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गर्मी में कोल्ड ड्रिंक पीते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, नहीं तो हो सकती है ये बीमारियां

गर्मी के मौसम में लोगों को कोल्ड ड्रिंक पीना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन इसमें मौजूद प्रमुख कंपोनेंट सोडा वाटर हमारी हेल्थ के लिए हार्मफुल हो सकता है। ऐसे में इसके सेवन से बचना चाहिए या बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

गर्मी में कोल्ड ड्रिंक पीते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, नहीं तो हो सकती है ये बीमारियां
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गर्मी के मौसम में लोगों को कोल्ड ड्रिंक पीना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन इसमें मौजूद प्रमुख कंपोनेंट सोडा वाटर हमारी हेल्थ के लिए हार्मफुल हो सकता है। ऐसे में इसके सेवन से बचना चाहिए या बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इस बारे में सरोज सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली की एचओडी-डायटिक्स डॉ. निधि धवन पूरी जानकारी दे रही हैं।

कार्बोनेटेड वाटर को सोडा वाटर कहते हैं, इसमें मिनरल वाटर में सोडियम बाई कार्बोनेट घुला होता है। इसे क्लब सोडा, सेल्टजर, स्पाकर्लिंग वाटर या फिज्जीर वाटर भी कहते हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक्स, फिज्जील ड्रिंक्स में सोडा होता है। आजकल, सोडा वाटर बॉटल्स में विशेष दाब की स्थितियों में कार्बन डाई ऑक्साइड इंजेक्ट करके बनाया जाता है।

अत्यंत कम मात्रा में सोडियम कार्बोनेट को सामान्यत: एक सुरक्षित पदार्थ माना जाता है, लेकिन इसका नियमित या अधिक मात्रा में सेवन बहुत हार्मफुल हो सकता है।

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सोडा वाटर से नुकसान

  • नमक का रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड होता है, इसका एक प्रमुख घटक सोडियम है।
  • जिन लोगों को नमक से समस्या है उन्हें सोडे से भी समस्याएं होती हैं क्योंकि इसका रासायनिक नाम सोडियम कार्बोनेट है, इसका भी एक प्रमुख घटक सोडियम है।
  • अधिक सोडियम लेने से हाइपर टेंशन और हाई ब्लड प्रेशर हो जाता है। लगातार हाइपर टेंशन के बने रहने से हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती हैं।
  • कईं विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग अधिक मात्रा में सोडे का सेवन करते हैं, वो दूध कम पी पाते हैं, इससे उनके शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है।
  • बोन मास भी कम होने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। दांतों का इनेमल नष्ट हो जाता है।
  • कईं अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि एक गिलास सोडा वाटर प्रतिदिन पीने से कोरोनरी हार्ट डिजीज और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
  • जो लोग सोडे का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं, उनमें हार्टअटैक की संभावना 20 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

बेकिंग सोडा-बेकिंग पावडर

इन दोनों को ही लीविंग एजेंट माना जाता है, इसका अर्थ है दोनों का ही उपयोग चीजों को पकाने में किया जाता है, इससे कार्बन डाईऑक्साइड उत्पन्न होती है और चीजें फूलती हैं। बेकिंग पावडर में बेकिंग सोडा होता है, लेकिन दोनों पदार्थों को अलग-अलग स्थितियों में उपयोग किया जाता है।

बेकिंग सोडा शुद्ध सोडियम बाई कार्बोनेट होता है। जब बेकिंग सोडे को नमी और एसिडिक इनग्रेडिएंट्स जैसे दही, चॉकलेट, छाछ, शहद से मिलाया जाता है तो रासायनिक क्रिया होती है, इससे कार्बन डाईऑक्साइड के बुलबुले निकलते हैं।

बेकिंग पावडर में भी सोडियम बाई कार्बोनेट होता है, लेकिन इसमें एसिडिफाईंग एजेंट और ड्राईंग एजेंट (सामान्यत: स्टार्च) पहले से ही होता है। बेकिंग सोडा स्वाद में खट्टा होता है, जबकि बेकिंग पावडर का स्वाद न्यूट्रल होता है। बेकिंग पावडर का उपयोग केक और बिस्किट बनाने में किया जाता है। आप घर में भी बेकिंग पावडर बना सकते हैं।

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क्लब सोडा को कार्बोनेटेड वाटर भी कहते हैं, यह सॉफ्ट ड्रिंक्स से लेकर मिक्सड एल्कोहलिक बिवरेजेज में मुख्य घटक के रूप में उपयोग किया जाता है। क्लब सोडा सादे पानी में कार्बन डाईऑक्साखइड को घोलकर बनाया जाता है। इस प्रक्रिया से बनने वाले पदार्थ का फॉर्मुला एचटूसीओथ्री है, इसे विज्ञान की भाषा में कार्बोनिक वाटर कहते हैं।

बचें इसके सेवन से

  • सोडे का सेवन कई रूपों में किया जाता है चाहे वह बेकिंग सोडा हो या ड्रिंकिंग सोडा।
  • लगभग सभी सॉफ्ट ड्रिंक्स में भी सोडे का उपयोग होता है।
  • इसके सेवन से कार्डियोवैस्युलर डिजीजेज, हाइपर टेंशन, स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा काफी होती है जिसका सीधा संबंध कार्डियोवैसक्यूलर डिसीजेज से होता है।
  • महिलाओं में सोडे के अधिक सेवन से ऑस्टिोयोपोरोसिस का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • सोडे का सेवन सबसे ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक्स के द्वारा ही होता है।
  • इन ड्रिंक्स में शूगर, कैफीन और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है लेकिन पोषक तत्व जीरो होते हैं।
  • इसलिए इनके सेवन से हमारे शरीर को नुकसान के अलावा कुछ नहीं होता।
  • लेकिन कम मात्रा में लाइम सोडा हमारे पाचन तंत्र को दुरस्त रखता है।
  • इसमें जीरो कैलोरी होती है और यह एसिडिटी को नियंत्रित करता है।
  • लेकिन जिन्हें हाइपरटेंशन की समस्या हो उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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