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बच्चों की लाइफ को बनाना है खुशहाल, तो अपनाएं ये खास टिप्स

सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि उनका बच्चा हमेशा खुशहाल रहे। इसके लिए अपनी ओर से वे पूरी कोशिश भी करते हैं कि उनकी संतान का आगामी जीवन सफल और सुखमय बीते। निश्चय ही आप भी ऐसा ही चाहते होंगे। ऐसे में विशेषज्ञों द्वारा सुझाई कुछ बातों पर अमल करना बहुत कारगर हो सकता है।

बच्चों की लाइफ को बनाना है खुशहाल, तो अपनाएं ये खास टिप्स
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हर मां-बाप को अपना बच्चा सबसे प्यारा होता है। वे उसे दुनिया की हर खुशी देना चाहते हैं, उसका जीवन खुशियों से भरा देखना चाहते हैं। इसके लिए अपने स्तर पर हर संभव प्रयास भी करते हैं, लेकिन इस प्रयास में कुछ ऐसी बातों से वे चूक जाते हैं, जो बच्चे के बेहतर भविष्य की राह में बाधा बन सकते हैं। ऐसे में पैरेंटिंग के दौरान इन छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों पर गौर करना जरूरी है।

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1.समझें बच्चे के मन की बात

पैरेंट्स को बच्चों के साथ कड़क और रौबदार तरीके से पेश न आकर, दोस्ताना व्यवहार रखना चाहिए ताकि बच्चा खुलकर अपनी समस्याएं उन्हें बता सके। हर रोज स्कूल से लौटने के बाद बच्चे के साथ खेलें, हंसी-मजाक करें और उससे दिनभर की गतिविधियों के बारे में पूछें। कहानी, किस्सों के माध्यम से उसे अच्छे-बुरे व्यवहार की जानकारी दें।

अगर बच्चे के चेहरे पर किसी प्रकार की हिचक, डर या मायूसी देखें तो उसके मन की परतों को धीरे-धीरे खोलकर वास्तविकता जानें। पैरेंट्स को नियमित रूप से स्कूल के टीचर्स से भी मिलते रहना चाहिए और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी लगे या कमी नजर आए तो स्कूल मैनेजमेंट या प्रिंसिपल की नॉलेज में लाएं।

2.स्टडी स्ट्रेस से बचाएं

आजकल शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में कॉम्पिटिशन इतना ज्यादा है कि पैरेंट्स हर वक्त अपना सारा जोर बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर ही लगाकर रखते हैं। बच्चा जरा-सी देर भी खेलना-कूदना चाहे तो उसे तुरंत टोकने लगते हैं। बच्चों के साथ ऐसा करना गलत है।

अगर आपको अपने बच्चे को सचमुच स्मार्ट औऱ इंटेलीजेंट बनाना है तो उसे कम से काम 7-8 घंटे सोने दें, मनोरंजन करने दें और दिन का कुछ समय खेलकूद के लिए भी निर्धारित करें। पढ़ाई करने का समय निश्चित कर दें ताकि वह खुद उस वक्त पढ़ने के लिए मेंटली प्रिपेयर रहे।

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3.खेलने दें जरा खुलकर

अगर आपका बच्चा क्रिकेट, फुटबाल या कोई अन्य गेम खेलना पसंद करता है तो उसे डांटने के बदले प्रोत्साहित करें। ‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार फुटबाल या गेंद से खेलने वाले और फिजिकल एक्टीविटी में संलग्न रहने वाले बच्चों की बोन डेंसिटी, मसक्यूलर स्ट्रेंथ और बॉडी बैलेंसिंग पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है।

बालरोग विशेषज्ञों ने भी पैरेंट्स को सलाह दी है कि उन्हें अपने बच्चों को ‘गंदा’ या अस्वस्थ होने के डर से पार्क या बगीचे में खेलने से नहीं रोकना चाहिए। आउटडोर गेम बच्चों के शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ उनकी काल्पनिक शक्ति को भी बढ़ाते हैं। मिट्टी और खुली जगह में मस्ती के साथ खेलने वाले बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी मजबूत हो जाता है।

4.घर का माहौल रहे अच्छा

कुछ घरों में कलह का माहौल रहता है। पति-पत्नी आए दिन झगड़ते हैं। इससे न सिर्फ बच्चों का दम घुटता है बल्कि उनके दिमाग पर विपरीत असर पड़ता है। इसी तरह कई पैरेंट्स अनजाने में ही घर को अपने बच्चे के लिए कैद जैसा बना देते हैं। कुछ घरों में तो आलम ऐसा होता है कि बच्चा स्कूल से घर लौटते समय स्ट्रेस में आ जाता है कि घर जाते ही मम्मा पढ़ने के लिए बोलेंगी।

बेहतर यह होगा कि दिन में कुछ समय आप उसके साथ ‘मस्ती टाइम’ के रूप में रिजर्व करके रखें। इस दौरान उसके साथ कैरम, लूडो, सुडोकू, चेकर्स जैसे खेल खेलें या क्रॉस वर्ड पजल्स सॉल्व करें। उसके साथ बैठकर कुछ बच्चों जैसी बातें भी करें। घर का माहौल शांत रखें और पति-पत्नी आपसी संबंध भी प्रेमपूर्ण रखें तो बच्चे के लिए फायदेमंद होगा।

5.जगाएं सृजनात्मक क्षमता

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि इमेजिनेशन संभावनाओं का दरवाजा खोलने वाली होती है। बच्चों में यह इमेजिनेशन पावर आप उनकी क्रिएटिविटी निखार कर पैदा कर सकती हैं। शुरू से ही बच्चों को एक्टिव रखने और उनकी क्रिएटिविटी को निखारने के लिए उन्हें छोटे-छोटे काम सौंपें और अपनी गाइडेंस में उनसे ये काम पूरे करवाएं।

इसके बाद कोई भी काम उसे अपने-आप ज्यादा से ज्यादा करने दीजिए। इससे उसमें सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। उसकी क्रिएटिविटी डेवलप होगी और सोचने-समझने की क्षमता भी विकसित होगी। इस तरह की बातों पर अगर पैरेंट्स ध्यान दें तो बच्चों का बचपन तो खुशहाल रहेगा ही, उनके सुखमय भविष्य की भी नींव तैयार हो जाएगी।

6.गुड हैबिट्स की इंपॉर्टेंस

अपने बच्चे का जीवन खुशहाल बनाने के लिए आपको शुरू से कुछ गुड हैबिट्स उसे जरूर सिखानी चाहिए। जैसे समय से उठना और सोना। ठीक समय पर अपना लंच और डिनर करना। सुबह उठते ही सबका अभिवादन करना। रोज नहाना और हाइजीन मेंटेन करना।

टीवी दूर से और निश्चित टाइम ही देखना। बड़ों का आदर करना, विनम्र होकर बातचीत करना और छोटों से प्यार से पेश आना। झूठ नहीं बोलना और घर के कामों में हाथ बंटाना। ये आदतें जीवनपर्यंत उसके बहुत काम आएंगी।

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