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रिसर्चः अब मच्छर मरेंगे इंसान के शरीर की गंध से

इंसान के शरीर की गंध से मच्छरों को मारने के लिए फंदा बनाया गया है, जिसमें फंसकर वे मर जाते हैं।

रिसर्चः अब मच्छर मरेंगे इंसान के शरीर की गंध से
नई दिल्ली. बारिश के मौसम में अक्सर मच्छरों की संख्या में बढ़ जाती है और साथ ही मच्छरों के बढ़ने से बीमारी भी बढ़ जाती हैं। इन जानलेवा मच्छरों को मारने के लिए कई तरह के कीटनाशकों का इस्तेमाल भी किया जाता है लेकिन, हाल ही में हुए एक स्टडी के मुताबिक, अब मच्छरों को मारने के लिए इंसान के ही शरीर से निकलने वाले गंध का इस्तेमाल किया जा सकता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नीदरलैंड की वैगनिन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने केन्याई और स्विस वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह स्टडी किया है। इस स्टडी को पूरा करने में इन वैज्ञानिकों को तकरीबन 3 साल लग गए।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नए शोध में इंसान के शरीर से निकलने वाली गंध से मच्छरों को मारने वाला एक फंदा बनाया जाएगा। स्टडी के मुताबिक, मच्छरों को मारने के इस फंदे से केन्या में मलेरिया से पीड़ितों की संख्या में करीब 70 फीसदी की कमी आई है। रिसर्चर्स का कहना है कि इस तरह इंसान के शरीर की गंध को मच्छरों के चारे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें फंसकर वे मर जाते हैं। ये फंदा लैंपशैड्स की तरह दिखाई पड़ता है।
हालांकि इस स्टडी में यह भी पाया गया कि सिर्फ उन घरों में मलेरिया के पीड़ितों की संख्या कम मिली है जहां पर इस तरह के फंदो का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि मच्छरों को मारने वाला यह फंदा सफल तो हुआ है लेकिन इसकी कई तरह की कमियां भी है। इस फंदे को सोलर पैनल की जरुरत होती है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा होती है। यह फंदा केन्या में मच्छरों को मारने में काफी हद तक असरदार है लेकिन वहीं अफ्रीका में इससे कुछ खास असर नहीं हुआ है।
दरअसल, इस फंदे के लिए इंसान के शरीर में पाए जाने वाली केमिकल और कार्बन डाई ऑक्साइड की जरुरत होती है। बता दें कि ये फंदा इस तरह का है कि कई बार इसके लिए प्रोपेन टैंक्स, इलेक्ट्रिसिटी या बर्फ जरूरी होता है। लोगों द्वारा सोलर पैनल को अधिक संख्या मं पसंद किया जा रहा क्योकि इससे मच्छर मरे या न मरे इसका उपयोग लोग फोन चार्ज करने और बल्ब जलाने के लिए उपयाग भी कर सकते हैं।
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