logo
Breaking

बच्चों का आईक्यू बढ़ाने का सबसे आसान तरीका, कभी नहीं होगा फेल

आमतौर पर माना जाता है कि बच्चों में इंटेलीजेंसी, जेनेटिक होती है। लेकिन तमाम रिसर्च बताते हैं कि अगर बच्चे की परवरिश सही ढंग से की जाए तो उसका आईक्यू लेवल काफी बढ़ सकता है। इसके लिए किस तरह का माहौल घर में रखें और बच्चे को कैसे ट्रीट करें, आपके लिए बहुत ही उपयोगी सलाह।

बच्चों का आईक्यू बढ़ाने का सबसे आसान तरीका, कभी नहीं होगा फेल

भले ही कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे की इंटेलीजेंस में पैरेंटिंग स्टाइल की कोई खास भूमिका नहीं होती, यह आमतौर पर जेनेटिक होती है लेकिन इसके बावजूद वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग इस बात से सहमति नहीं रखता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के विशेषज्ञों ने बच्चों की इंटेलीजेंस पर जेनेटिक और एन्वॉयर्नमेंटल प्रभाव का पता लगाने के लिए अध्ययन किया।

इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चे की बुद्धिमत्ता और कार्यकौशल पर जींस और माहौल (जिसमें पैरेंटिंग स्टाइल और बच्चे की हेल्थ और न्यूट्रीशन पर ध्यान देना भी शामिल है) दोनों बातों का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से बच्चे के शुरुआती जीवन में, जब उसका मस्तिष्क आकार ले रहा होता है, नई चीजें ग्रहण करने के लिए सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है, इसमें पैरेंटिंग स्टाइल का बहुत बड़ा योगदान होता है।

अमेरिका में मनोविज्ञान के प्रोफेसर क्रेग रामे ने अपने जीवन के तीस साल इस विषय पर अध्ययन करने में बिताए हैं। उनका मानना है कि बचपन से ही दिमाग को अच्छी खुराक और सही ट्रेनिंग दी जाए, तो ऐसे बच्चे आगे चलकर इंटेलीजेंट होते हैं।

क्या करें पैरेंट्स

मनोविज्ञानी शैरोन लैंड्समैन रामे अपने पति के साथ ‘अर्ली इंटरवेंशन’ प्रोजेक्ट पर काम करती हैं। उनका कहना है कि बच्चे की आई क्यू बढ़ाने के लिए पैरेंट्स का फॉर्मल रूप से उन्हें पढ़ाना जरूरी नहीं है। ज्यादा जरूरी है, उसके लिए सही और प्रेरक माहौल तैयार करना ताकि बच्चा नई चीजें सीखने और उन्हें तेजी से ग्रहण करने के लिए प्रेरित हो। इसके लिए विशेष रूप से पैरेंट्स इन बातों को अमल में लाएं-

बच्चे से खूब करें बातें :

मनोविज्ञानियों का कहना है कि छोटे बच्चों से आपको ढेर सारी बातें करनी चाहिए। ये किसी भी विषय पर हो सकती हैं। उसकी खान-पान में रुचि, अगल-बगल मौजूद चीजें, आस-पास मौजूद लोग, सामने पड़ा खिलौना, आसमान में दिखने वाला चांद या घर के छज्जे पर बैठी चिड़िया। जब आप बच्चे से तरह-तरह की बातें करती हैं, तो इसका उसे दोहरा फायदा होता है।

पहला-उसे नए-नए शब्द मिलते हैं, जिससे उसको वोकैबुलरी इंप्रूव होती है, वह बोलना सीखता है। दूसरा-उसका दिमाग आपकी बातों को समझने की कोशिश में सक्रिय हो जाता है, जिससे उनकी ब्रेन एक्सरसाइज होती है। एक अन्य साइकोलॉजी के प्रोफेसर जेनेलेन ह्यूटनलोशर कहते हैं कि सक्सेसफुल इंटेलेक्चुअल फंक्शनिंग में भाषा की भूमिका अहम होती है।

बच्चे को संगीत सुनाएं :

इरविन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने पैरेंट्स को सलाह दी है कि उन्हें शुरू से ही अपने बच्चों को मधुर संगीत सुनाना चाहिए। म्यूजिक न सिर्फ मानसिक सुकून देता है, बल्कि बच्चे की पर्सनालिटी और स्किल भी इंप्रूव करता है। नवजात शिशु शब्दों को पहचानना, समझना और याद रखना बाद में सीखते हैं लेकिन संगीत और हाव-भाव जल्द ही समझने लगते हैं।

जब वे जरा भी हिलना-डुलना या घुटनों के बल चलना सीख जाते हैं, तो संगीत जिस दिशा से आ रहा है, उधर की ओर रुख करना भी सीख जाते हैं। संगीत सुनने से बच्चों की आईक्यू, दिमागी शक्ति और सुकून में इजाफा होता है। बच्चा तीन-चार साल का हो गया हो तो उसे ग्रुप सिंगिंग और म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट की शिक्षा भी देनी चाहिए। इससे उनकी तर्क शक्ति बढ़ती है। बच्चों को तरह-तरह के गानों पर एक्ट करते हुए डांस करना सिखाएं और गाने-गुनगुनाने की प्रैक्टिस भी करवाएं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि म्यूजिक सुनने और सीखने वाले बच्चे पजल सॉल्व करने में दूसरे बच्चों से फास्ट और एक्यूरेट रहते हैं। फिजिक्स के प्रोफेसर गोरडोन शा कहते हैं कि म्यूजिक बजाने और सुनने वाले बच्चे अलग तरीके से सोचते हैं। उनमें बुद्धिमानी का लेवल आमतौर पर काफी ऊंचा होता है।

बच्चे को बाहर घुमाएं :

मनोविज्ञानी क्रेग रामे कहते हैं, ‘एक बच्चा बाहरी दुनिया में जितना घूमता है, उतना ही उसके बारे में जानता है। साथ ही बुद्धिमान और जानकार भी बनता है। बच्चे को आस-पास के किसी उद्यान में, सड़क पर, बरामदे में, शॉपिंग मॉल में या कहीं बाहर ले जाएं। वहां उसे तमाम नई-नई चीजों के बारे में बताएं। कुछ चीजों को स्पर्श करने दें। कुछ चीजें सूंघने दें।

चूंकि हर वक्त बच्चे को लेकर घर से बाहर घूमना संभव नहीं, इसलिए जब वह घर में रहे तो उसे पत्र-पत्रिकाओं में छपे जीव-जंतु, फूलों-फलों, सब्जियों, चांद-सितारे, वाहन आदि की तस्वीरें दिखाएं और उनके बारे में सामान्य भाषा में जानकारी दें। बच्चे को घुटनों के बल पर इधर-उधर दौड़ने भी दें।

सर्दियों में भूलकर भी ना करें ये काम, बढ़ सकता है 'कैंसर का खतरा'

हर नई एक्टिविटी पर शाबासी दें :

बच्चा जब भी कुछ नया और पॉजिटिव काम करे तो उसे शाबासी जरूर दें। इससे उसका उत्साह बढ़ेगा और वह कुछ नया करने के लिए प्रेरित होगा। चाहे वह घुटनों से चले, अपने हाथ से दूध की बोतल या कप उठाए, किसी खिलौने को बजाए या कोई भी काम करे। इससे बच्चे के मस्तिष्क और इमोशंस पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है। जब भी आप बच्चे को शाबाशी देती हैं, उसके दिमाग में न्यूरोकेमिकल्स की बाढ़-सी आ जाती है, जो ब्रेन में मौजूद सर्किट्स को मजबूत करती है। जबकि बात-बात पर बच्चे को डांटने मारने या हतोत्साहित करने से इससे विपरीत रिएक्शन होता है, इससे बच्चे का दिमाग मंद हो सकता है।

किशोरावस्था तक लगातार दें उसका साथ :

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चा जब से जन्म लेता है, तब से किशोरावस्था तक उसके मस्तिष्क विकास की प्रक्रिया जारी रहती है। इसलिए आप में और बच्चे में संवाद और बॉन्डिंग लगातार बनी रहनी चाहिए। बच्चे की रुचि क्रिएटिव कामों में जगाएं, उसे सुरुचिपूर्ण हॉबीज अपनाने को प्रेरित करें और अच्छे कामों के लिए उसकी प्रशंसा भी करें। इससे बच्चे का आईक्यू लेवल तो दुरुस्त होगा ही, उसका एकेडमिक अचीवमेंट भी इंप्रूव होगा। किशोरावस्था में बच्चों के दिमाग में सबसे ज्यादा उथल-पुथल होती है, इसलिए इस वक्त उन्हें आपका साथ और मार्गदर्शन सबसे ज्यादा चाहिए।

Share it
Top