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बच्चे इस वजह से कर लेते हैं सुसाइड, मां-बाप रखें इन बातों का ध्यान

इसमें कोई दो राय नहीं है कि बच्चों के भविष्य के लिए उनके बोर्ड्स के रिजल्ट की भागीदारी काफी रहती हैं। इस स्थिति में बच्चों के मार्क्स कम आने पर उन्हें डाटने या मार लगाने की बजाए पेरेंट्स की ये जिम्मेदारी है कि उनके साथ प्यार से पेश आएं और चीजों को समझाएं।

बच्चे इस वजह से कर लेते हैं सुसाइड, मां-बाप रखें इन बातों का ध्यान
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ज्यादातर बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें एग्जाम को लेकर चिंता हो न हो लेकिन रिजल्ट के लिए वह सबसे ज्यादा टेंशन में रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके रिजल्ट पर सबकी निगाहें टिकी रहती हैं। रिजल्ट आने से पहले बच्चों को सबसे ज्यादा इस बात की चिंता रहती है कि अगर मार्क्स कम आए तो पेरेंट्स क्या बोलेंगे, लोग क्या कहेंगे, मार्क्स कैसे कम आए, पढ़ाई नहीं करता... इस तरह की तमाम बातें बच्चों के मन में आती रहती हैं।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि बच्चों के भविष्य के लिए उनके बोर्ड्स के रिजल्ट की भागीदारी काफी रहती हैं। इस स्थिति में बच्चों के मार्क्स कम आने पर उन्हें डाटने या मार लगाने की बजाए पेरेंट्स की ये जिम्मेदारी है कि उनके साथ प्यार से पेश आएं और चीजों को समझाएं।

साइकोलॉजिस्ट और साइकोथेरेपिस्ट मालविका राव के मुताबिक रिजल्ट आने से पहले या रिजल्ट में मार्क्स कम आने पर बच्चों के सुसाइड जैसा कदम उठाने के पीछे कहीं न कहीं मां-बाप की बड़ी-बड़ी उम्मीदें और उनकी बातें भी कारण बनती हैं।

आखिरकार मां-बाप से कहां चूक होती है, बच्चे सोसाइड क्यों करते हैं और पेरेंट्स को कैसे बिहेव करना चाहिए, इस बारे में मनोवैज्ञानिक मालविका राव पूरी जानकारी दे रही हैं।

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ऐसे होती है चूक

दरअसल रिजल्ट टाइम में बच्चों के अंदर फेल होने या कम मार्क्स आने के कारण स्वाभाविक तौर पर बच्चों में हीन भावना आ जाती है। उन्हें शर्म महसूस होती है। ऐसे में पेरेंट्स बच्चों को समझाने की बजाए मारने-डाटने लगते हैं या फिर दूसरे बच्चों से तुलना करने लगते हैं।

पेरेंट्स को कोशिश करनी चाहिए कि वह अपने बच्चे को समझे और उसे ये एहसास दिलाएं कि वह अगली बार और अच्छी प्रिपरेशन कर सकेगा। बच्चों को धीरे-धीरे यह एहसास करवाएं कि कहीं पर उनसे गलती हुई है।

इस वजह से बच्चे करते हैं सुसाइड

  • बच्चों को डाटने-मारने या दूसरे बच्चों से तुलना करने के कारण बच्चों में गिल्ट की भावना आ जाती है और उन्हें इंसल्ट फील होती है, जिसके कारण वह सुसाइड जैसा बड़ा कदम उठा लेते हैं।
  • बच्चे इमोशनली इतना ज्यादा हर्ट हो चुके होते हैं कि उनका आत्मविश्वास खो हो जाता है और वो लोगों को फेस नहीं करना चाहते।
  • बच्चों को सोसाइटी में खुद की निगेटिव इमेज दिखने लगती है, जिसके कारण वह यह कदम उठाते हैं।
  • बच्चों के मन में ख्याल आता है कि सब मेरा मजाक उड़ायेंगे, इसलिए वह लोगों को फेस करने से डरते हैं और सुसाइड कर लेते हैं।

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पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

मानसिकता: मां-बाप को बच्चों की संवेदनशील मानसिकता को समझना चाहिए। इस स्थिति में मां-बाप को भी समझदारी से काम लेना चाहिए कि वह बच्चों को सकारात्मक रूप से सपोर्ट करें।

आत्मविश्वास: बच्चों को डाटने की बजाए उनमें आत्मविश्वास जगाएं कि अगली बार बेस्ट करना या कम मार्क्स आने पर कहें कि कोई बात नहीं अगली बार मेहनत करना। साथ ही पेरेंट्स बच्चों को ऐसी सिचुएशन फेस करने के लिए मोटिवेट करें।

कहां हुई गलती: मां-बाप को गलती ढूंढ़ने की बजाए कोशिश करें ये जानने की कि बच्चे से गलती कहां हुई है। अगर बच्चा यह जानने की कोशिश कर रहा है कि उसके मार्क्स कम क्यों आए हैं तो उसमें बच्चे की मदद करें।

माहौल: बच्चों पर घर के माहौल का काफी असर पड़ता है। ऐसे में रिजल्ट आने से पहले और बाद में भी घर का माहौल खुशनुमा बनाकर रखें।

न करें पढ़ाई की बात: अगर बच्चे के मार्क्स कम आएं हैं तो कोशिश करें कि कुछ दिनों तक उससे पढ़ाई के बारे में कोई बात न करें। साथ ही हर वक्त उसके आसपास रहने की कोशिस करें। बच्चों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं।

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