Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

गर्दन में लगातार दर्द रहने से हो सकती है ये गंभीर बीमारी, न करें इग्नोर

अचानक से कई बार हमारे गर्दन और कंधों के नीचे वाले हिस्से में दर्द होने लगता है। जो बेहद असहनीय होता है। अगर ये दर्द लगातार कई दिनों तक रहता है और दवाई लेने पर ही आपको आराम मिलता है तो ऐसे में आप सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के शिकार बन सकते हैं।

गर्दन में लगातार दर्द रहने से हो सकती है ये गंभीर बीमारी, न करें इग्नोर

अचानक से कई बार हमारे गर्दन और कंधों के नीचे वाले हिस्से में दर्द होने लगता है। जो बेहद असहनीय होता है। अगर ये दर्द लगातार कई दिनों तक रहता है और दवाई लेने पर ही आपको आराम मिलता है तो ऐसे में आप सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के शिकार बन सकते हैं।

इसलिए आज हम आपको सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण,कारण और उपचार बताने जा रहे हैं। जिससे आप समय रहते ही सावधानी बरत सकें।

यह भी पढ़ें : अगर आप हैं स्ट्रोक की बीमारी से पीड़ित, तो खो सकते हैं मानसिक संतुलन

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के लक्षण :

1. सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस में गर्दन में दर्द के साथ-साथ मांसपेशियों में अकड़न आने लगती है। कई बार ये दर्द कंधें,सिर और पीठ से होते हुए पैरों तक पहुंच जाता है।

2. सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में अक्सर सिर के पिछले हिस्से में दर्द होता है। ये दर्द कभी सिर के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है, तो कभी सिर के निचले हिस्से की ओर बढ़ता है।

3.सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस में कई बार असामान्य लक्षण भी दिखते हैं, जैसे मरीज को सीने में दर्द महसूस होना। जिसे वो दिल संबंधी दर्द मानता है।

4. कई बार सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस में बिना चोट के ही गर्दन,कंधो और हाथों में असहनीय दर्द होता है। इसके साथ ही मरीज को कमजोरी और सनसनी महसूस होती है।

5. Myelopathy से पीड़ित व्यक्ति को हाथों से लिखने में समस्या का सामना करना पड़ता हैं। जो शरीर की कमजोरी और इंद्रियज्ञान की कमी से होता है।

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के कारण :

1. लगातार गर्दन और सिर झुकाकर काम करना।

2. लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करना।

3. धूम्रपान करना।

4. बैठे-बैठे सो जाना।

5. लंबे समय तक कंधे के सहारे फोन पर बात करना।

यह भी पढ़ें : गठिया की समस्या से पाना है छुटकारा, तो अपनाएं ये तरीका

सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस के उपचार :

1. पेनकिलर्स का सेवन करें।

2. योगा और एक्सरसाइज करें।

3. गर्दन की सर्जरी के जरिए नसों पर दबाव कम करना।

4. गले की मांसपेशियों की अकड़न को रोकने वाली दवाईयों का सेवन करना।

5. गर्दन की मूवमेंट को सीमित करने के लिए सर्वाइकल बैंड का इस्तेमाल करें।

Next Story
Top