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दिमागी बुखार के लक्षण,कारण और उपचार

आपने अक्सर बरसात के मौसम लोगों को बुखार होते देखा और सुना होगा,लेकिन देश में हर साल तेजी से दिमागी बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हो जाता है। इस बुखार में व्यक्ति बहकी-बहकी बातें भी करने लगता है।

दिमागी बुखार के लक्षण,कारण और उपचार

आपने अक्सर बरसात के मौसम लोगों को बुखार होते देखा और सुना होगा,लेकिन देश में हर साल तेजी से दिमागी बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हो जाता है। इस बुखार में व्यक्ति बहकी-बहकी बातें भी करने लगता है।

क्योंकि बुखार व्यक्ति के दिमाग पर हावी हो जाता है। इसलिए जब भी किसी को भी इस तरह के लक्षण दिखाई दे तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। आज हम आपको दिमागी बुखार के लक्षण, कारण और उपचार बताने वाले हैं।

दिमागी बुखार के लक्षण :

1.सिर में दर्द होना

2.मांसपेशियो में कमजोरी महसूस होना

3.हैमीपैरेसिस- शरीर के सभी बाहरी अंगो मे कमजोरी महसूस होना

मतली या उल्टी लगना

4.गर्दन, पीठ और कंधो मे अकड़न

5.दिमागी बुखार होने पर व्यक्ति तेज बुखार और ठण्ड लगने के साथ-साथ की मानसिक स्थिति में भी परिवर्तन होते है।

दिमागी बुखार के कारण :

1.दिमागी बुखार में लोगो को कई प्रकार के विषाणुओं जैसे रब्बिस वायरस, हर्पिस सिम्पलेक्स पोलियो वायरस, खसरे का विषाणु, और छोटी चेचक का विषाणु आदि दिमागी बुखार का कारण होता है।

2.दिमागी बुखार होने पर कुछ लोगो के मस्तिष्क मे सूजन हो जाती है। और यह सूजन किसी भी घातक विषाणु के संक्रमण से होता है। घातक विषाणु जैसे जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस, सेंट लूसी वायरस, वेस्ट नील वायरस आदि वायरल इन्सेफेलाइटिस के प्रमुख कारण होते है।

3.जीवाणु इन्सेफेलाइटिस एक बहुत घातक संक्रमण के कारण होता है। इन्सेफेलाइटिस मुख्यतः दो प्रकार का होता है प्राइमरी इन्सेफेलाइटिस और सेकेंडरी इन्सेफेलाइटिस।

प्राथमिक इन्सेफेलाइटिस में विषाणु या अन्य संक्रमक वाहक सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करते है जिससे संक्रमण एक क्षेत्र मे रहता है। और दूसरे प्रकार के इन्सेफेलाइटिस तब होता है जब हमारी रोग प्रतिरोषक क्षमता कमजोर पड़ जाती है और यह विषाणु हमारे मस्तिष्क की स्वस्थ कोशिकाओं पर आक्रमण कर देती है।

दिमागी बुखार के उपचार :

1. शरीर को पूरी तरह आराम दें।

2. रोगी को अंधेरे और शांत कमरे में रखें।

3. लिक्विड फूड न लें। ओआरएस का घोल गरम पानी में लें।

4. रोगी को अनार का जूस दें और लहसुन का सेवन भी करवायें।

5. शरीर के तापमान को कम करने के लिए बर्फ के टुकड़ों को कपड़े में लपेटकर सिकाई करें।

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