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Christmas 2021: इस क्रिसमस पर अपने बच्चों की परवरिश में शामिल करें Jesus Christ की ये शिक्षाएं

बच्चों की परवरिश में, व्यवहार में अच्छी बातों को, आदतों को शामिल करना बहुत जरूरी है। क्रिसमस एक ऐसा मौका देता है, जब हम बच्चों को प्रभु यीशू के उपदेश-संदेश समझाकर एक अच्छा इंसान बना सकते हैं।

Christmas 2021: इस क्रिसमस पर अपने बच्चों की परवरिश में शामिल करें  Jesus Christ की ये शिक्षाएं
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Christmas 2021: इस क्रिसमस पर अपने बच्चों की परवरिश में शामिल करें Jesus Christ की ये शिक्षाएं

Christmas 2021: हम सबके जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आ गया क्रिसमस। इस दिन देश-दुनिया भर में प्रभु यीशु के जन्मदिन को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। उनके बताए उपदेश-संदेशों को याद किया जाता है। बच्चों को भी इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन वे क्रिसमस ट्री Christmas 2021 Tree) सजाते हैं। उन्हें बड़ों से गिफ्ट, चॉकलेट्स मिलते हैं। ये बातें उन्हें बहुत खुशी देती हैं। लेकिन इसी के साथ यह भी जरूरी है कि बच्चे प्रभु यीशू की शिक्षाओं को जानें और अमल में भी लाएं। इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को प्रभु यीशू के उपदेश-संदेशों को बताएं-समझाएं, जिससे उनका जीवन सही मार्ग पर चलते हुए खुशहाल बनें।

1-करुणा के भाव को अहमियत

प्रभु यीशू के जीवनकाल की कई कहानियां मौजूद हैं, जहां उन्होंने जरूरतमंद और रोगियों की मदद की, उनकी देखभाल स्वयं की, उनके प्रति करुणा दिखाई। ऐसा करके वह हर व्यक्ति के हृदय में बस गए। इस तरह प्रभु यीशू का सबके लिए यही संदेश था कि अपने मन में करुणा का भाव रखें। जरूरतमंदों की मदद करें। ऐसा करके ही हम सच्चे-नेक इंसान कहलाएंगे। हम अपने बच्चों को भी प्रभु यीशू के करुणा के भाव वाले उपदेशों और शिक्षाओं से अवगत कराएं। उन्हें बताएं कि वे बुजुर्गों की सेवा करें। हम उन्हें पशु-पक्षियों को भी कभी दुख ना पहुंचाने की सीख दें। बच्चे इन बातों को जब अमल में लाएंगे तो ही वे करुणामय बनेंगे।

2-प्रेम बांटने को दें महत्व

प्रभु यीशू अपने एक कथन में कहते हैं, 'मैं तुम्हें एक नया आदेश देता हूं, एक-दूसरे से प्रेम करो, जैसे मैंने तुमसे किया है।' सच भी यही है, जब तक हम एक-दूसरे के प्रति मन में प्रेम की भावना नहीं रखते हैं, तब तक हमारा जीवन अधूरा है, हम खुशी-सुकून से दूर हैं। अगर आप चाहती हैं कि आपके बच्चों का भविष्य खुशियों से भरा हो तो उन्हें प्रेम, स्नेह, अपनापन बांटने, साझा करने का महत्व समझाएं। अपने छोटे भाई-बहनों के साथ प्यार और अपनेपन से रहने को कहें। इसी के साथ उन्हें अपनी चीजें दोस्तों के साथ बांटने को कहें। इस तरह उनका अपने हमउम्र बच्चों से रिश्ता बेहतर होगा, उनमें आपस में प्यार बढ़ेगा।

3- सच्चाई की राह पर बल

समय कितना भी बदल जाए, सच बोलने वालों का महत्व कभी कम नहीं होगा। क्योंकि सच बोलने वाला व्यक्ति, सबका हित सोचता है। प्रभु यीशू ने भी सभी को सच्चाई की राह पर चलने का संदेश दिया था। उनका एक कथन है-'मैं मार्ग हूं, मैं सत्य हूं और जीवन हूं, मेरे पास आए बिना कोई परमपिता तक नहीं पहुंचता है।' इस बात का अर्थ है कि सत्य के मार्ग पर चलकर ही ईश्वर तक पहुंचा जा सकता है, जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। इसलिए जरूरी है, बच्चों को प्रभु यीशू के इस शिक्षा से अवगत कराया जाए। जब कभी बच्चा किसी छोटी सी बात पर झूठ बोले तो उसे टोकें और समझाएं कि ऐसा करना गलत है। साथ ही उसे हमेशा सच की राह पर चलने को कहें। इसके बाद अगर वह कभी अपनी किसी गलती के बारे में ईमानदारी से बताता है तो उसे इस सच पर डांटें नहीं। हां, समझाएं जरूर कि आगे से ऐसा गलत काम ना करे। इस तरह बच्चे सच बोलने से डरेंगे नहीं और आगे भी सच की डगर पर चलेंगे।

यही सब बातें बच्चे के व्यवहार का हिस्सा शुरुआत से बन जाएंगी तो ताउम्र बनी रहेंगी, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। वे एक खुशहाल जीवन जिएंगे।

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