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इस वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में होती है समस्या, जानें लक्षण और उपचार

इस बात को लेकर वह बहुत परेशान रहने लगती हैं और मानसिक रूप से तनाव में आ जाती हैं। कई बार अवसाद से भी घिर जाती हैं। लेकिन प्रेग्नेंसी में आने वाली समस्याओं का इलाज संभव है। गर्भधारण में आने वाली समस्याओं को अगर समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका इलाज आसानी से संभव है।

इस वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में होती है समस्या, जानें लक्षण और उपचार

गर्भधारण में आने वाली समस्याओं को अगर समय रहते पहचान लिया जाए तो इसका इलाज आसानी से संभव है। इलाज के साथ-साथ ही सही जीवनशैली को अपनाना भी जरूरी है। गर्भधारण न होने के कारणों, लक्षण और उपचार के बारे में जानना बहुत जरूरी है। हर महिला के जीवन में मां बनने का अहसास अनोखा होता है। लेकिन कई महिलाएं इस अहसास से वंचित रह जाती हैं।

इस बात को लेकर वह बहुत परेशान रहने लगती हैं और मानसिक रूप से तनाव में आ जाती हैं। कई बार अवसाद से भी घिर जाती हैं। लेकिन प्रेग्नेंसी में आने वाली समस्याओं का इलाज संभव है।

दरअसल, किसी महिला के प्रेग्नेंट न होने के पीछे कई मेडिकल प्रॉब्लम्स जिम्मेदार होती हैं। ज्यादातर समस्याओं का इलाज दवा से हो जाता है। कुछ मामलों में सर्जरी भी की जाती है।

गर्भधारण न कर पाने के कारण

  • महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें पहला कारण है, ओवलेटरी डिस्फंक्शन यानी अंडा बनने में समस्या आना।
  • दूसरा कारण है, फेलोपियन ट्यूब का किसी वजह से ब्लॉक होना।
  • तीसरा कारण है, यूट्रस में समस्या। कई मामलों में मेल पार्टनर भी जिम्मेदार होता है, अगर उसमें किसी प्रकार की कमी है, तो भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है।

प्रमुख लक्षण

गर्भधारण में आने वाली समस्याओं के कुछ खास लक्षण होते हैं। अगर इन्हें समय पर पहचान लिया जाए तो इलाज करवाया जा सकता है। हर समस्या के अलग-अलग लक्षण होते हैं।

जैसे ओवलेटरी डिस्फंक्शन की प्रॉब्लम पोलिसिस्टिक ओवरी डिजीज की वजह से होती है और यह समस्या महिलाओं में मोटापे के कारण होती है।

आजकल जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल बदली है, मोटापे की समस्या बढ़ी है, महिलाओं में पोलिसिस्टिक ओवरी डिजीज ज्यादा देखने को मिल रही है। इससे पीरियड्स इररेगुलर हो जाते हैं। जब ऐसा होता है तो प्रेग्नेंसी में समस्या आती है।

फेलोपियन ट्यूब ब्लॉक होने पर उसमें सूजन आ जाती है। ऐसा पहले हो चुकी टीबी की बीमारी की वजह से भी हो सकता है। इसके भी कुछ लक्षण होते हैं, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है, जैसे बार-बार पेट में दर्द होना।

यूट्रस के अंदर या बाहर रसौली होना भी गर्भधारण में समस्या पैदा करता है। इस समस्या के होने पर पीरियड्स के समय बहुत दर्द होता है। साथ ही ब्लीडिंग ज्यादा होती है और लंबे समय तक भी हो सकती है।

उपचार

गर्भधारण में आने वाली समस्याओं को पहचान कर उसका उपचार किया जाता है। जैसे ओवलेटरी डिस्फंक्शन के लिए हारमोन को एक्टिवेट करने की दवा दी जाती है।

इस डिजीज की पेशेंट्स को रेग्युलर एक्सरसाइज करनी चाहिए, अपनी लाइफस्टाइल, डाइट भी सही रखनी चाहिए। डाइट में प्रोटीन की ज्यादा मात्रा लेनी चाहिए। जहां तक फेलोपियन ट्यूब और यूट्रस की समस्या की बात है, तो पहले दवा से इलाज किया जाता है।

लेकिन जब सही परिणाम नहीं मिलता है तो सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है। अगर इनमें से कोई भी समस्या नहीं है, तो मेल पार्टनर का चेकअप करवाना चाहिए। दरअसल, 30-40 पर्सेंट मामलों में कमी मेल पार्टनर में होती है, जिस वजह से महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है।

(ये रिपोर्ट डॉ. पूनम अग्रवाल, गायनेकोलॉजिस्ट-लैप्रोस्कोपिक सर्जन व श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली में सीनियर कंसल्टेंट से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है।)

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