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डायबिटीज को करेंगे नजरअंदाज तो ''डायबिटिक न्यूरोपैथी'' का खतरा

डायबिटिक न्यूरोपैथी आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं।

डायबिटीज को करेंगे नजरअंदाज तो
नई दिल्ली. डायबिटीज स्वयं एक बीमारी होने के साथ ही कई बीमारियों की जन्मदाता भी है। इसमें लापरवाही बरतने पर आप डायबिटिक न्यूरोपैथी की गिरफ्त में भी आ सकते हैं। इसलिए डायबिटिक पेशेंट्स को लगातार जांच कराने के साथ ही अलर्ट रहना भी बहुत जरूरी है।
आमतौर पर लोग मधुमेह यानी डायबिटीज को एक आम बीमारी समझते हैं, लेकिन यही आम बीमारी आपके शरीर में अन्य बहुत सी बीमारियों को भी जन्म देती है। कभी-कभी यह बीमारी आपके शरीर में नसों की विकृति को भी जन्म देती है। मधुमेह के कारण उत्पन्न होने वाली नसों की ऐसी ही एक विकृति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इस बीमारी के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं और जानकारी के अभाव में कभी-कभी यह बीमारी बेहद विकराल रूप ले लेती है।
क्या है डायबिटिक न्यूरोपैथी
जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि मधुमेह के कारण नसों को होने वाली क्षति को ही डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। लंबे समय तक शुगर के बिगड़े स्तर से पनपे इस रोग के कारण शरीर के विभिन्न अंगों में खासतौर से पांव में सुन्नता, झंझनाहट, दर्द और जलन का अहसास होता है। साथ ही इस रोग के चलते नसों की कार्यकारी शक्ति का भी हृास होता है। कभी-कभी इस रोग के कारण पांवों में कमजोरी और चलने में भी परेशानी का अहसास होता है। इतना ही नहीं, कुछ स्थितियों में तो रोगी के पैर में घाव होने पर उसका पांव भी शरीर से अलग करना पड़ सकता है।
अलग-अलग प्रकार- डायबिटिक न्यूरोपैथी के आमतौर पर तीन प्रकार पाए जाते हैं।
पेरीफेरल न्यूरोपैथी- इसे दूरस्थ नाड़ी रोग भी कहते हैं। इसका सीधा असर हाथों और पैरों में दिखाई देता है। इसमें आपके हाथों और पैरों की अंगुलियों में दर्द, सुन्न होने के कारण स्पर्श या तापमान की अनुभूति न होना, पैरों में जलन, तेज दर्द, चुभन यहां तक कि चलने में भी परेशानी का आभास होता है। कभी-कभी इस बीमारी के चलते पैरों में गैंगरीन भी हो जाता है।
क्रेनियल न्यूरोपैथी- इसका असर पेशेंट की आंखों की रोशनी और उसकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। कभी-कभी क्रेनियल न्यूरोपैथी के कारण आपकी आंखों की पलक पैरालाइज भी हो जाती है, व्यक्ति को देखने में परेशानी होती है।
ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी- इसे स्वायत्त नाड़ी रोग भी कहते हैं। यह हमारे हृदय, पेट, फेफड़े, मूत्राशय, आमाशय और आंतांे पर प्रभाव डालती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को कब्ज या दस्त होना, खाना खाने के बाद पेट फूलना, मूत्राशय की असंयमता और रुक-रुक आना या मूत्राशय के दौरान जलन का अहसास जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
पहचानें लक्षण
अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं, तो कुछ संकेतों के जरिए आप यह पता लगा सकते हैं कि आपकी बीमारी अब गंभीर रूप धारण करने वाली है। दरअसल, डायबिटिक न्यूरोपैथी के मरीज को शरीर में दर्द, जलन या झंझनाहट के अतिरिक्त ऐंठन, मांस-पेशियों में संकुचन, थकावट, कमजोरी, चक्कर आना, दस्त, लैंगिक निष्क्रियता, मूत्राशय पर नियंत्रण न रहना और नजर पर नकारात्मक प्रभाव जैसे भी कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें।
उपचार
अपने ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाए रखें। साथ ही एक स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं, जिससे मधुमेह के दुष्प्रभाव से बचा जा सके। जब आपका शुगर कंट्रोल में रहेगा, तो इस तरह की परेशानी नहीं होगी। लेकिन अगर आपकी स्थिति गंभीर है, तो आप किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की मदद से कुछ दवाइयों का सेवन करें।
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