपरा काफी पुरानी है। दिवाली या कोई शुभ मुहूर्त होने पर अधिकतर घरों में मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए रंगोली बनाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य घर को सजाना होता है साथ ही इससे घर में खुशियां भी आती है। विवाह हो, त्योहार हो या फिर कोई उत्सव हो, रंगोली को घर में बनाना बेहद ही शुभ माना जाता है।

अगर आप भी बनाते हैं रंगोली,तो जानें इसके पीछे छुपी ये खास कथा

रंगोली बनाने की परंपरा काफी पुरानी है। दिवाली या कोई शुभ मुहूर्त होने पर अधिकतर घरों में मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए रंगोली बनाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य घर को सजाना होता है साथ ही इससे घर में खुशियां भी आती है। विवाह हो, त्योहार हो या फिर कोई उत्सव हो, रंगोली को घर में बनाना बेहद ही शुभ माना जाता है।

तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात आदि राज्यों में हर खास मौके पर रंगोली बनाई जाती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मंगल कार्यों के पूजन से पहले रंगोली बनाने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है।

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कहां से शुरू हुई रंगोली

रंगोली संस्कृत का शब्द 'रंगावली' से लिया गया है। अन्य राज्यों में इसे 'अल्पना' भी कहा जाता है। इसे केवल त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि शुभ अवसरों, पूजा-पाठ आदि पर भी बनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाए तो, भगवान प्रसन्न होते हैं।

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रंगोली की प्राचीन कथा

रंगोली के बारे में एक प्राचीन कथा है। एक बार शंकर जी हिमालय दर्शन के लिए निकले, और जाते समय पार्वती जी से कहा- जब मैं घर वापस लौटूं तो मुझे घर और आंगन में मन को प्रसन्न करने वाला कुछ खास मिलना चाहिए। अगर ऐसा ना हुआ तो मैं दुबारा हिमालय लौट जाऊंगा। यह सुन कर माता पार्वती चौंक गई, इसके बाद शंकर जी हिमालय की ओर चल दिए।

पार्वती जी ने घर में सफाई की और घर को अच्छा बनाने के लिए पूरे आंगन को गोबर से लीप दिया। घर पूरी तरह से सूखा भी नहीं था कि शंकर भगवान के आने की खबर आ गई। फिर पार्वती जी ने फूल हाथ में लेकर उनका स्वागत करने के लिए चल दीं,लेकिन गीले गोबर के कारण वो फिसल गईं और उनके महावर लगे पैरों की आकृती बन गई।

तभी भगवान शंकर वहां आ गए और उसे देख खुश हो उठे। उन्होंने कहा कि अब जिन घरों में रंगोली बनाकर सुंदरता बढ़ाई जाएगी, तो वहां मेरा वास होगा। भगवान शंकर की कथा के दिन से यह परम्परा आज भी प्रचलन में चली आ रही है। इसलिए दिवाली और अन्य मंगल कार्यों पर हर घर में रंगोली बनाई जाती है।

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