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बेहोशी के लिए दिल नहीं दिमाग है जिम्मेदार, जानिए कैसे

बेहोशी का दौरा तब पड़ता है जब मस्तिष्क में खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है।

बेहोशी के लिए दिल नहीं दिमाग है जिम्मेदार, जानिए कैसे
नई दिल्ली. बेहोशी का संबंध आपके मस्तिष्क से नहीं दिल से होता है! बेहोश होने के ज्यादातर मामलों का ताल्लुक मस्तिष्क की गड़बड़ियों के बजाय दिल की धड़कनों में होने वाली गड़बड़ियों से होता है। आंखों के आगे धुंधलाहट, अंधेरा छा जाने, हल्का सिरदर्द, मिचलाहट, चक्कर आने के बाद बेहोशी की घटना को सामान्य बात समझकर अनदेखी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये सभी लक्षण दिल की गंभीर बीमारी के चेतावनी भरे संकेत हो सकते हैं।
मैक्स हॉस्पिटल में कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी लैब एंड एरिथमिया सर्विसेज की प्रमुख डॉ.वनीता अरोड़ा ने बताया कि बेहोशी या चिकित्सा की शब्दावली में सिंकोप एक प्रकार से चेतना शून्यता ही है। बेहोशी की हालत में पहुंचने वाले किसी व्यक्ति की चेतना पूरी तरह लौट आती है लेकिन उसे चेतनाशून्य होने का पहले से कोई आभास नहीं होता।
बेहोशी का दौरा तब पड़ता है जब मस्तिष्क में खून की आपूर्ति बाधित हो जाती है। मस्तिष्क में आॅक्सीजन की आपूर्ति निम्न रक्तचाप के कारण बाधित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क में खून की उपस्थिति कम हो जाती है क्योंकि खून पंप करने में दिल असमर्थ हो जाता है।
क्यों छाती है बेहोशी-
डॉ.अरोड़ा ने बताया कि बेहोशी की स्थिति यदि दिल की अनियमित धड़कनों-एरिथमिया के कारण आती है तो इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए और जितनी जल्दी हो सके चिकित्सा शुरू कर देनी चाहिए। डॉक्टर के अनुसार एरिथमिया के साथ दो बड़ी स्थितियां जुड़ी होती हैं-ब्रेडिकार्डिया और टेकीकार्डिया। दिल की धड़कनें जब तेज हो जाती हैं तो ब्रेडिकार्डिया की स्थिति बनती है लेकिन इसके विपरीत जब दिल की धड़कनें धीमी पड़ जाती हैं तो टेकीकार्डिया की स्थिति आ जाती है।
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नीचे की स्लाइड्स में जानिए, बेहोशी में क्या होती है दिल की स्थिती-
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