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घर बैठे महिलाएं ब्लॉगिंग को ऐसे बनाएं कमाई का स्रोत और बनाएं पहचान

Blogging Tips : अक्सर महिलाएं घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी और परिवार की देखभाल में बिजी होने के कारण अपने प्रोफेशन से दूर हो जाती हैं या अपने टैलेंट को मनचाहे ढंग से एक्सप्रेस नहीं कर पाती हैं। लेकिन आप चाहें तो नई टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी नई पहचान बना सकती हैं। हम बता रहे हैं कुछ ऐसी महिलाओं के बारे मे, जिन्होंने अपने राइटिंग टैलेंट को ब्लॉगिंग के जरिए दुनिया के सामने लाकर, अपनी पहचान बनाई।

घर बैठे महिलाएं ब्लॉगिंग को ऐसे बनाएं कमाई का स्रोत और बनाएं पहचान
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अकसर महिलाएं घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी और परिवार की देखभाल में बिजी होने के कारण अपने प्रोफेशन से दूर हो जाती हैं या अपने टैलेंट को मनचाहे ढंग से एक्सप्रेस नहीं कर पाती हैं। लेकिन आप चाहें तो नई टेक्नोलॉजी की मदद से अपनी नई पहचान बना सकती हैं। हम बता रहे हैं कुछ ऐसी महिलाओं के बारे मे, जिन्होंने अपने राइटिंग टैलेंट को ब्लॉगिंग के जरिए दुनिया के सामने लाकर, अपनी पहचान बनाई।

मिलती है खुशी-संतुष्टि (मीनाक्षी सौरभ, घाना,अफ्रीका )

शादी होने के बाद जिम्मेदारियां बदलीं, प्राथमिकताएं भी बदलीं, साथ ही नए रिश्तों के साथ मेरा लिखना भी कहीं छूट-सा गया। जब शादी के बाद अफ्रीकन कंट्री घाना आई तो बहुत अकेलापन लगने लगा। ऐसा लगा जिंदगी निरुद्देश्य हो गई है। लेकिन धीरे-धीरे फिर से इंटरनेट पर साहित्य, अच्छे लेखकों को पढ़ना शुरू किया तो लगा कि मुझे भी दोबारा लिखना शुरू करना चाहिए। बस, फिर क्या था, मैंने भी उड़ान भरी। आज जब भी अपने ब्लॉग या कहानी पर लोगों की प्रतिक्रिया पढ़ती हूं तो बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है। विदेश में रहकर भी अब अपनों की कमी नहीं खलती है। मुझे खुशी होती है कि मेरी भी अपनी एक पहचान है।

गर्व है अपनी पहचान पर (शुभिका गर्ग, जबलपुर, मध्य प्रदेश)

एक समय तक मैं अपने घर-परिवार में व्यस्त रहने वाली एक कुशल गृहिणी थी। बस, कभी-कभी अपने मनोभावों को अपनी डायरी में लिख लिया करती थी। फिर धीरे-धीरे इंटरनेट पर लिखना शुरू किया। जब मैंने पहला ब्लॉग पोस्ट किया तो लोगों को मेरे लेखन का अंदाज पसंद आया और इस तरह मेरे ब्लॉग लिखने का सफर शुरू हुआ। ब्लॉगिंग से मेरे जीवन में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब मेरी लेखनी की वजह से मुझे एक संस्थान की एडिटोरियल टीम का सदस्य बनने का मौका मिला और आज मुझे गर्व है कि मेरी खुद की एक पहचान है।

मिला नया आत्मविश्वास (आर्या झा, हैदराबाद, तेलंगाना)

मैं एक कॉन्वेंट स्कूल में टीचिंग करती थी लेकिन बेटी की बेहतर परवरिश के लिए जॉब छोड़ दी। जब खाली समय मिलता था तो मैं कविताएं लिखती और फेसबुक पर पोस्ट कर देती थी। मेरी कविताएं पढ़कर, मेरे भाई और कुछ मित्रों ने कहानियां लिखने के लिए प्रोत्साहित किया और इस तरह मेरा ब्लॉगिंग का सफर शुरू हुआ। ब्लॉग लिखने से मुझ में बहुत आत्मविश्वास आया। इसके जरिए मैं लोगों से जुड़ी, अलग-अलग विचारों को जाना-समझा। इस तरह मैं तर्क की कसौटी पर परख कर ही अपनी बात रखने लगी। ऐसा होने पर मेरी बातों को लोग महत्व देने लगे। घर-परिवार और जानने वाले भी मेरी प्रशंसा करने लगे। आज मैं सबकी नजरों में अपने लिए प्रशंसा के भाव देखती हूं तो खुद पर गर्व महसूस होता है।

महसूस करती हूं एनर्जेटिक (खुशबू जैन, नोएडा, उत्तर प्रदेश)

मैं पेशे से सीए हूं और कुछ समय तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती थी। बेटी की परवरिश के चलते जॉब छोड़नी पड़ी, लेकिन ये मेरे लिए आसान नहीं था। जिसकी वजह से मैं डिप्रेस्ड रहने लगी। इससे उबरने के लिए मैंने लिखना शुरू किया। आज मैं खुद को एनर्जेटिक महसूस करती हूं और एक प्रोफेशनल ब्लॉगर हूं। अब तो ब्लॉगिंग का दायरा दिन-ब-दिन और बढ़ रहा है और महिलाएं जिस तरह इसका हिस्सा बन रही हैं ये वाकई सुखद है। इन सभी महिलाओं की तरह आप भी ब्लॉगिंग से अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकती हैं और अलग पहचान बना सकती हैं।

- डॉ. शिल्पा जैन सुराणा

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