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यायावरों के साथ: ऊफरैंखाळ, शशिखाळ, मौलेखाळ, चित्तौंड़खाळ, लखोरा घाटी

रामनगर से हमने गर्जिया माता की तरफ प्रस्थान किया।

यायावरों के साथ: ऊफरैंखाळ, शशिखाळ, मौलेखाळ, चित्तौंड़खाळ, लखोरा घाटी
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मलेठी से हमने सतपुलि के लिए प्रस्थान किया। सतपुलि बजार बहुत ही सुंदर लग रहा था। वहां से हम गुमखाळ की ऊकाळ की तरफ जा रहे थे। सुरु भुला ने कुछ दूर चलने पर एक स्थान दिखाया। जानकारी दी यहां पर डा. विनोद बछेति जी को बाग दिखाई दिया था। गुमखाळ के बाद उतराई का रास्ता था। हटण्या पर रुककर हमनें चाय पी।

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