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आंखों में आंसू न आए तो, डैमेज हो सकता है कॉर्निया

कुदरती आंसू नहीं बन पाने से कॉर्निया डैमेज होकर दिखना भी बंद हो सकता है।

आंखों में आंसू न आए तो, डैमेज हो सकता है कॉर्निया
नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि आपकी आंखों के लिए आंसू कितना जरूरी है, नहीं न क्योंकि इन छोटी बातों पर कोई गैर नहीं करता है लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि अगर आंखों से आंसू सूख जाए तो आपकी आंखों की कॉर्निया डैमेज हो सकती है।
आंखों में पलक झपकते ही भारीपन और खिंचाव महसूस हो रहा है? देखते-देखते ब्लर हो जाना या फिर दिखाई नहीं देना? आंखों में ऐसा महसूस कुदरती आंसू नहीं बनने पर होता है। कुदरती आंसू नहीं बन पाने से कॉर्निया डैमेज होकर दिखना भी बंद हो सकता है। चालीस से पैंतालीस साल की उम्र में हार्मोनल बदलाव होने पर आंसुओं का बनना बंद हो जाता है। इससे पलक और आंखों के बीच फ्रेक्शन कम होने से पर्याप्त आंक्सीजन नहीं मिल पाती।
यह फ्रेक्शन नहीं होने से आंखों में इंफेक्शन होने की आशंका भी बढ़ जाती है, जबकि यह कुदरती आंसू चौबीस घंटे लगातार बनते हैं। यह नाक की नली के जरिए बहकर इंफेक्शन से बचाते हैं। कुदरती आंसुओं का नहीं बनना ड्राई आई कहलाता है। पलक झपकने पर कॉरिनया की पारदर्शिता में रगड़ होती है। इससे पारदर्शिता खत्म होने पर रोशनी जा सकती है। इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता कम होती है।
दरअसल, आंसू नहीं बनने पर मिट्टी के कण बाहर निकल पाते हैं। आंखों में इंफेक्शन बढ़ता है। आंसू बंद और सूखी आंखें होने पर मॉइश्चराइजर डालें या आंखों में रिफ्रेश टियर ड्रॉप डालें। डॉक्टर के नहीं लिखने पर भी यह ड्रॉप आंखों में डाल सकते हैं। कारबोक्सी मिथाइल सेल्यूलोज सॉल्ट नाम से यह ड्रॉप उपलब्ध है।
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