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कॉस्मेटिक सर्जरी से पा सकते है अपने गालों पर डिंपल

इस सर्जरी को कराने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरुर ले लें।

कॉस्मेटिक सर्जरी से पा सकते है अपने गालों पर डिंपल
नई दिल्ली. हर लड़की की इच्छा होती है कि प्रीति जिंटा और दीपिका पादुकोण की तरह उसके गालों पर भी डिंपल आएं। सिर्फ लड़कियां ही नहीं लड़के भी चाहते है कि उनके गालो पर शाहरुख खान के जैसे डिंपल हो। ऐसा अब पूरी तरह से मुमकिन है। गालों पर डिंपल पड़ने से आपकी मुस्कान में चार चांद लग जाते हैं। आमतौर पर माना जाता है कि बुक्कीनेटर मांसपेशी व अन्य मांसपेशियों में गैप के कारण डिंपल्स बनते हैं। ये डिंपल्स हंसते या मुस्कुराते वक्त चेहरे को और आकर्षक बना देते हैं।
सर्जरी से भी बनते है डिंपल
डिंपल निर्माण सर्जरी बहुत ही आसान प्रक्रिया है। डिंपल बनाने के लिए गाल में अंदर की तरफ एक छोटा-सा दर्दरहित चीरा लगाया जाता है। ये चीरा बाहर की तरफ इसलिए नहीं लगाया जाता, ताकि चेहरे पर निशान न बने।
सर्जरी से पहले आपका मुंह पूरी तरह से साफ होना चाहिए। इसके लिए लगभग दो दिन पहले ही एंटीसेप्टिक माउथवॉश का इस्तेमाल शुरू करने की सलाह दी जाती है। दो दिन पहले ही किसी भी तरह की एस्प्रिन गोलियों का सेवन बंद कर देना होता है।
सामान्य एनेस्थीसिया के तहत मुंह के भीतर एक छोटा-सा चीरा लगाया जाता है। मांसपेशी को बाहरी त्वचा की भीतरी परत के लिए हटाया जाता है। एक छोटा टांका मांसपेशियों के माध्यम से गाल के अंदर लगाया जाता है। यह बाहरी त्वचा के भीतरी भाग की सतह के नीचे की मांसपेशी के माध्यम से बाहर आता है।
जब टांके लग जाएं, तो समझ जाइए कि आपके डिंपल बन गए हैं। दोनों तरफ के डिंपल बनने में लगभग दो घंटे का समय लगता है। प्रक्रिया खत्म होते ही आप तुरंत घर जा सकते हैं। सर्जरी के बाद पहले कुछ हफ्तों को फॉलआउट पीरियड कहते हैं। इस समय आपके डिंपल्स हमेशा दिखाई देते हैं। लेकिन जब टांके घुल जाएं, तब ही डिंपल्स सिर्फ मुस्कुराने पर ही नजर आएंगे। इस सर्जरी के टांके काटे नहीं जाते, बल्कि ये खुद ब खुद घुल जाते हैं। बाहरी त्वचा पर किसी भी तरह का कोई कट आदि का निशान नहीं पड़ता।
सजर्री के बाद थोड़ी सावधानी
डिंपल सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। इस सर्जरी में किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। कुछ कॉम्पलीकेशंस अवश्य हो सकती हैं, जैसे सूजन, थोड़ी सी कमजोरी और इंफेक्शन। लेकिन ये भी जल्द ही ठीक हो जाती हैं। इस तरह की कॉम्पलीकेशंस अक्सर ओरल हाइजीन की तरफ पूरा ध्यान न देने से ही होती हैं।
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