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मामूली न समझें बच्चों के बाल झड़ने की समस्या, हो सकती है गंभीर बीमारी!

आजकल सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों को भी हेयरफॉल की समस्या हो रही है। वैसे तो यह समस्या सही डाइट न लेने के कारण होती है। लेकिन इसके अलावा भी इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं।

मामूली न समझें बच्चों के बाल झड़ने की समस्या, हो सकती है गंभीर बीमारी!
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आजकल सिर्फ बड़ों को ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों को भी हेयरफॉल की समस्या हो रही है। वैसे तो यह समस्या सही डाइट न लेने के कारण होती है। लेकिन इसके अलावा भी इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। बच्चों के बाल झड़ने से माता-पिता का चिंतित होना जायज है। करीबन 90 प्रतिशत बाल बढ़ने की अवस्था में होते हैं, जबकि बाकी 10 प्रतिशत बढ़ चुके होते हैं और विश्राम की अवस्था में होते हैं।

दो-तीन वर्षों तक हर महीने एक व्यक्ति के बाल 1 सेंटीमीटर की लंबाई में बढ़ते रहते हैं और उसके बाद वे विश्राम की अवस्था में आ जाते हैं। विश्राम की अवस्था में आने के बाद, बाल गिरने लगते हैं ताकि नए बालों की उपज हो सके।

तो आपके बच्चे के रोजाना 50 से 100 बालों का गिरना एक आम बात है, उसके बावजूद अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे के बाल अपेक्षा से अधिक झड़ रहे हैं तो अपने चिकित्सक की सलाह लें।

इन कारणों से झड़ते हैं बच्चों के बाल

कुछ बच्चों के बाल झड़ने के कारण हैं, बच्चे के बालों को रंगना, ब्लीच करना, या सीधे और घुंघराले करना। बालों की डाई जो कि बालों के रंगने के लिए प्रयोग की जाती है, उसमे रसायन मिले होते हैं और वे बालों पर हानिकारक प्रभाव छोड़ते हैं। और बालों को सीधा करने या घुंघराले करने की बालों की मशीन जिसे हेयर ड्रायर कहते हैं, उसके प्रयोग से भी आपके बच्चे के बालों पर बुरा असर पड़ता है।

ये हैं अन्य कारण

अलोपेसिया:

बच्चों में बालों के झड़ने का मुख्य कारण होता है अलोपेसिया। अमरीका में करीबन 20 लाख बच्चे अलोपेसिया से ग्रसित होते हैं। हालांकि, काफी बच्चों के बालों की समस्याओं का उपचार सफलतापूर्वक हो जाता है, फिर भी समय पर या सही इलाज न करने से कई बच्चों में दोबारा बाल पैदा नहीं होते, और ऐसे बच्चों को जीवन भर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है।।

टेलोजन एफ्लूवीअम:

आकस्मिक सदमा या आघात, भावनात्मक परेशानियां वगैरह भी बालों के झड़ने का कारण बन सकते हैं। तेज़ बुखार भी इस रोग का एक कारण होता है। हालांकि बालों की पुटिकाएं लचीली होती हैं, पर जब ‘टेलोजन एफ्लूवीअम’ आक्रमण करता है तो बालों के दोबारा पैदा करने की पुटिकाओं की योग्यता पर स्थायी रूप से असर पड़ता है।

त्रिकोटिलोमेनिया:

बच्चों में आंशिक रूप से बालों के झड़ने की अवस्था को त्रिकोटिलोमेनिया के नाम से जाना जाता है। इस अवस्था में बाल असमान रूप से झड़ते हैं, और गंभीर मामलों में यह अवस्था आंखों की भौहों पर भी असर कर सकती है।

यह एक ऐसी अवस्था है जिसमे, किसी डर के कारण, बच्चे में अपने ही बाल नोचने की उत्तेजना पैदा होती है। इस तरह के बालों के झड़ने की अवस्था को स्थायी रूप से इलाज करने के लिए इसे जड़ से उखाड़ने की आवश्यकता होती है।

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