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जानें ओमीक्रॉन के 10-11वें दिन कैसे होते है लक्षण, ऐसे करें आप अपना बचाव

इन दिनों कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन (Omicron) दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है। कई देशों में इसके सामने लगातार सामने आ रहे है।

जानें ओमीक्रॉन के 10-11वें दिन कैसे होते है लक्षण, ऐसे करें आप अपना बचाव
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प्रतीकात्मक तस्वीर

Omicron : इन दिनों कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन (Omicron) दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है। कई देशों में इसके सामने लगातार सामने आए है। राजधानी दिल्ली में ओमीक्रॉन का दूसरा मामला सामने में आया है। कहा जा रहा है कि ओमीक्रॉन डेल्टा वेरिएंट से 3-4 गुना खतरनाक है, इसलिए आपको इसे हल्के में बिल्कुल भी नहीं लेना चाहिए। यहां आपको ओमीक्रॉन के लक्षण और इससे बचाव के उपाय के बारे में बताया जा रहा है, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं।

ओमीक्रॉन के लक्षण

-ज्यादा थकान महसूस होना

-सिर दर्द

-हल्का बुखार

- शरीर में दर्द

-मांसपेशियों में दर्द

-सिर दर्द

10-11वें दिन दिख सकते हैं ये लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 10-11वें दिन में रेस्पिरेटरी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-रनिंग नोज, ड्राई कफ, गले में खराश आदि। लेकिन डेल्टा वेरिएंट की तरह इसमें संक्रमित व्यक्ति का स्वाद और सूंघने की क्षमता खत्म नहीं होती है।

डायग्नोसिस

डेल्टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रोन का नेचर अलग है। इसके डायग्नोसिस के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट के साथ जीनोम सीक्वेंसिंग करवानी जरूरी है। जीनोम सीक्वेंसिंग से वैरिएंट के फैलने का भी अनुमान लगाया जा सकता है। आरटीपीसीआर टेस्ट से यह नहीं पता चलता कि व्यक्ति कोरोना के किस वैरिएंट से संक्रमित है। भारत में अभी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्टिंग की प्रक्रिया बहुत स्लो और महंगी है, इसकी वजह से यहां नए वेरिएंट के मामले कम आ रहे हैं।

ट्रीटमेंट मैथड

जहां तक ओमिक्रोन वेरिएंट के ट्रीटमेंट का सवाल है। माइल्ड इंफेक्शन होने पर हो सकता है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती ना होना पड़े या रेस्पिरेटरी सपोर्ट की जरूरत ना पड़े। लेकिन हाई रिस्क मरीजों को मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दी जा सकती है, जो उनकी बॉडी के मैकेनिज्म को मजबूत बनाती है। वहीं, वायरस के स्पाइक प्रोटीन को नष्ट करने और शरीर के सेल्स से जुड़ने से रोकती है।

बचाव के उपाय

- कोविड के नए वैरिएंट से खुद को ही नहीं, परिवार और समाज को बचाने के लिए पैनिक ना होकर हमें सावधान रहना होगा।

-कोविड प्रोटोकॉल और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करें। घर से बाहर जाने पर ट्रिपल लेयर्ड और वेल-फिटेड मास्क पहनें। संभव हो तो डबल-मास्क पहनें।

-भीड़-भाड़ में कम से कम 2 मीटर की दूरी बनाकर चलें यानी सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करे।

- हाइजीन का ध्यान रखें। बाहर से आकर या वॉशरूम से आकर हाथों को कम से कम 20 सेकेंड तक जरूर धोएं।

-वैक्सीन की दोनों डोज जरूर लगवाएं। संभव हो तो बूस्टर डोज लगवाएं ताकि कोविड संक्रमण होने और सीवियर स्टेज तक पहुंचने से बचाव हो सके।

-ज्यादा भीड़भाड़ वाले इलाकों, पब्लिक प्लेस, बाजार में जाने से बचें। शादी-ब्याह या अन्य समारोह में पूरी सावधानी बरतें।

-बाहर से लाए सामान खासकर फल-सब्जियों को खुले पानी या रनिंग वॉटर के नीचे अच्छी तरह धोकर सुखाकर ही इस्तेमाल करें।

-इम्यूनिटी को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से दूर रहें, जैसे- स्मोकिंग और ड्रिंकिंग ना करें।

-घर का बना हुआ पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन करें। जंक फूड या प्रोसेस्ड फूड के सेवन से बचें।

-स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। सोने-जागने, खाने-पीने का समय निश्चित करें। डेली 30-40 मिनट एक्सरसाइज करें।

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